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किराएदारों को मकान किराया देने के वादे पर अमल संभव नहीं

Tue, 28 Sep 2021 01:48 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 28 Sep 2021 01:48 AM IST
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It is not possible to fulfill the promise of paying house rent to the tenants
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान किराएदारों के मकान किराए का भुगतान करने में असमर्थता जताई है। इस मामले में सरकार ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट के सिंगल जज के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें उसे किराएदारों के किराए का भुगतान करने के लिए नीति बनाने का निर्देेश दिया गया था।
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हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने फैसले पर रोक लगा दी और सरकार से पूछा कि क्या वह राशि के कुछ हिस्से का भुगतान करने को तैयार है या नहीं। कोरोना महामारी के दौरान पिछले साल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि गरीब किराएदारों का मकान किराया सरकार अदा करेगी।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने हाईकोर्ट की सिंगल जज न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह के 22 जुलाई के फैसले पर रोक लगाई है। दिल्ली सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी है। पीठ ने मामले में याचिकाकर्ता को नोटिस जारी अगली सुनवाई 29 नवंबर तय की है।
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गौरव जैन ने कहा कि सरकार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि जो किराएदार किराया देने में असमर्थ है उनका किराया सरकार अदा करेगी। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बहुत गरीब है और एकल न्यायाधीश ने केवल दिल्ली सरकार से एक नीति बनाने के लिए कहा था।
उन्होंने अदालत को बताया कि इसके लिए छह सप्ताह का समय दिया गया था, जिसे बढ़ाकर आठ सप्ताह कर दिया गया। यह आश्चर्य की बात है कि किराए की इतनी कम राशि के लिए, दिल्ली सरकार, जो राज्यों के बीच सबसे अधिक बजट में से एक होने का दावा करती है, वे इसका भुगतान करने से इनकार कर रहे हैं।
अदालत के आदेश का पालन न कर वे आदेश का उल्लंघन कर रहे है और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए। ऐेसे में फैसले पर रोक न लगाई जाए। पीठ ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए फैसले पर रोक लगा दी।
अदालत ने कहा फैसला मुख्यमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस की ट्रांसक्रिप्ट और अन्य तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार कर निकाला गया। रोक नहीं लगाई गई तो सरकार को अपूरणीय क्षति होगी।

सिंगल जज ने फैसले में कहा था कि यह वादा किसी आम व्यक्ति ने नहीं बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में किया था और आम लोग मुख्यमंत्री पर विश्वास करते हैं। ऐसे में सरकार को अपने मुख्यमंत्री के वादे का सम्मान करते हुए एक नीति तय कर उसके पालन करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
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