{"_id":"5fbfdace8ebc3e9baa35cccc","slug":"high-court-says-the-girl-was-taken-to-rajasthan-unjustifiably-noida-news-noi5505250183","type":"story","status":"publish","title_hn":"युवती को अनुचित तरीके से लेकर गई थी राजस्थान पुलिस: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
युवती को अनुचित तरीके से लेकर गई थी राजस्थान पुलिस: हाईकोर्ट
विज्ञापन
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अपहरण मामले में पीड़ित युवती को जबरन दिल्ली से राजस्थान ले जाने को पूरी तरह अनुचित कहा है। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े पुलिसवालों पर कार्रवाई का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। युवती के परिजनों ने उसके अपहरण का मुकदमा एक युवक पर दर्ज करवाया था। इसके बाद राजस्थान पुलिस उसे दिल्ली से जबरन धौलपुर ले गई थी।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि कोई पुरुष पुलिसकर्मी किसी महिला को जबरन गाड़ी में नहीं डाल सकता जबकि वह महिला आरोपी नहीं बल्कि पीड़ित है। मामले की सुनवाई के दौरान युवती के पिता व चाचा भी मौजूद थे। हाईकोर्ट के बुधवार के आदेश के बाद युवती को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। यह 26 वर्षीय युवती आईआईएम बंगलूरू से फेलोशिप कर रही है।
युवती ने शादी के लिए परिजनों द्वारा दबाव डालने और घर छोड़ने का पूरा किस्सा बयान किया। उसने यह भी बताया कि पुलिस उसे किस तरह जबरन बयान दर्ज करवाने के लिए धौलपुर की अदालत में ले गई। यह सारी जानकारी युवती ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दी जो उसने अपने मित्र के जरिये अपनी पेशी तथा सुरक्षा के लिए दायर की थी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट के समक्ष युवती ने कहा कि राजस्थान पुलिस ने धौलपुर ले जाते समय उसका मोबाइल फोन छीन लिया था। पुलिस रास्ते में हाईवे पर एक ढाबे पर रात को खाना खाने रुकी थी और वहां पुलिसकर्मियों ने शराब भी पी थी। खंडपीठ ने यह सारी बातें सुनकर कहा कि अगर यह सच तो यह पुलिस के कामकाज पर बड़ा सवाल खड़ा करता है और इसकी जांच व इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने इसके बाद राजस्थान सरकार के गृह विभाग को मामले का संज्ञान लेने, पड़ताल करने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई कि युवती को बयान दर्ज करवाने के लिए राजस्थान ले जाया गया जबकि यह दिल्ली में भी हो सकता था। युवती ने पुलिस को बताया भी था कि वह एनजीओ अनहद के कार्यालय में थी। -एजेंसी
विज्ञापन
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि कोई पुरुष पुलिसकर्मी किसी महिला को जबरन गाड़ी में नहीं डाल सकता जबकि वह महिला आरोपी नहीं बल्कि पीड़ित है। मामले की सुनवाई के दौरान युवती के पिता व चाचा भी मौजूद थे। हाईकोर्ट के बुधवार के आदेश के बाद युवती को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। यह 26 वर्षीय युवती आईआईएम बंगलूरू से फेलोशिप कर रही है।
विज्ञापन
युवती ने शादी के लिए परिजनों द्वारा दबाव डालने और घर छोड़ने का पूरा किस्सा बयान किया। उसने यह भी बताया कि पुलिस उसे किस तरह जबरन बयान दर्ज करवाने के लिए धौलपुर की अदालत में ले गई। यह सारी जानकारी युवती ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दी जो उसने अपने मित्र के जरिये अपनी पेशी तथा सुरक्षा के लिए दायर की थी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट के समक्ष युवती ने कहा कि राजस्थान पुलिस ने धौलपुर ले जाते समय उसका मोबाइल फोन छीन लिया था। पुलिस रास्ते में हाईवे पर एक ढाबे पर रात को खाना खाने रुकी थी और वहां पुलिसकर्मियों ने शराब भी पी थी। खंडपीठ ने यह सारी बातें सुनकर कहा कि अगर यह सच तो यह पुलिस के कामकाज पर बड़ा सवाल खड़ा करता है और इसकी जांच व इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने इसके बाद राजस्थान सरकार के गृह विभाग को मामले का संज्ञान लेने, पड़ताल करने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई कि युवती को बयान दर्ज करवाने के लिए राजस्थान ले जाया गया जबकि यह दिल्ली में भी हो सकता था। युवती ने पुलिस को बताया भी था कि वह एनजीओ अनहद के कार्यालय में थी। -एजेंसी