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Noida News: जेपी इंफ्रा ने सौंपी प्राधिकरण को कार्ययोजना, अब यीडा कराएगा परीक्षण
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जेपी इंफ्रा ने प्राधिकरण को सौंपी कार्ययोजना, यीडा कराएगा परीक्षण
- एफएआर पर प्राधिकरण से अटका है मामला, 25 अगस्त को होगी एनसीएएलटी में सुनवाई
- 20 हजार खरीदारों और करीब 10 हजार किसानों से जुड़ा है मामला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जेपी इंफ्राटेक कंपनी को टेक ओवर करने वाली सुरक्षा रियल्टी लिमिटेड की ओर से यमुना प्राधिकरण के समक्ष अपनी कार्ययोजना (रिज्यूलेशन प्लाॅन) सौंप दिया है। इस कार्ययोजना का प्राधिकरण अब परीक्षण कराएगा और इसके लाभ-हानि की जांच कराएगा। इसके आकलन की जिम्मेदारी प्राधिकरण ने कैरी एंड ब्राउन कंपनी को दी है। अब यमुना प्राधिकरण और सुरक्षा को एनसीएएलटी के समक्ष 25 अगस्त को समझौता पक्ष दाखिल किया जाएगा। इससे पहले ही यह सारे काम कराने होंगे। इसके बाद जेपी से जुड़े करीब 20 हजार खरीदार और 10 हजार किसानों की समस्याएं दूर हो सकेंगी।
दरअसल, जेपी इंफ्राटेक ने यमुना एक्सप्रेसवे का निर्माण करने के दौरान प्रदेश सरकार से 36 साल के लिए करार किया था। मगर कुछ साल पहले ही जेपी इंफ्राटेक दिवालिया घोषित हो गई। जिसके बाद मामला एनसीएएलटी में चला गया। इससे 20 हजार खरीदार फंस गए। वहीं 6 जनपदों के 10 हजार किसानों को अतिरिक्त मुआवजे के रूप में मिलने वाली राशि भी फंस गई। सुरक्षा कंपनी ने जेपी इंफ्रा को टेकओवर करने के लिए अपनी कार्य योजना एनसीएएलटी में जमा कराई। उसके द्वारा दिए गए रिज्यूलेशन प्लान में यमुना प्राधिकरण को कई आपत्तियां हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या एफएआर की है और इसका आंकलन कराने के लिए यमुना प्राधिकरण ने करी एंड ब्राउन कंपनी को इसके आंकलन की 20 अगस्त तक करने की जिम्मेदारी दी है। इस प्रकरण में मामले की 25 अगस्त को सुनवाई होनी है।
क्या चाहता है सुरक्षा समूह
- सुरक्षा समूह एफएआर को 1.5 से बढ़ाकर 2.75 कराना चाहता है।
- कंपनी 36 साल के बाद 15 साल और टोल वसूलने का अधिकार चाहती है।
- कंपनी 6 जिले के किसानों को अतिरिक्त मुआवजे के रूप में 1689 करोड़ रुपये देने को तैयार है।
- कंपनी घर खरीदारों के 200 करोड़ रुपये के क्लेम और 330 करोड़ के थर्ड पार्टी क्लेम को तैयार है।
- कंपनी ने अनुबंध के तहत बची 79 एकड़ जमीन को वापस लेने और बेचने की अनुमति चाहती है।
- आवासीय परियोजनाओं में विलंब शुल्क और सोसाइटी के वाटर चार्ज को माफ कराना चाहती है।
- कर्ज के बदले बैंकों को जमीन सबलीज कराने के लिए सहमति चाहता है।
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- एफएआर पर प्राधिकरण से अटका है मामला, 25 अगस्त को होगी एनसीएएलटी में सुनवाई
- 20 हजार खरीदारों और करीब 10 हजार किसानों से जुड़ा है मामला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जेपी इंफ्राटेक कंपनी को टेक ओवर करने वाली सुरक्षा रियल्टी लिमिटेड की ओर से यमुना प्राधिकरण के समक्ष अपनी कार्ययोजना (रिज्यूलेशन प्लाॅन) सौंप दिया है। इस कार्ययोजना का प्राधिकरण अब परीक्षण कराएगा और इसके लाभ-हानि की जांच कराएगा। इसके आकलन की जिम्मेदारी प्राधिकरण ने कैरी एंड ब्राउन कंपनी को दी है। अब यमुना प्राधिकरण और सुरक्षा को एनसीएएलटी के समक्ष 25 अगस्त को समझौता पक्ष दाखिल किया जाएगा। इससे पहले ही यह सारे काम कराने होंगे। इसके बाद जेपी से जुड़े करीब 20 हजार खरीदार और 10 हजार किसानों की समस्याएं दूर हो सकेंगी।
दरअसल, जेपी इंफ्राटेक ने यमुना एक्सप्रेसवे का निर्माण करने के दौरान प्रदेश सरकार से 36 साल के लिए करार किया था। मगर कुछ साल पहले ही जेपी इंफ्राटेक दिवालिया घोषित हो गई। जिसके बाद मामला एनसीएएलटी में चला गया। इससे 20 हजार खरीदार फंस गए। वहीं 6 जनपदों के 10 हजार किसानों को अतिरिक्त मुआवजे के रूप में मिलने वाली राशि भी फंस गई। सुरक्षा कंपनी ने जेपी इंफ्रा को टेकओवर करने के लिए अपनी कार्य योजना एनसीएएलटी में जमा कराई। उसके द्वारा दिए गए रिज्यूलेशन प्लान में यमुना प्राधिकरण को कई आपत्तियां हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या एफएआर की है और इसका आंकलन कराने के लिए यमुना प्राधिकरण ने करी एंड ब्राउन कंपनी को इसके आंकलन की 20 अगस्त तक करने की जिम्मेदारी दी है। इस प्रकरण में मामले की 25 अगस्त को सुनवाई होनी है।
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क्या चाहता है सुरक्षा समूह
- सुरक्षा समूह एफएआर को 1.5 से बढ़ाकर 2.75 कराना चाहता है।
- कंपनी 36 साल के बाद 15 साल और टोल वसूलने का अधिकार चाहती है।
- कंपनी 6 जिले के किसानों को अतिरिक्त मुआवजे के रूप में 1689 करोड़ रुपये देने को तैयार है।
- कंपनी घर खरीदारों के 200 करोड़ रुपये के क्लेम और 330 करोड़ के थर्ड पार्टी क्लेम को तैयार है।
- कंपनी ने अनुबंध के तहत बची 79 एकड़ जमीन को वापस लेने और बेचने की अनुमति चाहती है।
- आवासीय परियोजनाओं में विलंब शुल्क और सोसाइटी के वाटर चार्ज को माफ कराना चाहती है।
- कर्ज के बदले बैंकों को जमीन सबलीज कराने के लिए सहमति चाहता है।