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Noida News: नोएडा में प्रदूषण फैलाने के लिए जेपी इंफ्राटेक पर बढ़ेगा हर्जाना
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नोएडा में प्रदूषण फैलाने के लिए जेपी इंफ्राटेक पर लगेगा हर्जाना
- एनजीटी ने यूपीपीसीबी को दिया आदेश, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जाए पर्यावरणीय हर्जाने की गणना
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जेपी टाउनशिप में एसटीपी का संचालन नहीं होने से नाराज एनजीटी ने बिल्डर के ऊपर लगे पर्यावरणीय हर्जाने की दोबारा से गणना करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए यूपीपीसीबी इस हर्जाने की गणना करेगा।
नोएडा प्राधिकरण के नाले में सीवर गिराने के मामले में एनजीटी ने एसटीपी के संचालन पर पूर्व में रिपोर्ट मांगी थी। बिल्डर की तरफ से कोई जबाव नहीं दिया गया। जबकि याचिका में कहा गया है कि करीब 12 हजार लोग टाउनशिप में रहते हैं। वहीं, सेक्टर-133 में लेबर कैंप में भी सीवर बहाया जा रहा है। बिल्डर ने पूरे मामले में रिपोर्ट देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। प्रदेश सरकार की तरफ से एनजीटी को बताया गया है कि मौके पर निरीक्षण में एसटीपी चलता हुआ नहीं मिला। वहीं, हरित क्षेत्र भी विकसित नहीं किया गया है।
एनजीटी ने अब अपने आदेश में कहा है कि तीन सप्ताह में पर्यावरणीय हर्जाने के लिए यूपीपीसीबी अगली सुनवाई से पहले छह सप्ताह के अंदर फैसला ले। वहीं, यूपीपीसीबी ने कहा है कि तीन जून को सुनवाई इस मामले में की जानी है कि चार सप्ताह में हर्जाने की धनराशि पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। एनजीटी इस मामले में अब एक अगस्त को सुनवाई करेगा।
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- एनजीटी ने यूपीपीसीबी को दिया आदेश, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जाए पर्यावरणीय हर्जाने की गणना
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जेपी टाउनशिप में एसटीपी का संचालन नहीं होने से नाराज एनजीटी ने बिल्डर के ऊपर लगे पर्यावरणीय हर्जाने की दोबारा से गणना करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए यूपीपीसीबी इस हर्जाने की गणना करेगा।
नोएडा प्राधिकरण के नाले में सीवर गिराने के मामले में एनजीटी ने एसटीपी के संचालन पर पूर्व में रिपोर्ट मांगी थी। बिल्डर की तरफ से कोई जबाव नहीं दिया गया। जबकि याचिका में कहा गया है कि करीब 12 हजार लोग टाउनशिप में रहते हैं। वहीं, सेक्टर-133 में लेबर कैंप में भी सीवर बहाया जा रहा है। बिल्डर ने पूरे मामले में रिपोर्ट देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। प्रदेश सरकार की तरफ से एनजीटी को बताया गया है कि मौके पर निरीक्षण में एसटीपी चलता हुआ नहीं मिला। वहीं, हरित क्षेत्र भी विकसित नहीं किया गया है।
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एनजीटी ने अब अपने आदेश में कहा है कि तीन सप्ताह में पर्यावरणीय हर्जाने के लिए यूपीपीसीबी अगली सुनवाई से पहले छह सप्ताह के अंदर फैसला ले। वहीं, यूपीपीसीबी ने कहा है कि तीन जून को सुनवाई इस मामले में की जानी है कि चार सप्ताह में हर्जाने की धनराशि पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। एनजीटी इस मामले में अब एक अगस्त को सुनवाई करेगा।
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