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पतियों को भी रखना चाहिए व्रत : प्रवीन खंडेलवाल
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भाजपा सांसद ने कहा-प्रेम, समानता और भारतीय संस्कृति का सुंदर संगम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। चांदनी चौक से भाजपा सांसद व व्यापारी नेता प्रवीन खंडेलवाल ने देशवासियों सहित से व्यापारियों से अपील की है कि वे करवाचौथ पर पत्नियों के सम्मान में व्रत रखें। उन्होंने कहा कि यह कदम पारिवारिक संबंधों में समानता, प्रेम और पारस्परिक सम्मान की भावना को मजबूत करेगा।
वे बीस वर्षों से करवाचौथ का व्रत रख रहे हैं। पारंपरिक भारतीय संस्कृति में यह पर्व नारी शक्ति के त्याग, समर्पण और प्रेम का प्रतीक है जो परिवार की सुदृढ़ता और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। आज के समय में करवाचौथ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि भावनात्मक अवसर है जो वैवाहिक रिश्तों में समानता और सम्मान का संदेश देता है। जिस प्रकार महिलाएं पतियों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं, उसी तरह पुरुषों को भी पत्नियों के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए व्रत रखना चाहिए। अब देश के कई युवा और प्रगतिशील पुरुष भी पत्नियों के साथ करवाचौथ का व्रत रखकर समानता की भावना को आगे बढ़ा रहे हैं। यह परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर संगम है जो समाज में आपसी सम्मान और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देता है। खंडेलवाल ने इस पर्व के आर्थिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि करवाचौथ पर देशभर के बाजारों में जबरदस्त रौनक रहती है। आभूषण, परिधान, कॉस्मेटिक्स, मिठाइयां, गिफ्ट और सजावटी सामानों की बिक्री में इस वर्ष करीब 25,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। चांदनी चौक से भाजपा सांसद व व्यापारी नेता प्रवीन खंडेलवाल ने देशवासियों सहित से व्यापारियों से अपील की है कि वे करवाचौथ पर पत्नियों के सम्मान में व्रत रखें। उन्होंने कहा कि यह कदम पारिवारिक संबंधों में समानता, प्रेम और पारस्परिक सम्मान की भावना को मजबूत करेगा।
वे बीस वर्षों से करवाचौथ का व्रत रख रहे हैं। पारंपरिक भारतीय संस्कृति में यह पर्व नारी शक्ति के त्याग, समर्पण और प्रेम का प्रतीक है जो परिवार की सुदृढ़ता और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। आज के समय में करवाचौथ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि भावनात्मक अवसर है जो वैवाहिक रिश्तों में समानता और सम्मान का संदेश देता है। जिस प्रकार महिलाएं पतियों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं, उसी तरह पुरुषों को भी पत्नियों के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए व्रत रखना चाहिए। अब देश के कई युवा और प्रगतिशील पुरुष भी पत्नियों के साथ करवाचौथ का व्रत रखकर समानता की भावना को आगे बढ़ा रहे हैं। यह परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर संगम है जो समाज में आपसी सम्मान और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देता है। खंडेलवाल ने इस पर्व के आर्थिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि करवाचौथ पर देशभर के बाजारों में जबरदस्त रौनक रहती है। आभूषण, परिधान, कॉस्मेटिक्स, मिठाइयां, गिफ्ट और सजावटी सामानों की बिक्री में इस वर्ष करीब 25,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है।
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