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दिल्ली दंगा: व्यापक विरोध के बीच भड़काऊ भाषण और चक्का जाम नहीं असामान्य

Tue, 15 Jun 2021 11:52 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 11:52 PM IST
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high court says inflammatory speech and road blockade in not uncommon during protest
नई दिल्ली। सरकार और संसद के कार्यों के व्यापक विरोध के बीच भड़काऊ भाषण देना और चक्का जाम करना कोई असामान्य बात नहीं है। यह बात हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के सिलसिले में कठोर आतंक रोधी कानून यूएपीए के तहत गिरफ्तार नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को जमानत प्रदान करते हुए कही। दिल्ली पुलिस ने इन्हें मई 2020 में गिरफ्तार किया था।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने अपने फैसले में कहा कि सरकार और संसद के कार्यों का विरोध करना एक जायज अधिकारी है। हालांकि ये विरोध शांतिपूर्ण होना चाहिए लेकिन ऐेसे माहौल में प्रदर्शनकारियों द्वारा सीमाओं को लांघना भी असामान्य नहीं है।
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खंडपीठ ने कहा कि हमारी राय में जांच एजेंसी द्वारा फालतू शब्दावलियों, अतिश्योक्तिपूर्ण और विस्तृत निष्कर्षों के बावजूद याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पहली नजर में यूएपीए के तहत असल में कोई मामला नहीं बनता है। आरोपपत्र का अध्ययन करने पर पता चलता है कि याचिकाकर्ताओं का नाम अन्य सह-आरोपियों के साथ सामने आया था। हालांकि मुख्य साजिशकर्ताओं की ओर से जारी निर्देश भी इनके लिए नहीं थे।
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खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालतों को जमानत पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के उन शब्दों को ध्यान में रखना चाहिए कि केवल ये कहकर जमानत का अधिकार नहीं छीना जा सकता कि अपराध गंभीर है क्योंकि अपराध की गंभीरता के कारण मुकदमे का फैसला होने पर मिलने वाली सजा ही लंबी हो सकती है।
खंडपीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण व बिना हथियार विरोध करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 में दिया गया है। यकीनन इस अधिकार पर प्रतिबंध नहीं है और इसके यूएपीए के नजरिये से इसे आतंकी कृत्य नहीं कहा जा सकता।
अदालत ने देवांगना कलिता को जमानत प्रदान करते हुए इस बात पर गौर किया कि याची को एफआईआर दर्ज होने के तीन महीने बाद तक गिरफ्तार नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में हम ऐसा कोई कारण, आधार और औचित्य नहीं देखते कि याची को और हिरासत में रखा जाए।

हाईकोर्ट ने कलिता को सशर्त जमानत प्रदान करते हुए उसे 50 हजार का निजी मुचलका और इतनी राशि के दो जमानती पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उसे जांच अधिकारी अथवा एसएचओ को मोबाइल नंबर देना होगा जिस पर उससे संपर्क हो सके। इसके अलावा ये भी कहा कि ये नंबर हमेशा एक्टिव और मोबाइल फोन स्विच ऑन रहना चाहिए। - एजेंसी
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