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नियमित जांच व इलाज से लंबा जीवन जी सकते हैं एचआईवी पीड़ित मरीज
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नोएडा/ग्रेटर नोएडा। ह्यूमन इम्युनोडिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) यानी एड्स जानलेवा बीमारी नहीं है। नियमित जांच और इलाज से संक्रमित व्यक्ति लंबा जीवन जी सकता है। साथ ही खानपान का भी ध्यान रखना होगा। खाने में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली वस्तुओं को शामिल करना होगा। इस बीमारी के फैलने का प्रमुख कारण एक से अधिक लोगों के साथ असुरिक्षत यौन संबंध बनाना है। करीब 80 प्रतिशत मरीज इसी वजह से संक्रमित होते हैं। शारदा विश्वविद्यालय के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भूमेश त्यागी ने बताया कि एचआईवी संक्रमित को बीमारी छुपानी नहीं चाहिए। समय पर जांच करवाएं।
हर तीन से छह माह में जांच कराएं। सरकार की तरफ से निशुल्क सेंटर खोले गए हैं। बीमारी का इलाज नहीं कराने वालों को दिक्कत होती है। एड्स फैलाने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध है। इसके बाद संक्रमित के रक्त से वायरस फैलता है। तीसरा बड़ा कारण एक ही सुई को बार-बार प्रयोग करना है। उन्होंने बताया कि संक्रमित व्यक्ति बीमारी के कारण मानसिक तनाव में चला जाता है। उसके मन में आत्महत्या करने जैसे विचार आते है। ऐसे में उसकी काउंसलिंग की जाती है। शहर के सभी अस्पतालों में सर्जरी से पहले हर व्यक्ति की एचआईवी जांच होती है। ऐसा चिकित्सकों और अन्य मेडिकल स्टाफ को संक्रमण से बचाने के लिए किया जाता है। एचआईवी की रिपोर्ट आने के बाद ही सर्जरी की जाती है। जांच कराने के संबंध में मरीज की सहमति भी ली जाती है।
क्या है एड्स
एड्स एचआईवी नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग 12 सप्ताह के बाद ही रक्त की जांच से पता चल जाता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे व्यक्ति को एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। संक्रमित व्यक्ति कई वर्षों (6 से 10 वर्ष) तक सामान्य जीवनयापन करता है, लेकिन इस दौरान दूसरों को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है। शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से अपना बचाव नहीं कर पाता और व्यक्ति कई तरह के संक्रमण से ग्रसित होने लगता है।
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जिला अस्पताल में है जांच की सुविधा
यदि किसी में एचआईवी के लक्षण हैं तो जिला अस्पताल में भी जांच कराई जा सकती है। जिला अस्पताल में मरीज को जरूरी चिकित्सीय परामर्श भी दिया जाता है। वहीं चाइल्ड पीजीआई चिकित्सकों के अनुसार, जो लोग अस्पताल में रक्तदान करते हैं, उनकी एचआईवी जांच अवश्य की जाती है। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा नहीं रहे।
इनको है खतरा
- एक से अधिक लोगों से असुरक्षित यौन संबंध रखने वाला व्यक्ति।
- देह व्यापार करने वालों से यौन संपर्क रखने वाला व्यक्ति।
- नशे का इंजेक्शन से लेने वाला व्यक्ति।
- यौन रोगों से पीड़ित व्यक्ति।
- एचआईवी पीड़ित पिता-माता से नवजात को।
- बिना जांच किए रक्त लेने वाला व्यक्ति।
संक्रमण से बचाव
- जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य से यौन संबंध नही रखें।
- यौन संपर्क के समय निरोध का प्रयोग करें।
- मादक औषधियों के आदी व्यक्ति के उपयोग में ली गई सिरिंज व सूई का प्रयोग न करें।
- एड्स पीड़ित महिलाएं गर्भधारण नहीं करें।
- रक्त की आवश्यकता होने पर जांच जरूर कराएं।
- दूसरे व्यक्ति पर प्रयोग हो चुका ब्लेड या पत्ती का उपयोग नहीं करें।
बीमारी के लक्षण
- गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियों का होना।
- लगातार कई हफ्ते बुखार और खांसी रहना।
- अकारण वजन घट जाना।
- मुंह में घाव हो जाना।
- त्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले चकत्ते होना।
ऐसे नहीं फैलता एचआईवी
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ सामान्य संबंध जैसे हाथ मिलाना, एक साथ भोजन करने, एक ही घड़े का पानी पीने, एक ही बिस्तर और कपड़ों के प्रयोग, एक ही कमरे या घर में रहने, एक ही शौचालय, स्नानघर प्रयोग करना, बच्चों के साथ खेलने से यह रोग नहीं फैलता है। मच्छर और खटमल के काटने से यह रोग नहीं फैलता है।
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हर तीन से छह माह में जांच कराएं। सरकार की तरफ से निशुल्क सेंटर खोले गए हैं। बीमारी का इलाज नहीं कराने वालों को दिक्कत होती है। एड्स फैलाने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध है। इसके बाद संक्रमित के रक्त से वायरस फैलता है। तीसरा बड़ा कारण एक ही सुई को बार-बार प्रयोग करना है। उन्होंने बताया कि संक्रमित व्यक्ति बीमारी के कारण मानसिक तनाव में चला जाता है। उसके मन में आत्महत्या करने जैसे विचार आते है। ऐसे में उसकी काउंसलिंग की जाती है। शहर के सभी अस्पतालों में सर्जरी से पहले हर व्यक्ति की एचआईवी जांच होती है। ऐसा चिकित्सकों और अन्य मेडिकल स्टाफ को संक्रमण से बचाने के लिए किया जाता है। एचआईवी की रिपोर्ट आने के बाद ही सर्जरी की जाती है। जांच कराने के संबंध में मरीज की सहमति भी ली जाती है।
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क्या है एड्स
एड्स एचआईवी नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग 12 सप्ताह के बाद ही रक्त की जांच से पता चल जाता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे व्यक्ति को एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। संक्रमित व्यक्ति कई वर्षों (6 से 10 वर्ष) तक सामान्य जीवनयापन करता है, लेकिन इस दौरान दूसरों को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है। शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से अपना बचाव नहीं कर पाता और व्यक्ति कई तरह के संक्रमण से ग्रसित होने लगता है।
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जिला अस्पताल में है जांच की सुविधा
यदि किसी में एचआईवी के लक्षण हैं तो जिला अस्पताल में भी जांच कराई जा सकती है। जिला अस्पताल में मरीज को जरूरी चिकित्सीय परामर्श भी दिया जाता है। वहीं चाइल्ड पीजीआई चिकित्सकों के अनुसार, जो लोग अस्पताल में रक्तदान करते हैं, उनकी एचआईवी जांच अवश्य की जाती है। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा नहीं रहे।
इनको है खतरा
- एक से अधिक लोगों से असुरक्षित यौन संबंध रखने वाला व्यक्ति।
- देह व्यापार करने वालों से यौन संपर्क रखने वाला व्यक्ति।
- नशे का इंजेक्शन से लेने वाला व्यक्ति।
- यौन रोगों से पीड़ित व्यक्ति।
- एचआईवी पीड़ित पिता-माता से नवजात को।
- बिना जांच किए रक्त लेने वाला व्यक्ति।
संक्रमण से बचाव
- जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य से यौन संबंध नही रखें।
- यौन संपर्क के समय निरोध का प्रयोग करें।
- मादक औषधियों के आदी व्यक्ति के उपयोग में ली गई सिरिंज व सूई का प्रयोग न करें।
- एड्स पीड़ित महिलाएं गर्भधारण नहीं करें।
- रक्त की आवश्यकता होने पर जांच जरूर कराएं।
- दूसरे व्यक्ति पर प्रयोग हो चुका ब्लेड या पत्ती का उपयोग नहीं करें।
बीमारी के लक्षण
- गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियों का होना।
- लगातार कई हफ्ते बुखार और खांसी रहना।
- अकारण वजन घट जाना।
- मुंह में घाव हो जाना।
- त्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले चकत्ते होना।
ऐसे नहीं फैलता एचआईवी
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ सामान्य संबंध जैसे हाथ मिलाना, एक साथ भोजन करने, एक ही घड़े का पानी पीने, एक ही बिस्तर और कपड़ों के प्रयोग, एक ही कमरे या घर में रहने, एक ही शौचालय, स्नानघर प्रयोग करना, बच्चों के साथ खेलने से यह रोग नहीं फैलता है। मच्छर और खटमल के काटने से यह रोग नहीं फैलता है।