ग्रेटर नोएडा। राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण (नालसा) के तत्वावधान में मंगलवार को शारदा विश्वविद्यालय में विचार गोष्ठी हुई। कार्यक्रम में देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमण ने कहा कि कानून के विद्यार्थी जरूरतमंदों की आवाज बनें। उन्होंने सामाजिक समस्याओं के बारे में सतर्क रहने और इसे हल करने के लिए कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं, कानूनी जागरूकता फैलाने के लिए लॉ के छात्रों की सराहना की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ने नालसा के बहु-भाषा पोर्टल का शुभारंभ भी किया। गोष्ठी में उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एमएन भंडारी, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू शामिल हुए।
उन्होंने लोगों में कानूनी जागरूकता फैलाने में नालसा के काम की सराहना की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय के लिए लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा। न्याय के लिए सभी दरवाजे हमेशा के लिए खुले हैं। देश में जनपद न्यायालयों के माध्यम से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं, कानून मंत्री किरण रिजीजू ने न्यायाधीशों के खिलाफ सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर की जा रही अप्रिय टिप्पणियों को लेकर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि कई लोग न्यायाधीश के जीवन और उनकी कड़ी मेहनत को नहीं समझते हैं। विधायिका और न्यायपालिका क्षेत्राधिकार के लिए नहीं लड़ रही है और वे दोनों इस देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने की टीम का हिस्सा हैं।