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Noida News: ऑटो डेबिट के नाम पर बिजली उपभोक्ताओं के खाते में लग रही सेंध
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ऑटो डेबिट के नाम पर बिजली उपभोक्ताओं के खाते में लग रही सेंध
छह माह बाद भी समायोजित नहीं की जा रही रकम
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के नोएडा जोन में इन दिनों उपभोक्ताओं के कामकाज में जमकर गड़बड़झाला चल रहा है। बिल जमा करने के लिए ऑटो डेबिट सुविधा के तहत उपभोक्ताओं के खातों में जमकर सेंध लगाई जा रही है। उपभोक्ताओं को तीन से चार महीने से कार्यालय का चक्कर कटवाया जा रहा है। इसी तरह की समस्या को लेकर एक उपभोक्ता ने ऊर्जा मंत्री और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक ईशा दुहन से शिकायत कर बैंक खाते से काटी गई मोटी रकम वापस कराने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ माह से नोएडा जोन में कामकाज के तौर-तरीके काफी बदल गए हैं। कुछ दिनों पहले सेक्टर-52 बिजली घर में काम के बदले एक उपभोक्ता से रिश्वत मांगने का मामला सामने आया था। जिसमें एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथों दो लोगों को गिरफ्तार किया था। सेक्टर-93 एमआईजी में रहने वाले उपभोक्ता कमल वर्मा ने आरोप लगाया है कि मार्च में मासिक बिल के नाम पर विद्युत निगम ने उनके खाते से 26607 रुपये ऑटो डेबिट कर लिए, जबकि उनका औसत बिजली बिल 1500 रुपये के आसपास आता है। बिल के एवज में मोटी रकम कटने के बाद उन्होंने तुरंत मामले की शिकायत एसडीओ, अधिशासी अभियंता और नोएडा जोन के मुख्य अभियंता से की, लेकिन अभी तक बिल के रूप में खाते से काटी गई अधिक रकम वापस नहीं की गई।
सेक्टर-37 सदरपुर में रहने वाले अनिल कुमार ने बताया कि उन्हें अप्रैल के गलत बिल मिले थे। जिसकी शिकायत उन्होंने विभागीय अधिकारियों से की थी। बावजूद इसके उनके खाते से 5 हजार रुपये ऑटो डेबिट कर लिए गए, जबकि औसतन उनका बिल 800 से एक हजार रुपये तक आता है। मामले में अभी तक सुनवाई नहीं हुई है न ही रकम वापस मिली है। पर्थला में रहने वाले पवन ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में उनके मासिक बिल गलत बन गए थे और उसी बिल के आधार पर बिल की 7500 रुपये भी खाते से ऑटो डेबिट हो गए। इसकी शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। विद्युत निगम के अधिकारियों ने पहले सेटलमेंट का आश्वासन दिया, अब रिकॉर्ड मिसमैच होने की बात कह रहे हैं, जिसके कारण वह छह माह बाद भी बिजली कार्यालय का चक्कर काटने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
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इस मामले में मुख्य अभियंता राजीव मोहन का कहना है कि किसी भी माध्यम से उपभोक्ता का अधिक पैसा विभाग के खाते में जमा हो गया है तो उसका अगले बिल में सेटलमेंट करा दिया जाता है। अगर किसी उपभोक्ता को इस तरह के मामले में शिकायत है तो वह सीधे कार्यालय में आकर मिल सकते हैं। उनकी समस्या का निस्तारण किया जाएगा।
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छह माह बाद भी समायोजित नहीं की जा रही रकम
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के नोएडा जोन में इन दिनों उपभोक्ताओं के कामकाज में जमकर गड़बड़झाला चल रहा है। बिल जमा करने के लिए ऑटो डेबिट सुविधा के तहत उपभोक्ताओं के खातों में जमकर सेंध लगाई जा रही है। उपभोक्ताओं को तीन से चार महीने से कार्यालय का चक्कर कटवाया जा रहा है। इसी तरह की समस्या को लेकर एक उपभोक्ता ने ऊर्जा मंत्री और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक ईशा दुहन से शिकायत कर बैंक खाते से काटी गई मोटी रकम वापस कराने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ माह से नोएडा जोन में कामकाज के तौर-तरीके काफी बदल गए हैं। कुछ दिनों पहले सेक्टर-52 बिजली घर में काम के बदले एक उपभोक्ता से रिश्वत मांगने का मामला सामने आया था। जिसमें एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथों दो लोगों को गिरफ्तार किया था। सेक्टर-93 एमआईजी में रहने वाले उपभोक्ता कमल वर्मा ने आरोप लगाया है कि मार्च में मासिक बिल के नाम पर विद्युत निगम ने उनके खाते से 26607 रुपये ऑटो डेबिट कर लिए, जबकि उनका औसत बिजली बिल 1500 रुपये के आसपास आता है। बिल के एवज में मोटी रकम कटने के बाद उन्होंने तुरंत मामले की शिकायत एसडीओ, अधिशासी अभियंता और नोएडा जोन के मुख्य अभियंता से की, लेकिन अभी तक बिल के रूप में खाते से काटी गई अधिक रकम वापस नहीं की गई।
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सेक्टर-37 सदरपुर में रहने वाले अनिल कुमार ने बताया कि उन्हें अप्रैल के गलत बिल मिले थे। जिसकी शिकायत उन्होंने विभागीय अधिकारियों से की थी। बावजूद इसके उनके खाते से 5 हजार रुपये ऑटो डेबिट कर लिए गए, जबकि औसतन उनका बिल 800 से एक हजार रुपये तक आता है। मामले में अभी तक सुनवाई नहीं हुई है न ही रकम वापस मिली है। पर्थला में रहने वाले पवन ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में उनके मासिक बिल गलत बन गए थे और उसी बिल के आधार पर बिल की 7500 रुपये भी खाते से ऑटो डेबिट हो गए। इसकी शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। विद्युत निगम के अधिकारियों ने पहले सेटलमेंट का आश्वासन दिया, अब रिकॉर्ड मिसमैच होने की बात कह रहे हैं, जिसके कारण वह छह माह बाद भी बिजली कार्यालय का चक्कर काटने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
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इस मामले में मुख्य अभियंता राजीव मोहन का कहना है कि किसी भी माध्यम से उपभोक्ता का अधिक पैसा विभाग के खाते में जमा हो गया है तो उसका अगले बिल में सेटलमेंट करा दिया जाता है। अगर किसी उपभोक्ता को इस तरह के मामले में शिकायत है तो वह सीधे कार्यालय में आकर मिल सकते हैं। उनकी समस्या का निस्तारण किया जाएगा।