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मथुरा के मादौर में खरीद लिए करोड़ों रुपये के मिट्टी के टीले

Thu, 26 Dec 2019 12:48 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मथुरा
अमर उजाला ब्यूरो, मथुरा Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Thu, 26 Dec 2019 12:48 AM IST
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Crores of clay mounds purchased in Mathura
yamuna authority

यमुना प्राधिकरण में हुए 126 करोड़ के जमीन घोटाले में अफसरों ने जमकर लूट मचाई। मथुरा में रैंप बनाने के लिए जिन सात गांवों की भूमि दस्तावेज में खरीदी दिखाई गई, उसमें शामिल गांव मादौर में उपयोगी बताते हुए मिट्टी के टीले ही अफसरों ने करोड़ों रुपये में खरीद लिए। जबकि यह भूमि ऊंची-नीची, पहाड़नुमा और प्रयोग के लिहाज से एकदम बेकार थी।

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अब सीबीआई को मामले की जांच साैंपने से खलबली मच गई है। पुलिस अफसरों ने फाइलों को कुरेदना शुरू कर दिया है। हजारों पन्नों की फाइलें जुटा ली गई हैं। जल्द ही सीबीआई को जांच के सिलसिले में सौंप दी जाएंगी। दरअसल, सीबीआई को सौंपे गए कुछ दस्तावेज में सामने आया है कि मथुरा जिले के सात गांव मादौर, सेउपटटी बांगर, सेउपट्टी खादर, कौलाना बांगर, कौलाना खादर, सौतीपुर बांगर, नौहझील बांगर की भूमि कहीं भी एक जगह नहीं हैं।
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अधिकांश गांव में भूमि काफी दूर-दूर खरीदी गई है। मौके पर खरीदी गई भूमि खाली पड़ी हुई है। वहीं, सौंपे गए दस्तावेज में माना गया है कि भूमि को प्राधिकरण अफसरों ने आपसी सहमति से ही दोगुने से अधिक दामों पर खरीद लिया। प्रसार विहीन एक गांव के दो अखबारों में विज्ञापन प्रसारित करवा दिया गया। आपत्ति के लिए कोई सूचना भी प्रसारित नहीं कराई गई।
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जून में हुआ था खुलासा
यमुना प्राधिकरण में तैनात इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह ने थाना कासना में 3 जून 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले मथुरा के सात गांवों में 97 हेक्टेयर भूमि को कई फर्जी कंपनियां बनाकर खरीदा गया। मास्टर प्लान में यह क्षेत्र न होने के बावजूद जमीन का यमुना विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहण कराया गया।

मुकदमे में बढ़ती गई आरोपियों की संख्या
भूमि अधिग्रहण के घोटाले में 126 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। मामले में शुरुआत में कुल 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। इनमें यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (आईएएस) पीसी गुप्ता, तहसीलदार सुरेश चंद शर्मा, संजीव कुमार, जितेंद्र चौहान, विवेक कुमार जैन, सुरेंद सिंह, मदनपाल, अजीत कुमार, योगेश कुमार, वीरेंद्र चौहान, निर्दोष चौधरी, गौरव कुमार, मनोज कुमार, अनिल कुमार, स्वाति दीप शर्मा, सुदेश गुप्ता, सोनाली, प्रमोद कुमार यादव, निधि चतुर्वेदी रहे। बाद में आरोपियों की संख्या बढ़कर 38 हो गई। इनमें से 14 की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पूर्व सीईओ, एसीईओ की हुई गिरफ्तारी
22 जून 2018 को पीसी गुप्ता को मध्यप्रदेश के दतिया से गिरफ्तार किया गया था। यह घोटाले की पहली गिरफ्तारी थी। वह इस जेल में बंद है। इसके अलावा 15 दिसंबर 2019 को तत्कालीन एसीईओ सतीश कुमार को उनके ग्रेनो स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में तत्कालीन ओएसडी के साले अजित को बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया। मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश जुलाई 2018 में की गई थी। अब जाकर सीबीआई ने कदम उठाया है। मामले में आरोपी तहसीलदार रणवीर सिंह और सीबीआई का एक इंस्पेक्टर भी गिरफ्त में है।

अग्रिम जमानत की तैयारी में आरोपी
एंटी करप्शन न्यायालय ने यमुना प्राधिकरण में हुए जमीन घोटाले में प्राधिकरण परियोजना प्रबंधक समेत 20 आरोपियों को कुर्की के वारंट जारी किए हैं। कई आरोपी कुर्की की कार्रवाई से बचने के लिए आत्मसमर्पण की तैयारी में हैं। आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए एंटी करप्शन कोर्ट में जमानत की अर्जी भी डाल दी है।


यमुना प्राधिकरण में हुए 126 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। उन्होंने केस अपने हैंडओवर ले लिया है। हमारे स्तर से केस में पूरा सहयोग किया जाएगा।
- वैभव कृष्ण, एसएसपी, गौतमबुद्धनगर

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