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Noida News: अस्थायी कृत्रिम कुंड में ही हो सकेगा मूर्ति विसर्जन
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गणेश व दुर्गा पूजा के लिए यूपीपीसीबी ने जारी किए दिशा-निर्देश
नोएडा प्राधिकरण ने बनाए अस्थायी कुंड, विसर्जन के लिए भरा जाएगा पानी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गणेश पूजा और दुर्गा पूजा के मौके पर नदी या अन्य प्राकृतिक जल स्रोत में मूर्तियों का विसर्जन नहीं हो सकेगा। उत्तर प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर केवल कृत्रिम रूप से तैयार किए गए अस्थायी कृत्रिम कुंड में ही विसर्जन करने के लिए कहा है। विसर्जन के लिए नोएडा प्राधिकरण ने भी कुछ जगहों पर ऐसे कुंड बनाए है।
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. उत्सव शर्मा ने बताया कि सितंबर-अक्तूबर में दोनों त्योहारों पर मूर्ति विसर्जन श्रद्धालु करेंगे। ऐसे में एनजीटी व कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें नदियों व अन्य जल स्रोतों में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक लगाई गई है। कृत्रिम कुंड में जो जल भरा जाएगा। उसकी गुणवत्ता की जांच भी यूपीपीसीबी की टीमें करेंगीं जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों। यह जांच विसर्जन पूर्व, विसर्जन के दौरान और विसर्जन के बाद भी की जाएगी।
विसर्जन के बाद इन कृत्रिम कुंड को मिट्टी से ठीक से भर दिया जाएगा। इसके अलावा यूपीपीसीबी और नोएडा प्राधिकरण लोगों को ईको फ्रेंडली मूर्तियों की स्थापना करने के लिए प्रेरित करेंगे। कलाकारों को भी इसके लिए जागरूक किया जाएगा। पूजा समितियों से भी बातचीत इसके लिए की जाएगी। घरों में लोगों को बड़ी बाल्टी या टब में मूर्तियों को विसर्जित करने और पूरी तरह घुलने के बाद इस पानी का उपयोग लॉन या गमलों में करने का सुझाव गाइडलाइन में दिया गया है।
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नोएडा प्राधिकरण ने बनाए अस्थायी कुंड, विसर्जन के लिए भरा जाएगा पानी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गणेश पूजा और दुर्गा पूजा के मौके पर नदी या अन्य प्राकृतिक जल स्रोत में मूर्तियों का विसर्जन नहीं हो सकेगा। उत्तर प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर केवल कृत्रिम रूप से तैयार किए गए अस्थायी कृत्रिम कुंड में ही विसर्जन करने के लिए कहा है। विसर्जन के लिए नोएडा प्राधिकरण ने भी कुछ जगहों पर ऐसे कुंड बनाए है।
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. उत्सव शर्मा ने बताया कि सितंबर-अक्तूबर में दोनों त्योहारों पर मूर्ति विसर्जन श्रद्धालु करेंगे। ऐसे में एनजीटी व कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें नदियों व अन्य जल स्रोतों में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक लगाई गई है। कृत्रिम कुंड में जो जल भरा जाएगा। उसकी गुणवत्ता की जांच भी यूपीपीसीबी की टीमें करेंगीं जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों। यह जांच विसर्जन पूर्व, विसर्जन के दौरान और विसर्जन के बाद भी की जाएगी।
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विसर्जन के बाद इन कृत्रिम कुंड को मिट्टी से ठीक से भर दिया जाएगा। इसके अलावा यूपीपीसीबी और नोएडा प्राधिकरण लोगों को ईको फ्रेंडली मूर्तियों की स्थापना करने के लिए प्रेरित करेंगे। कलाकारों को भी इसके लिए जागरूक किया जाएगा। पूजा समितियों से भी बातचीत इसके लिए की जाएगी। घरों में लोगों को बड़ी बाल्टी या टब में मूर्तियों को विसर्जित करने और पूरी तरह घुलने के बाद इस पानी का उपयोग लॉन या गमलों में करने का सुझाव गाइडलाइन में दिया गया है।
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