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Noida News: गर्भावस्था में थायराइड की अनदेखी मां और बच्चे के लिए खतरा

Tue, 06 Oct 2026 09:29 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 09:29 PM IST
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Ignoring thyroid issues during pregnancy poses a risk
शुरुआती तीन महीने में जांच जरूरी, समय पर पहचान से बचाव संभव
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संवाद न्यूज एजेंसी



ग्रेटर नोएडा। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान थायराइड की समस्या भी सामने आ सकती है। समय रहते इसकी जांच और उपचार नहीं होने पर इसका असर गर्भवती महिला के साथ गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने में थायराइड की जांच कराना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।



चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था में थायराइड की समस्या होना आम है, लेकिन कई बार इसके लक्षण सामान्य गर्भावस्था से मिलते-जुलते होने के कारण महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। जिसका असर मां के साथ शिशु के विकास पर भी पड़ता हैं। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के स्त्री रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशु भारद्वाज ने बताया कि समय पर जांच नहीं होने और थायराइड का स्तर नियंत्रित न रहने पर गर्भावस्था में कई तरह की जटिलताएं बढ़ सकती हैं। कहा, थायराइड की समस्या होने पर अत्यधिक थकान, कमजोरी, ठंड अधिक लगना, वजन में असामान्य बदलाव, कब्ज, त्वचा का रूखा होना, बाल झड़ना, चेहरे या हाथ-पैर में सूजन और दिल की धड़कन में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, गर्भावस्था में इनमें से कुछ लक्षण सामान्य भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय सलाह और रक्त जांच जरूरी है।
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बच्चे के विकास पर पड़ सकता है असर

डॉ. भारद्वाज का कहना है कि गर्भावस्था में अनियंत्रित थायराइड से गर्भपात, समय से पहले प्रसव और गर्भावस्था से जुड़ी अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं, मां में थायराइड हार्मोन की कमी का असर गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क विकास पर भी पड़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था की शुरुआत में ही जांच कराना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित निगरानी जरूरी है।
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बचाव के लिए बरतें सावधानी

गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच करानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीएसएच समेत आवश्यक थायराइड जांच करानी चाहिए। यदि पहले से थायराइड की समस्या है तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवाई बंद या कम नहीं करनी चाहिए। संतुलित आहार लें और आयोडीन युक्त नमक का उचित मात्रा में सेवन करें।
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