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Noida News: क्षतिपूर्ति के लिए बीमा प्रीमियम राशि का भुगतान समय पर अनिवार्य
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उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के फैसले को सही माना
ग्रेटर नोएडा। वाहन के बीमा की प्रीमियम राशि कंपनी को नहीं मिलने पर पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक कंपनी की जिम्मेदारी शून्य हो जाती है। इस बीच अगर वाहन के क्लेम का दावा किया जाता है तो कंपनी भुगतान नहीं करेगी। उपभोक्ता आयोग ने प्रीमियम राशि नहीं मिलने पर बीमा कंपनी की ओर से क्लेम नहीं देने के मामले में यह आदेश दिया। जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के फैसले को सही ठहराया है। आयोग के अध्यक्ष अनल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने सुनवाई की।
ग्रेनो के देवला गांव निवासी मुन्द्रेश ने 15,510 रुपये का भुगतान कर कार का बीमा दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। 25 सितंबर 2014 से 24 सितंबर 2015 तक बीमा वैध था। कार का रिस्क कवर 79,5211 रुपये था। 19 जनवरी 2015 को पीएम कृष्णा अपरा प्लाजा ग्रेटर नोएडा से चोरी हो गई थी। 19 जनवरी 2015 को चोरी की सूचना कासना थाना पुलिस को दी गई थी जिस पर 15 फरवरी 2015 को पुलिस ने केस दर्ज किया थी। कार चोरी की सूचना कार मालिक ने बीमा कंपनी को सूचना दे दी थी। 27 अक्तूबर 2015 को कंपनी ने क्लेम निरस्त कर दिया। बीमा कंपनी का कहना है कि उनको पॉलिसी का प्रीमियम देरी से 15 फरवरी 2015 को मिला था।
वाहन मालिक ने जिला उपभोक्ता आयोग में क्लेम दिलाने के लिए वाद दायर किया। आयोग में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वाहन मालिक ने समय पर प्रीमियम अदा नहीं किया। कंपनी को प्रीमियम 15 फरवरी 2015 को मिला था। वाहन 19 जनवरी 2015 को चोरी हुआ था। प्रीमियम का भुगतान चोरी की घटना के बाद हुआ था। कार चोरी होने की रिपोर्ट भी देर से हुई थी। कार चोरी की सूचना 26 दिन बाद पुलिस स्टेशन से की गई थी। जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि वाहन मालिक के द्वारा 25 सितंबर 2014 को नकद में किए गए भुगतान बीमा कंपनी को नहीं मिला माना जा सकता है। प्रीमियम नहीं मिलने के कारण पॉलिसी शुरू से ही शून्य है। बीमा कंपनी ने वाहन मालिक के दावा को निरस्त करके सेवाओं में कमी नहीं की है। आयोग ने क्लेम दिलाने के दावे को निरस्त कर दिया है।
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ग्रेटर नोएडा। वाहन के बीमा की प्रीमियम राशि कंपनी को नहीं मिलने पर पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक कंपनी की जिम्मेदारी शून्य हो जाती है। इस बीच अगर वाहन के क्लेम का दावा किया जाता है तो कंपनी भुगतान नहीं करेगी। उपभोक्ता आयोग ने प्रीमियम राशि नहीं मिलने पर बीमा कंपनी की ओर से क्लेम नहीं देने के मामले में यह आदेश दिया। जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के फैसले को सही ठहराया है। आयोग के अध्यक्ष अनल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने सुनवाई की।
ग्रेनो के देवला गांव निवासी मुन्द्रेश ने 15,510 रुपये का भुगतान कर कार का बीमा दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। 25 सितंबर 2014 से 24 सितंबर 2015 तक बीमा वैध था। कार का रिस्क कवर 79,5211 रुपये था। 19 जनवरी 2015 को पीएम कृष्णा अपरा प्लाजा ग्रेटर नोएडा से चोरी हो गई थी। 19 जनवरी 2015 को चोरी की सूचना कासना थाना पुलिस को दी गई थी जिस पर 15 फरवरी 2015 को पुलिस ने केस दर्ज किया थी। कार चोरी की सूचना कार मालिक ने बीमा कंपनी को सूचना दे दी थी। 27 अक्तूबर 2015 को कंपनी ने क्लेम निरस्त कर दिया। बीमा कंपनी का कहना है कि उनको पॉलिसी का प्रीमियम देरी से 15 फरवरी 2015 को मिला था।
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वाहन मालिक ने जिला उपभोक्ता आयोग में क्लेम दिलाने के लिए वाद दायर किया। आयोग में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वाहन मालिक ने समय पर प्रीमियम अदा नहीं किया। कंपनी को प्रीमियम 15 फरवरी 2015 को मिला था। वाहन 19 जनवरी 2015 को चोरी हुआ था। प्रीमियम का भुगतान चोरी की घटना के बाद हुआ था। कार चोरी होने की रिपोर्ट भी देर से हुई थी। कार चोरी की सूचना 26 दिन बाद पुलिस स्टेशन से की गई थी। जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि वाहन मालिक के द्वारा 25 सितंबर 2014 को नकद में किए गए भुगतान बीमा कंपनी को नहीं मिला माना जा सकता है। प्रीमियम नहीं मिलने के कारण पॉलिसी शुरू से ही शून्य है। बीमा कंपनी ने वाहन मालिक के दावा को निरस्त करके सेवाओं में कमी नहीं की है। आयोग ने क्लेम दिलाने के दावे को निरस्त कर दिया है।
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