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Noida News: धाराओं में बढ़ोतरी की याचिका से जमानत पर सुनवाई टली
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(अदालत से)
फेज-2 कोतवाली क्षेत्र में दर्ज हिंसा और उपद्रव मामले में आरोपियों की जमानत पर सुनवाई टली
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में गुरुवार को आकृति चौधरी व सृष्टि गुप्ता की जमानत पर सुनवाई टल गई। पुलिस ने अदालत को अवगत कराया कि आरोपियों के खिलाफ धाराओं में बढ़ोतरी की गई है। आकृति चौधरी के अधिवक्ता रजनीश यादव ने बताया कि मामले अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
फेज-2 कोतवाली क्षेत्र में दर्ज हिंसा और उपद्रव से जुड़े मामले में आकृति चौधरी, सृष्टि गुप्ता और मनीषा चौहान को जेल से लाकर आज सुबह 9 बजे से 26 अप्रैल की शाम 6 बजे तक पुलिस पूछताछ करेगी। विवेचक की ओर से अदालत में याचिका लगाकर दलील दी गई कि अभी कई अहम साक्ष्य आने बाकी हैं, जिन्हें आरोपियों की निशानदेही पर ही प्राप्त किए जा सकते हैं।
अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के पास घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं। विवेचक ने अदालत को बताया कि रिमांड मिलने से पुलिस आरोपियों की निशानदेही पर मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाएगी। पुलिस का मानना है कि इस केस में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसने आंदोलन को हिंसक रूप देने में भूमिका निभाई।
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फेज-2 कोतवाली क्षेत्र में दर्ज हिंसा और उपद्रव मामले में आरोपियों की जमानत पर सुनवाई टली
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में गुरुवार को आकृति चौधरी व सृष्टि गुप्ता की जमानत पर सुनवाई टल गई। पुलिस ने अदालत को अवगत कराया कि आरोपियों के खिलाफ धाराओं में बढ़ोतरी की गई है। आकृति चौधरी के अधिवक्ता रजनीश यादव ने बताया कि मामले अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
फेज-2 कोतवाली क्षेत्र में दर्ज हिंसा और उपद्रव से जुड़े मामले में आकृति चौधरी, सृष्टि गुप्ता और मनीषा चौहान को जेल से लाकर आज सुबह 9 बजे से 26 अप्रैल की शाम 6 बजे तक पुलिस पूछताछ करेगी। विवेचक की ओर से अदालत में याचिका लगाकर दलील दी गई कि अभी कई अहम साक्ष्य आने बाकी हैं, जिन्हें आरोपियों की निशानदेही पर ही प्राप्त किए जा सकते हैं।
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अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के पास घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं। विवेचक ने अदालत को बताया कि रिमांड मिलने से पुलिस आरोपियों की निशानदेही पर मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाएगी। पुलिस का मानना है कि इस केस में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसने आंदोलन को हिंसक रूप देने में भूमिका निभाई।
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