Cerebral Palsy: जन्म के बाद बच्चा नहीं रोया, तो हो सकता है CP रोग; क्या आपके बच्चे में दिखाई देते हैं ये लक्षण
चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश लोगों को सीपी के बारे में पता नहीं है, यह सबसे बड़ी परेशानी है। पांच से छह वर्ष तक वे यह ही नहीं समझ पाते हैं, कि उनका बच्चा इस रोग की गिरफ्त में है।
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विस्तार
जन्म के बाद अगर आपका बच्चा नहीं रो नहीं रहा है, तो इसे अनदेखा न करें। यह सेरेब्रल पाल्सी (सीपी) की बीमारी हो सकती है। गर्भावस्था में बच्चे को मां से ऑक्सीजन मिलती है। बच्चा जैसे ही मां से अलग होता है उसे ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। यदि बच्चे को ऑक्सीजन नहीं मिलेगा तो मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को सेरेब्रल पाल्सी (सीपी) की बीमारी होने की आशंका अधिक रहती है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के बाल रोग विशेषज्ञ के मुताबिक हर महीने में सीपी से पीड़ित 15 से 20 बच्चे इलाज के लिए आते हैं।
क्या-क्या हो सकती है समस्या
सेरेब्रल पाल्सी एक मस्तिष्क संबंधी विकार है, जोकि शिशु के जन्म के समय देर से रोने, मस्तिष्क में कमी, हाई जोंडिस (पीलिया) का होना, डिलीवरी में होने वाली परेशानी के कारण होती है। इससे शिशु की मांसपेशियों की गति, टोन, संतुलन और मुद्रा को बनाए रखने की क्षमता प्रभावित होती है। यह किसी व्यक्ति की चलने-फिरने, बोलने, खाने और देखने जैसी कई गतिक और अन्य शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। हालांकि शुरुआत में ही विशेषज्ञ चिकित्सक से इसका इलाज कराने पर यह ठीक हो सकती है।
ऐसे बचाया जा सकता है बच्चा
बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि जिम्स में सप्ताह में करीब तीन से चार और महीने में 15 से 20 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभिभावकों को सेरेब्रल पाल्सी की पहचान जरूरी है। आमतौर पर लोग बच्चों की असामान्य हरकतों पर ध्यान नहीं देते और सात-आठ साल होने पर जब ध्यान देते हैं तब तक देर हो चुकी होती है। जबकि समय पर इलाज के माध्यम से इसके सही होने की संभावना होती है। इसमें फिजियोथेरेपी व एक्टिवेशन (पीटीओटी) भी कारगर साबित होती है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान कुशल चिकित्सक की देखरेख में प्रसव से बहुत हद तक जन्म के समय बच्चों में होने वाले सेरेब्रल पाल्सी रोग से बचा जा सकता है।
जागरूकता जरूरी हैं
चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश लोगों को सीपी के बारे में पता नहीं है, यह सबसे बड़ी परेशानी है। पांच से छह वर्ष तक वे यह ही नहीं समझ पाते हैं, कि उनका बच्चा इस रोग की गिरफ्त में है। अभिभावक, बच्चे में सेरेब्रल पाल्सी से उत्पन्न विकलांगता को पोलियो समझ लेते हैं। ऐसे में इसकी जागरूकता जरूरी है। इस रोग का इलाज कराने पर 80 से 90 प्रतिशत तक सुधार की गुंजाइश होती है।
- जन्म के वक्त बच्चे का नहीं रोना।
- तीन माह में गर्दन न संभाल पाना।
- आठ माह तक बैठना न शुरू हो।
- डेढ़ साल में भी वो चल न पाए।
- आखें तिरछी, प्रतिक्रिया ढीली।
- डिलीवरी होते ही बच्चे का सांस न ले पाना।
- देरी से सांस लेने में मस्तिष्क में कमी का आना।
- जन्म के समय मुंह में गंदा पानी चला जाना।
- प्री-मैच्योर डिलीवरी का होना।
डॉक्टर की राय
जन्म के समय अगर बच्चा नहीं रोता है, तो सीपी रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है। मस्तिष्क विकास के साथ यह रोग सामने आता है। गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल और कुशल चिकित्सक की देखरेख में प्रसव से बच्चे में यह रोग होने की संभावना कम हो जाती है। रोग को पूरी तरह ठीक तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन फिजियोथेरेपी व एक्टिवेशन की मदद से कम होने की संभावना होती है।
- डॉ. सुजाता मुखोपाध्याय, एसोसिएट प्रोफेसर, बाल रोग विशेषज्ञ, जिम्स।