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Noida News: जमात-ए-इस्लामी हिंद ने कहा - बढ़ रही बेरोजगारी, बिगड़ रहा माहौल

Thu, 02 Jan 2025 08:24 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jan 2025 08:24 PM IST
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Jamaat-e-Islami Hind said - Unemployment is increasing, environment is deteriorating
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने ओखला में आयोजित प्रेसवार्ता में संभल की घटना को बताया बेहद गंभीर
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी हिंद ने देश में बेरोजगारी, बिगड़ते सामाजिक सौहार्द और संभल की घटना को बड़ा मसला माना है। जमात-ए-इस्लामी हिंद का कहना है कि मौजूदा समय में देश आजीविका के गंभीर संकट के साथ बेरोजगारी और असमानता से जूझ रहा है। वहीं, नापाक इरादे से कुछ लोग देश में माहौल बिगाड़ने में लगे हैं। संभल की घटना इसकी ताजा नजीर है।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के अमीर (अध्यक्ष) सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने बृहस्पतिवार ओखला में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि 45 फीसदी युवा बेरोजगार हैं। 20 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे है, जबकि कृषि विकास दर 2.8 फीसदी पर लंबे समय से स्थिर है। देश इस तरह के तमाम बुनियादी संकटों से जूझ रहा है। मनरेगा के बजट में कटौती की गई है। इसे सरकार को तत्काल वापस लेना चाहिए। शहरी बेरोजगारी के समाधान के लिए एक समकक्ष कार्यक्रम लाया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण रोजगार केंद्र, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि प्रसंस्करण और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वहीं, उच्च गुणवत्ता वाली ग्रामीण टाउनशिप का विकास और एमएसएमई के लिए सब्सिडी वाले ऋण व कर प्रोत्साहन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन को उत्पादन के बजाय सीधा रोजगार सृजन से जोड़ा जाना चाहिए।
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इधर, उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने देश की सांप्रदायिक सद्भाव और विविधता में एकता की विरासत की रक्षा के लिए 2025 को सांप्रदायिक सद्भाव, विश्वास और समझ का वर्ष के रूप में नामित करने की योजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता और असामंजस्य ने देश को नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर क्षति पहुंचाई है। उन्होंने सहिष्णुता व संवाद को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक जन मोर्चा और सद्भावना मंच जैसे प्रयासों को विस्तार देने की बात कही।
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उपाध्यक्ष मलिक मोआतसिम खान ने संभल की घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नवंबर में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस गोलीबारी में निर्दोष युवकों की मौत के बाद मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। बिजली कटौती, जुर्माना व एफआईआर जैसे कदम पीड़ित परिवारों और अल्पसंख्यक समुदाय को डराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1978 के सांप्रदायिक दंगों के मामलों को फिर से शुरू किए जाने को विभाजनकारी राजनीति का हिस्सा बताया गया।
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