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Noida News: विश्व रैबीज दिवस खास

Thu, 28 Sep 2023 01:34 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 28 Sep 2023 01:34 AM IST
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If this pace continues, it will take 14 years to sterilize dogs.
30 नसबंदी रोज, तभी नियंत्रित हो सकेगी कुत्तों की संख्या
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या
यही रही रफ्तार, तो 14 साल लग जाएंगे कुत्तों की नसबंदी में

दो एबीसी सेंटर पर हर माह औसतन 30 कुत्तों की ही नसबंदी
जनपद में 1.5 लाख कुत्ते हैं, करीब 90 फीसदी लावारिस

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। पूरे जनपद में जहां एक तरफ लावारिस कुत्तों का आतंक बना हुआ है, दूसरी तरफ इनकी संख्या को नियंत्रित करने के लिए एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) की क्षमता आवश्यकता के मुताबिक नहीं है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा संचालित दो एबीसी सेंटर पर औसतन केवल 30 नसबंदी ही हर महीने हो पा रही हैं, जबकि जनपद में एक अनुमान के मुताबिक कुत्तों की संख्या 1.5 लाख है। यानी इसी क्षमता से ही कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने की कवायद चलती रही तो इसमें 14 साल से अधिक समय लग जाएगा।

लावारिस जानवरों के संरक्षण पर काम कर रही संस्था हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल के अध्यक्ष संजय मोहपात्रा का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक पूरे जनपद में करीब 1.5 लाख कुत्ते हैं। इनमें से करीब 90 फीसदी लावारिस हैं। अगर इनकी संख्या को नियंत्रित करना है तो एबीसी की मौजूदा क्षमता को बढ़ाना होगा। क्षमता बढ़ाने के साथ ही इनके ऑपरेशन की प्रक्रिया को भी सुधारने की जरूरत है। अभी ऑपरेशन के समय ही रैबीज वैक्सीन दे दी जाती है जोकि केवल एक साल तक ही प्रभावी रहती है। ऐसे में ऐसी मैकिनिज्म बनाए जाने की जरूरत है जिससे नियमित अंतराल पर रैबीज वैक्सीन दी जा सके। नेशनल रैबीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. अमित कुमार शर्मा का कहना है कि अभी भी एबीसी कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया गया है। यही एक प्रभावी तरीका है जिससे भविष्य में कुत्तों की संख्या को नियंत्रित कर लोगों को सुरक्षित बनाया जा सके।
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99 फीसदी डोज कुत्ता काटने पर दी जा रहीं
जनपद में कुत्तों का आतंक किस कदर बढ़ा हुआ है, खुद वैक्सीन के आंकड़े हकीकत बयां करते हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक करीब 99 फीसदी रैबीज इंजेक्शन कुत्तों के काटने के मामलों में ही दिया जा रहा है। केवल एक फीसदी मामलों में ही रैबीज इंजेक्शन दूसरे जानवर जैसे बंदर, बिल्ली आदि के काटने पर दिया जाता है। करीब 10 हजार इंजेक्शन पूरे जनपद में हर महीने लगाए जा रहे हैं। केवल जिला अस्पताल में ही करीब 4200 इंजेक्शन हर महीने रैबीज से बचाव के लिए लगाए जाते हैं।
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पीएचसी पर भी लगवा पाएंगे एंटी रैबीज इंजेक्शन

डॉ. अमित कुमार शर्मा का कहना है कि रैबीज और इसके नुकसान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। ऐसे में एंटी रैबीज की मांग भी बढ़ी है। अभी गौतमबुद्धनगर जनपद में जिला अस्पताल के अलावा छह सीएचसी, दो पीएचसी और गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में रैबीज डोज दी जा रही है। जिला अस्पताल में 24 घंटे डोज देने की सुविधा है। इसका उपयोग कोई भी घायल जिला अस्पताल आकर कर सकता है। अब एंटी रैबीज दिए जाने के लिए सभी 15 शहरी और 21 ग्रामीण पीएचसी पर भी सुविधा स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू करने की तैयारी में है।


नोएडा प्राधिकरण की पहल
इधर, कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए नोएडा प्राधिकरण ने भी पहल की है। नसबंदी और टीकाकरण की कवायद पर निजी संस्थाओं की मदद से प्राधिकरण काम करेगा। करीब 1.16 करोड़ रुपये इस पर खर्च होने हैं। इसके लिए निजी एजेंसियों से प्रस्ताव भी मांगे गए हैं।


हर बार एंटी रैबीज जरूरी नहीं

डॉ. अमित कुमार शर्मा का कहना है कि कुत्ता अगर काट ले तो उस घाव पर हल्दी या दूसरे देसी उपाय न करें। केवल उसे पानी से बार-बार धोते रहें। अस्पताल में डॉक्टर को दिखाएं और एंटी रैबीज डोज लगवाएं। यह भी देखना जरूरी है कि घायल को डोज की जरूरत है कि नहीं। ऐसे में डॉक्टर को जरूर दिखाएं। कई बार कुत्ते द्वारा सामान्य खरोंच या चाटने पर ही लोग डर जाते हैं और एंटी रैबीज लगवाने के लिए परेशान होते हैं। एंटी रैबीज की जरूरत केवल गहरे घाव के होने पर ही होती है।



कम्युनिटी किचन से भी कम होंगीं घटनाएं



संजय मोहपात्रा का कहना है कि अगर कुत्तों के लिए कम्युनिटी किचन सरकार बनाए, तो इससे काफी हद तक कुत्ते काटने के मामले कम हो जाएंगे। कई बार कुत्ते के भूखा होने से भी हमला करने की प्रवृति बढ़ती है। सोसाइटियों में भी फीड प्वाइंट बनाए जा सकते हैं। यहां बचा हुआ खाना सोसाइटी में रहने वाले कुत्तों को निवासियों द्वारा दिया जाए।



60 हजार कुत्ते केवल नोएडा क्षेत्र में

1.5 लाख कुत्ते पूरे जनपद में

90 फीसदी कुत्ते लावारिस

12 से 14 साल आयु होती है एक कुत्ते की

42 से 48 बच्चों को जन्म देती औसतन एक मादा
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