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Noida News: जागरूकता में कमी और खराब लाइफस्टाइल से बढ़ रहा हेपेटाइटिस

Sun, 27 Jul 2025 07:57 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jul 2025 07:57 PM IST
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Hepatitis is increasing due to lack of awareness and bad lifestyle
चाइल्ड पीजीआई में रोजाना 80 मरीज हेपेटाइटिस ए के आ रहें, 25 पाए जा रहे संक्रमित
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में हेपेटाइटिस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासतौर पर बारिश के मौसम में दूषित जल और भोजन से फैलने वाले हेपेटाइटिस ए के मामलों में अधिक वृद्धि हुई है। अकेले चाइल्ड पीजीआई में हर दिन जांच करवाने वाले मरीजों में से 20 से 25 मरीज हेपेटाइटिस ए से संक्रमित पाए जा रहे हैं। कुछ बच्चों की स्थिति गंभीर होने की वजह से उनको भर्ती और रेफर करने की जरूरत भी पड़ रही है। डॉक्टरों का मानना है कि जागरूकता में कमी और शहरी लाइफस्टाइल के कारण वृद्धि हो रही है।
चाइल्ड पीजीआई के डॉ. सुशील कुमार कहना है कि हर दिन लगभग 70-80 बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं जिनमें 20-25 बच्चे हेपेटाइटिस ए से संक्रमित पाए जा रहे हैं। इनमें से 5-6 को भर्ती करने की नौबत आ रही है। यह संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक है। एक बच्चे को लीवर ट्रांसप्लांट होना है इसलिए उसको रेफर करना पड़ा है। मैश मानस हॉस्पिटल के डॉ. आदर्श कुमार चौहान ने बताया कि नोएडा में हाल के वर्षों में हेपेटाइटिस ए और सी के मामलों में खासा इजाफा देखा गया है। हेपेटाइटस ए अक्सर गंदे पानी और असुरक्षित भोजन के जरिये फैलता है। बी और सी प्रकार का हेपेटाइटिस खून और शरीर के तरल पदार्थों से फैलता है।
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फोर्टिस नोएडा के डॉ. निशांत नागपाल ने बताया कि सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है जब हेपेटाइटिस ए, बी या सी अचानक से फुलमिनेंट हेपेटाइटिस में बदल जाए। इसमें लिवर अचानक काम करना बंद कर देता है। हमारे यहां सबसे अधिक हेपेटाइटिस सी देखा गया है जो लिवर कैंसर और सिरोसिस का कारण बन सकता है। ग्रेनो में हर साल कुल हेपेटाइटिस के मामलों में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा रही है जबकि हेपेटाइटिस बी अकेले 3 से 4 प्रतिशत मामलों में होता है। हेपेटाइटिस बी और सी कई बार बिना किसी लक्षण के शरीर में मौजूद रहते हैं। अगर समय रहते इनकी पहचान हो जाए तो लिवर को होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत जिला अस्पताल में चल रहे हेपेटाइटिस क्लिनिक में पिछले तीन महीने में 124 लोगों की हेपेटाइटिस सी जांच हुई। इनमें से 45 मरीजों में वायरस लोड अधिक पाया गया और 43 का इलाज शुरू कर दिया गया। वहीं, 20 मरीज हेपेटाइटिस बी से संक्रमित पाए गए।
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इन्हें है ज्यादा खतरा
-जिन्हें बार-बार खून चढ़ाया जा रहा है।
-नशे के लिए इंजेक्शन का उपयोग करने वाले
- हेल्थ वर्कर्स
- असुरक्षित यौन संबंध रखने वाले

वैक्सीन और सावधानी जरूरी
हेपेटाइटिस ए और बी की सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है। बचाव के लिए साफ पानी पिएं, खाने से पहले हाथ धोएं और मानसून में खुले में बिकने वाले खाने से बचें। वहीं, इंजेक्शन या टैटू केवल प्रमाणित केंद्रों से ही करवाएं और यौन संबंध बनाते समय सावधानी बरतें।
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