{"_id":"5fe8d3668ebc3e3f7d1e2100","slug":"if-the-government-did-not-resolve-on-29th-farmers-will-decide-noida-news-noi55642192","type":"story","status":"publish","title_hn":"29 को सरकार ने नहीं किया समाधान तो फैसला करेंगे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
29 को सरकार ने नहीं किया समाधान तो फैसला करेंगे किसान
विज्ञापन
सेक्टर-14ए स्थित चिल्ला बॉर्डर पर ताली व थाली बजाकर विरोध जताते भारतीय किसान यूनियन (भानू) के सदस्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
29 को सरकार ने नहीं किया समाधान तो फैसला करेंगे किसान
नोएडा। नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठन 29 दिसंबर को सरकार से अगले दौर की वार्ता करेंगे, लेकिन बातचीत से पहले ही किसानों ने तल्ख तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को चिल्ला बॉर्डर पर किसान संवाद कार्यक्रम के दौरान भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों की समस्या का समाधान नहीं करेगी तो इसके बाद फैसला खुद किसान करेंगे। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश किसानों का है। इस देश का कुछ भी बेचने नहीं दिया जाएगा, जो खरीदने वाले हैं वे भी गफलत में न रहें, क्योंकि 2024 के बाद सब वापस ले लिया जाएगा। अभी तो किसान रजामंदी से सरकार से गुहार लगा रहा है, सरकार नहीं मानी तो सत्ता तक पहुंचाने वाला किसान उसे बेदखल भी कर देगा।
वहीं, अतुलेश्वर धाम इंद्रप्रस्थ पीठ के स्वामी योगेश्वराचार्य महाराज ने कहा कि किसान अन्नदाता है और अन्नदाता की पीड़ा को सरकार समझे। किसानों के साथ चर्चा-वार्ता से ही समाधान निकला जा सकता है। किसान संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विशेषज्ञ सोनू शर्मा ने कहा कि सरकार वैश्विक दबाव में तीन नए कृषि कानून लेकर आई है। विदेशों के साथ सरकार ने 80 द्विपक्षीय समझौते किए हैं। सीधे तौर पर किसानों को विदेशी ताकतों के हाथों में नहीं दिया जा सकता, इसलिए कानून बनाकर देश के 40 करोड़ किसानों को खेती से निकालकर मजदूर बनाने की तैयारी है। इससे छोटे किसान खत्म हो जाएंगे। देश के कृषि क्षेत्र में एक समानांतर निजीकरण की व्यवस्था खड़ी की जा रही है। एमएसपी से कम कीमत पर किसानों की फसलें न बिकें, इस बात की गारंटी देने में आखिर सरकार को आपत्ति क्या है। देश में मात्र 6 प्रतिशत किसान ही अपनी फसलों को एमएसपी पर बेच पाते हैं। इन सभी बिंदुओं को सरकार से होने वाली वार्ता में उठाया जाएगा।
किसानों ने ताली-थाली बजाकर जताया विरोध
चिल्ला बॉर्डर पर 27 दिनों से धरने पर बैठे किसानों ने भी रविवार को ताली-थालियां बजाकर सरकार तक बात पहुंचाने का प्रयास किया और कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग उठाई। इसके बाद किसानों ने रागनी गाकर भी देश के किसानों की व्यथा को बताया।
विज्ञापन
पक्षियों को डाला दाना
दलित प्रेरणा स्थल पर भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के बैनर तले 26वें दिन भी किसानों का धरना जारी रहा। किसान पैदल मार्च करते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर स्थल पहुंचे और पक्षियों के लिए अनाज के दाने डाले। राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि सर्दी में किसान और जवान सड़कों पर डटे हुए हैं। किसान की अनुपस्थिति में पशु-पक्षी भी सरकार के अहंकार के कारण भोजन-पानी के लिए तरस रहे हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव मलिक ने कहा कि किसानों ने निर्णय लिया है शहर में जगह-जगह जाकर पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम किया जाएगा। वहीं, धरना स्थल पर बीमार कार्यकर्ताओं के उपचार के लिए डॉक्टर भी बुलवाए गए।
बंद रास्तों ने किया परेशान
किसान आंदोलन की वजह से जगह-जगह बंद किए गए रास्तों ने रविवार को भी लोगों की आफत को बढ़ाकर रखा। दिल्ली-नोएडा लिंक रोड पर वाहनों की रफ्तार मंद रही। वहीं, एनएच-9 के रास्ते दिल्ली जाने वाली सड़क बंद होने से लोेगों को परेशान होना पड़ा।
सरकार कृषि कानूनों के जरिये छोटे किसानों को खत्म करने की तैयारी में जुटी है। दुनिया के चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथ में देश की व्यवस्थाओं को सौंपा जा रहा है। हम सिर्फ सरकार को चुनते हैं, सरकार चलाते पूंजीपति हैं।
- पवन समाधिया, किसान नेता
कोरोना जैसी महामारी में भी किसानों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन आज उसी किसान का शोषण किया जा रहा है। किसान अपनी फसलों की तय कीमत की गारंटी मांग रहा है। किसान आयोग का गठन होगा तो किसान के हित सुरक्षित होंगे।
-अशोक चौहान, किसान नेता
किसान क्रांति के रूप में साल 2020 को इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा। कृषि कानूनों के विरोध में आज पूरे देश का किसान एक हो गया है। जब तक किसानों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, अन्नदाता का आंदोलन यूं ही जारी रहेगा।
-पंडित विवेक शास्त्री, किसान नेता
विज्ञापन
नोएडा। नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठन 29 दिसंबर को सरकार से अगले दौर की वार्ता करेंगे, लेकिन बातचीत से पहले ही किसानों ने तल्ख तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को चिल्ला बॉर्डर पर किसान संवाद कार्यक्रम के दौरान भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों की समस्या का समाधान नहीं करेगी तो इसके बाद फैसला खुद किसान करेंगे। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश किसानों का है। इस देश का कुछ भी बेचने नहीं दिया जाएगा, जो खरीदने वाले हैं वे भी गफलत में न रहें, क्योंकि 2024 के बाद सब वापस ले लिया जाएगा। अभी तो किसान रजामंदी से सरकार से गुहार लगा रहा है, सरकार नहीं मानी तो सत्ता तक पहुंचाने वाला किसान उसे बेदखल भी कर देगा।
वहीं, अतुलेश्वर धाम इंद्रप्रस्थ पीठ के स्वामी योगेश्वराचार्य महाराज ने कहा कि किसान अन्नदाता है और अन्नदाता की पीड़ा को सरकार समझे। किसानों के साथ चर्चा-वार्ता से ही समाधान निकला जा सकता है। किसान संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विशेषज्ञ सोनू शर्मा ने कहा कि सरकार वैश्विक दबाव में तीन नए कृषि कानून लेकर आई है। विदेशों के साथ सरकार ने 80 द्विपक्षीय समझौते किए हैं। सीधे तौर पर किसानों को विदेशी ताकतों के हाथों में नहीं दिया जा सकता, इसलिए कानून बनाकर देश के 40 करोड़ किसानों को खेती से निकालकर मजदूर बनाने की तैयारी है। इससे छोटे किसान खत्म हो जाएंगे। देश के कृषि क्षेत्र में एक समानांतर निजीकरण की व्यवस्था खड़ी की जा रही है। एमएसपी से कम कीमत पर किसानों की फसलें न बिकें, इस बात की गारंटी देने में आखिर सरकार को आपत्ति क्या है। देश में मात्र 6 प्रतिशत किसान ही अपनी फसलों को एमएसपी पर बेच पाते हैं। इन सभी बिंदुओं को सरकार से होने वाली वार्ता में उठाया जाएगा।
विज्ञापन
किसानों ने ताली-थाली बजाकर जताया विरोध
चिल्ला बॉर्डर पर 27 दिनों से धरने पर बैठे किसानों ने भी रविवार को ताली-थालियां बजाकर सरकार तक बात पहुंचाने का प्रयास किया और कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग उठाई। इसके बाद किसानों ने रागनी गाकर भी देश के किसानों की व्यथा को बताया।
विज्ञापन
पक्षियों को डाला दाना
दलित प्रेरणा स्थल पर भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के बैनर तले 26वें दिन भी किसानों का धरना जारी रहा। किसान पैदल मार्च करते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर स्थल पहुंचे और पक्षियों के लिए अनाज के दाने डाले। राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि सर्दी में किसान और जवान सड़कों पर डटे हुए हैं। किसान की अनुपस्थिति में पशु-पक्षी भी सरकार के अहंकार के कारण भोजन-पानी के लिए तरस रहे हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव मलिक ने कहा कि किसानों ने निर्णय लिया है शहर में जगह-जगह जाकर पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम किया जाएगा। वहीं, धरना स्थल पर बीमार कार्यकर्ताओं के उपचार के लिए डॉक्टर भी बुलवाए गए।
बंद रास्तों ने किया परेशान
किसान आंदोलन की वजह से जगह-जगह बंद किए गए रास्तों ने रविवार को भी लोगों की आफत को बढ़ाकर रखा। दिल्ली-नोएडा लिंक रोड पर वाहनों की रफ्तार मंद रही। वहीं, एनएच-9 के रास्ते दिल्ली जाने वाली सड़क बंद होने से लोेगों को परेशान होना पड़ा।
सरकार कृषि कानूनों के जरिये छोटे किसानों को खत्म करने की तैयारी में जुटी है। दुनिया के चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथ में देश की व्यवस्थाओं को सौंपा जा रहा है। हम सिर्फ सरकार को चुनते हैं, सरकार चलाते पूंजीपति हैं।
- पवन समाधिया, किसान नेता
कोरोना जैसी महामारी में भी किसानों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन आज उसी किसान का शोषण किया जा रहा है। किसान अपनी फसलों की तय कीमत की गारंटी मांग रहा है। किसान आयोग का गठन होगा तो किसान के हित सुरक्षित होंगे।
-अशोक चौहान, किसान नेता
किसान क्रांति के रूप में साल 2020 को इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा। कृषि कानूनों के विरोध में आज पूरे देश का किसान एक हो गया है। जब तक किसानों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, अन्नदाता का आंदोलन यूं ही जारी रहेगा।
-पंडित विवेक शास्त्री, किसान नेता