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पायलटों के भत्ते कम करने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पायलटों के भत्तों में कटौती पर केंद्र सरकार, डीजीसीए तथा एयर इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एयर इंडिया के पायलटों ने उनके भत्तों में कटौती के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसके स्थान पर योजना लागू की गई है जिसके तहत कर्मचारियों को पांच साल तक के बिना वेतन अवकाश पर भेजा जा सकता है।
पेश याचिका एक्जीक्यूटिव पायलट एसोसिएशन (ईपीए) ने दायर कर केंद्रीय विमानन मंत्रालय के उस पत्र को चुनौती जिसमें पायलटों के भत्तों में 40 से 35 फीसदी कर दिया गया है। इसके मुताबिक अब भत्तों की गणना 20 घंटे की उड़ान के आधार पर की जागी जबकि पहले इसकी गणना 70 घंटे की उड़ान पर की जाती थी।
न्यायमूर्ति वीके राव ने याचिका पर मंत्रालय, डीजीसीए तथा एयरलाइन को नोटिस जारी पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान एयर इंडिया ने कोर्ट को बताया कि 14 जुलाई 2020 के उस आदेश को प्रभावी नहीं किया गया है जिसमें चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक को किसी भी कर्मचारी को अवकाश पर भेजने का अधिकार दिया गया है। यह अगले दो-तीन माह तक लागू नहीं होगा।
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ईपीए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कोहली तथा अधिवक्ता भारती चावला के जरिये याचिका दायर कर एयर इंडिया के 20 मार्च तथा 22 जुलाई 2020 के उन आदेशों को चुनौती दी गई जिनमें भत्तों में 10 तथा 40 फीसदी कटौती की गई थी। इसके साथ ही पायलटों ने 14 व 21 जुलाई 2020 के उन आदेशों को रद्द करने की मांग की है जिनमें कर्मचारियों को बिना वेतन के अनिवार्य अवकाश पर भेजने की योजना है।
इसके अलावा पायलटों ने 18 दिसंबर 2020 के उस पत्र को भी रद्द करने की मांग की है जिसमें भत्ते तथा उड़ान के घंटों में कटौती की गई है। ईपीए का कहना है कि वंदे भारत अभियान में उनकी साहसी भूमिका जिसकी प्रशंसा विमानन मंत्री ने भी थी, उसके लिए इनाम देने के बजाय उनके भत्ते तथा उड़ान के घंटों में कटौती की जा रही है। यह अभियान कोरोना काल में विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिए चलाया गया था। - एजेंसी
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पेश याचिका एक्जीक्यूटिव पायलट एसोसिएशन (ईपीए) ने दायर कर केंद्रीय विमानन मंत्रालय के उस पत्र को चुनौती जिसमें पायलटों के भत्तों में 40 से 35 फीसदी कर दिया गया है। इसके मुताबिक अब भत्तों की गणना 20 घंटे की उड़ान के आधार पर की जागी जबकि पहले इसकी गणना 70 घंटे की उड़ान पर की जाती थी।
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न्यायमूर्ति वीके राव ने याचिका पर मंत्रालय, डीजीसीए तथा एयरलाइन को नोटिस जारी पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान एयर इंडिया ने कोर्ट को बताया कि 14 जुलाई 2020 के उस आदेश को प्रभावी नहीं किया गया है जिसमें चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक को किसी भी कर्मचारी को अवकाश पर भेजने का अधिकार दिया गया है। यह अगले दो-तीन माह तक लागू नहीं होगा।
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ईपीए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कोहली तथा अधिवक्ता भारती चावला के जरिये याचिका दायर कर एयर इंडिया के 20 मार्च तथा 22 जुलाई 2020 के उन आदेशों को चुनौती दी गई जिनमें भत्तों में 10 तथा 40 फीसदी कटौती की गई थी। इसके साथ ही पायलटों ने 14 व 21 जुलाई 2020 के उन आदेशों को रद्द करने की मांग की है जिनमें कर्मचारियों को बिना वेतन के अनिवार्य अवकाश पर भेजने की योजना है।
इसके अलावा पायलटों ने 18 दिसंबर 2020 के उस पत्र को भी रद्द करने की मांग की है जिसमें भत्ते तथा उड़ान के घंटों में कटौती की गई है। ईपीए का कहना है कि वंदे भारत अभियान में उनकी साहसी भूमिका जिसकी प्रशंसा विमानन मंत्री ने भी थी, उसके लिए इनाम देने के बजाय उनके भत्ते तथा उड़ान के घंटों में कटौती की जा रही है। यह अभियान कोरोना काल में विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिए चलाया गया था। - एजेंसी