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नूंह ड्रेन के पानी से बंजर हो गई सैकड़ों एकड़ जमीन
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गांव कालियाका में बंजर जमीन
- फोटो : Mewat
अंतराम खटाना
नूंह। नूंह ड्रेन में आ रहा केमिकलयुक्त पानी किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। इसकी वजह से इंडरी खंड के दर्जनों गांवों में सैकड़ों एकड़ जमीन बंजर हो चुकी हैं। स्थिति यह है कि यहां के किसान खेतों में फसल की बुआई तो करते हैं, लेकिन उपज हो नहीं पाती है।
किसानों के अनुसार, इस बार रबी की फसल की बिजाई के दौरान गेहूं, सरसों, जौ आदि की बिजाई की थी, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी एक दाना नहीं उगा। जिन गांवों में जमीन बंजर हो रही हैं, उनमें मुख्य रूप से इंडरी, कालियाका, मानूवास, भिरावटी, हिलालपुर, खेड़ा खलीलपुर, उलेटा व गांगोली आदि हैं। किसानों के मुताबिक, सिंचाई करने के बाद जमीन पानी को नहीं सोख पा रही हैं। हालांकि शिकायत के बाद कृषि विभाग की ओर से जमीनों के नमूने भी लिए गए थे, लेकिन लंबे समय के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा हैं। जिले के 80 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं। पहले से ही जिले में सिंचाई के पानी का अभाव रहा हैं। कुछ वर्षों से किसान नूंह व उजीना ड्रेन के पानी से अपनी फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। वहीं स्थिति यह है कि इन ड्रेन में एनसीआर की कंपनियों से निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी आता है।
बीरपाल सरपंच कालियाका, कमल सरपंच इंडरी, आसमोहम्मद घासेड़ा, फतेली सरपंच हुसैनपुर, शाहिद हुसैन पतरिया आदि का कहना है कि यह समस्या बहुत गंभीर है। समय रहते जरूरी कदम उठाने चाहिए। वहीं कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने कहा कि विभाग किसानों की जमीन के नमूने लेकर उनको जरूरी कदम उठाने के लिए जागरूक कर रहा है। (संवाद)
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वर्जन-
किसानों की इस समस्या का प्रशासन को जल्द से जल्द समाधान कराना चाहिए। किसान काफी परेशान हैं। फसलों से उनकी लागत भी नहीं निकल पाती है। - सुखबीर गुर्जर, खेड़ली दोसा
किसानों की यह समस्या काफी बड़ी है। इसे प्रशासन द्वारा कमतर नहीं आंकना चाहिए। अगर अन्न पैदा नहीं होगा, तो किसी दिन रोटी के लिए तरसना पड़ेगा। - अख्तर चंदेनी, किसान
जिले के ज्यादातर लोग कृषि पर ही निर्भर हैं। बंजर हो रही जमीन वाले किसानों की पहचान कर उनको आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। जिससे कि उनकी आजीविका का साधन बचा रहे। - डॉ. हनीफ, सरपंच फिरोजपुर नमक
अब बरसात नहीं होने व खारे पानी की सिंचाई से जमीन बंजर हो रही है। यह समस्या काफी बड़ी है इसके लिए अभी से समाधान पर कार्य करना चाहिए। - प्रवीन, चेयरमैन इंडरी
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नूंह। नूंह ड्रेन में आ रहा केमिकलयुक्त पानी किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। इसकी वजह से इंडरी खंड के दर्जनों गांवों में सैकड़ों एकड़ जमीन बंजर हो चुकी हैं। स्थिति यह है कि यहां के किसान खेतों में फसल की बुआई तो करते हैं, लेकिन उपज हो नहीं पाती है।
किसानों के अनुसार, इस बार रबी की फसल की बिजाई के दौरान गेहूं, सरसों, जौ आदि की बिजाई की थी, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी एक दाना नहीं उगा। जिन गांवों में जमीन बंजर हो रही हैं, उनमें मुख्य रूप से इंडरी, कालियाका, मानूवास, भिरावटी, हिलालपुर, खेड़ा खलीलपुर, उलेटा व गांगोली आदि हैं। किसानों के मुताबिक, सिंचाई करने के बाद जमीन पानी को नहीं सोख पा रही हैं। हालांकि शिकायत के बाद कृषि विभाग की ओर से जमीनों के नमूने भी लिए गए थे, लेकिन लंबे समय के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा हैं। जिले के 80 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं। पहले से ही जिले में सिंचाई के पानी का अभाव रहा हैं। कुछ वर्षों से किसान नूंह व उजीना ड्रेन के पानी से अपनी फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। वहीं स्थिति यह है कि इन ड्रेन में एनसीआर की कंपनियों से निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी आता है।
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बीरपाल सरपंच कालियाका, कमल सरपंच इंडरी, आसमोहम्मद घासेड़ा, फतेली सरपंच हुसैनपुर, शाहिद हुसैन पतरिया आदि का कहना है कि यह समस्या बहुत गंभीर है। समय रहते जरूरी कदम उठाने चाहिए। वहीं कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने कहा कि विभाग किसानों की जमीन के नमूने लेकर उनको जरूरी कदम उठाने के लिए जागरूक कर रहा है। (संवाद)
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किसानों की इस समस्या का प्रशासन को जल्द से जल्द समाधान कराना चाहिए। किसान काफी परेशान हैं। फसलों से उनकी लागत भी नहीं निकल पाती है। - सुखबीर गुर्जर, खेड़ली दोसा
किसानों की यह समस्या काफी बड़ी है। इसे प्रशासन द्वारा कमतर नहीं आंकना चाहिए। अगर अन्न पैदा नहीं होगा, तो किसी दिन रोटी के लिए तरसना पड़ेगा। - अख्तर चंदेनी, किसान
जिले के ज्यादातर लोग कृषि पर ही निर्भर हैं। बंजर हो रही जमीन वाले किसानों की पहचान कर उनको आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। जिससे कि उनकी आजीविका का साधन बचा रहे। - डॉ. हनीफ, सरपंच फिरोजपुर नमक
अब बरसात नहीं होने व खारे पानी की सिंचाई से जमीन बंजर हो रही है। यह समस्या काफी बड़ी है इसके लिए अभी से समाधान पर कार्य करना चाहिए। - प्रवीन, चेयरमैन इंडरी