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Noida News: कंप्यूटराइज्ड नहीं हुई वर्ष 1990 के बाद खतौनी, परेशान हैं किसान

Thu, 13 Nov 2025 12:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 13 Nov 2025 12:42 AM IST
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Khatauni has not been computerized since 1990, farmers are worried.
धनघटा। धनघटा तहसील क्षेत्र के छपरा मगर्बी और चपरा पूर्वी गांव की 1990 के बाद की खतौनी कंप्यूटराइज नहीं हुई है। जिसके चलते किसानों को 35 वर्ष से नई खतौनी नहीं मिल पा रही है। किसान खतौनी नहीं मिलने के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। धनघटा तहसील क्षेत्र के छपरा मगर्बी और चपरा पूर्वी गांव की खतौनी कंप्यूटर में नहीं दर्ज हो पाई थी। किसानों के लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 1990 तक की खतौनी किसी तरह कंप्यूटराइज हो सकी। लेकिन उसके बाद की खतौनी अभी तक कंप्यूटर में नहीं चढ़ी है। जिससे किसान खतौनी नहीं निकाल पा रहे हैं। किसान सुभग ने बताया कि उनके पिता राम शब्द की मौत हुए 20 वर्ष से अधिक का समय हो गए हैं। वरासत भी राम सुभग के नाम से हुई। लेकिन वह केवल मालिकान रजिस्टर तक सिमट कर रह गई। अभी तक कंप्यूटर में नहीं दर्ज हुई। जिसके कारण खतौनी निकालने पर राम शब्द के नाम से खतौनी निकल रही है। शिवदास पुत्र देवी शरण को मरे 18 साल से अधिक का समय गुजर गया। लेकिन उनके बेटे रामचंद्र के नाम से वरासत आज तक नहीं हुई। राजकुमार का कहना है कि 20 वर्ष पहले कर्मलाल और श्रीपत से दो बीघा खेत बैनामा लिया। जिसका दाखिल खारिज भी हो गया। लेकिन खतौनी कंप्यूटराइज न होने के कारण खतौनी आज भी कर्मलाल आदि के नाम से निकल रही है। किसानों का कहना है कि मालिकान रजिस्टर में सबका नाम दर्ज है। लेकिन 1990 के बाद की खतौनी उन्हीं लोगों के नाम से निकल रही है जिनके नाम खतौनी में 1990 के पहले थे। इसका 800 से अधिक किसान प्रभावित हो रहे हें। । ग्राम प्रधान देवेंद्र यादव का कहना है कि इस 1990 के बाद की खतौनी कंप्यूटराइज किए जाने की मांग को लेकर तहसीलदार को कई बार प्रार्थना पत्र दिया जा चुका। लेकिन वह कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। जब तक मालिकान रजिस्टर से खतौनी कंप्यूटर में फीड नहीं की जाएगी तब तक वर्तमान में जिनका नाम और हक जमीन पर है उनके नाम से खतौनी निकलना मुश्किल हो गया है।
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