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Noida News: इधर होगा तर्पण... उधर वृद्धाश्रमों में दिखेगा असल समाज का दर्पण

Thu, 28 Sep 2023 01:36 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 28 Sep 2023 01:36 AM IST
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Here the offering will be made... on the other hand the mirror of the real society will be seen in the old age homes.
इधर होगा तर्पण... उधर वृद्धाश्रमों में दिखेगा असल समाज का दर्पण
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- फिर अपनों की राह देखते रह जाएंगे बेबस बुजुर्ग, बीमारी और झगड़ों के बीच माने जा रहे बोझ
रंजना शर्मा
नोएडा। ‘मेरी आंखों का तारा ही मुझे आंख दिखाता है, जिसे हर खुशी दे दी वह हर गम से मिलाता है। जुबां से कुछ कहूं, कैसे कहूं, किससे कहूं मां हूं, सिखाया बोलना जिसको, वो चुप रहना सिखाता है’। कवि दिनेश रघुवंशी की यह कविता शहर के वृद्धाश्रम में रहने वालों पर सटीक बैठती हैं। शुक्रवार से देश में 16 दिनों तक पितृ पक्ष में अपनों को तर्पण किया जाएगा, इधर वृद्धाश्रमों में बढ़ती बुजुर्गों की संख्या एक बार फिर आज के असल समाज का दर्पण दिखाएगी।
शहर में दो तरह के वृद्धाश्रम हैं। पहले वह हैं, जहां परिजन कुछ पैसे जमा कराकर अपने घर के बुजुर्गों को रहने के लिए छोड़ जाते हैं। वहीं दूसरे सामाजिक संगठनों या आम लोगों की मदद से बनाए गए हैं, जहां बुजुर्गाें को निशुल्क पनाह मिलती है। ग्रेटर नोएडा स्थित रामलाल वृद्धाश्रम में वर्तमान में 40 से अधिक बुजुर्ग अपनों की बाट जोह रहे हैं। इसमें से कुछ लोग ऐसे हैं जिनके बेटे संपन्न हैं, लेकिन बीमारी, चिड़चिड़ेपन, झगड़े के बीच उन्होंने माता-पिता को बोझ मान लिया। वहीं कुछ अपनों के व्यवहार से इतने निराश हो गए कि वह खुद सब-कुछ छोड़कर आश्रम में रहने के लिए आ गए। इन आश्रमों में निराश आंखें दरवाजों पर टकटकी लगाए अपनों की राह में दम तोड़ देती हैं।
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यहां हंसी के पीछे छिपी है वेदना:
सेक्टर-105 स्थित आंगन ओल्ड एज होम में शाम को कदम रखते ही जिंदादिल लोगों की हंसी आपको सुनाई देगी। ये हंसते मुस्कराते चेहरे किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींच लें, लेकिन नजदीक जाकर इनके बीच बैठने पर वेदना का पता चलता है। यहां कोई दो दिन पहले आया है तो कोई दो साल पहले, लेकिन आंखों में अपनों का इंतजार बराबर है। हालांकि चाय की चुस्कियों के बीच यह दिल को समझा ही लेते है कि अब यही उनका परिवार है।
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सबको दी सीख, अपनों ने ही नहीं सुनी:
रामलाल वृद्धाश्रम में दिल्ली निवासी 80 वर्षीय विनोद दुबे गणित के शिक्षक रह चुके हैं। उनका कहना है कि जो सीख वह सारे जीवन छात्रोें को देते रहे, वह उनके अपने बच्चों ने ही नहीं मानी। दो पुत्र हैं, जो अच्छी कंपनियों में कार्यरत हैं। यह कहते हुए वह कहते हुए रो पड़े, फिर भरभराते गले से बोले, चार साल हो गए, आज भी घर की बहुत याद आती है।
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चार बेटों पर भी बनीं बोझ:
वृद्धाश्रम में रहने वाली ग्रेटर नोएडा निवासी 75 वर्षीय अंगूरी देवी ने कहा कि वह चार बेटों की मां हैं, इस पर उन्हें गर्व होता था, लेकिन ऐसा क्या पता था कि वह उन पर बोझ बन जाएंगी। अब रोते-रोते रातें कटती हैं। पांच साल हो गए घर से आए हुए, कोई मिलने भी नहीं आता। लगता है बेटे मां को अब पूरी तरह भूल गए हैं।

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अच्छा माहौल देने का होता है प्रयास
अभी यहां आश्रम को स्थापित किए हुए कुछ ही महीने हुए हैं। यहां रहने वाले लोग अपनों के तिरस्कार से पहले ही आहत हैं। ऐसे में उन्हें बचे जीवन में अच्छा माहौल देने का हर संभव प्रयास किया जाता है, फिर भी अपनों को भूलना कोई आसान बात नहीं है। बुजुर्ग आपस में बात करते हुए भी भावुक हो जाते हैं।
शिव प्रसाद शर्मा, अध्यक्ष, रामलाल वृद्धाश्रम ग्रेटर नोएडा
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