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Noida News: हाईकोर्ट ने सीबीडीटी के आदेश को किया निरस्त
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हाईकोर्ट ने सीबीडीटी के आदेश को किया निरस्त
-प्राधिकरण के आवेदन पर विचार करते हुए कार्यवाही के आदेश दिए, नोएडा प्राधिकरण के आयकर छूट का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें नोएडा प्राधिकरण के आवेदन को खारिज किया गया था। कोर्ट ने प्राधिकरण के आवेदन पर विचार करते हुए कार्यवाही के आदेश दिए हैं। प्राधिकरण ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(46) के तहत अपनी आय को छूट प्राप्त आय के रूप में अधिसूचित करने के लिए आवेदन किया था। प्राधिकरण का साफ कहना था कि उनके कार्य वाणिज्यिक गतिविधियों के तहत नहीं आती। लिहाजा उनकी कमाई आयकर के दायरे में नहीं आती।
दरअसल, आयकर विभाग ने नोएडा प्राधिकरण पर करीब 19000 करोड़ के आयकर का क्लेम किया है। उन्होंने यह क्लेम 2003 से लेकर 2011 और 2011-12 से लेकर 2022-23 के वित्तीय वर्ष में किए गए आय पर किया था। इस मामले में नोएडा प्राधिकरण ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(46) के तहत अपनी आय को छूट प्राप्त आय के रूप में अधिसूचित करने की अपील की थी। लेकिन सीबीडीटी ने आवेदन को निरस्त करते हुए कर जमा करने को कहा था।
नोएडा प्राधिकरण ने कहा है कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(46) किसी भी केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के तहत निगमित संस्थाओं पर लागू होती है जो अपने मूल अधिनियम के अन्तर्गत उल्लेखित गतिविधियों का निर्वहन करते हैं। उनका कहना है कि नोएडा प्राधिकरण की गतिविधियां वाणिज्यिक गतिविधियों की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आतीं। औद्योगिक और निवेश संवर्धन के अपने मूल उद्देश्य के अतिरिक्त, नोएडा प्राधिकरण अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर सभी म्युनिसिपल कार्यों को संपादित करता है। शहर में बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं के विकास और अनुरक्षण के साथ प्राधिकरण जल और सीवर सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए क्षेत्र में सफ़ाई व्यवस्था भी सुनिश्चित करता है।
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-प्राधिकरण के आवेदन पर विचार करते हुए कार्यवाही के आदेश दिए, नोएडा प्राधिकरण के आयकर छूट का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें नोएडा प्राधिकरण के आवेदन को खारिज किया गया था। कोर्ट ने प्राधिकरण के आवेदन पर विचार करते हुए कार्यवाही के आदेश दिए हैं। प्राधिकरण ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(46) के तहत अपनी आय को छूट प्राप्त आय के रूप में अधिसूचित करने के लिए आवेदन किया था। प्राधिकरण का साफ कहना था कि उनके कार्य वाणिज्यिक गतिविधियों के तहत नहीं आती। लिहाजा उनकी कमाई आयकर के दायरे में नहीं आती।
दरअसल, आयकर विभाग ने नोएडा प्राधिकरण पर करीब 19000 करोड़ के आयकर का क्लेम किया है। उन्होंने यह क्लेम 2003 से लेकर 2011 और 2011-12 से लेकर 2022-23 के वित्तीय वर्ष में किए गए आय पर किया था। इस मामले में नोएडा प्राधिकरण ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(46) के तहत अपनी आय को छूट प्राप्त आय के रूप में अधिसूचित करने की अपील की थी। लेकिन सीबीडीटी ने आवेदन को निरस्त करते हुए कर जमा करने को कहा था।
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नोएडा प्राधिकरण ने कहा है कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(46) किसी भी केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के तहत निगमित संस्थाओं पर लागू होती है जो अपने मूल अधिनियम के अन्तर्गत उल्लेखित गतिविधियों का निर्वहन करते हैं। उनका कहना है कि नोएडा प्राधिकरण की गतिविधियां वाणिज्यिक गतिविधियों की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आतीं। औद्योगिक और निवेश संवर्धन के अपने मूल उद्देश्य के अतिरिक्त, नोएडा प्राधिकरण अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर सभी म्युनिसिपल कार्यों को संपादित करता है। शहर में बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं के विकास और अनुरक्षण के साथ प्राधिकरण जल और सीवर सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए क्षेत्र में सफ़ाई व्यवस्था भी सुनिश्चित करता है।
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