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Noida News: महिला मरीज से अश्लील हरकत करने के आरोपी स्वास्थ्यकर्मी की जमानत खारिज
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(अदालत से)
-अदालत ने कहा, आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, मौजूद परिस्थितियों में जमानत देना उचित नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सीएचसी भंगेल में एक महिला मरीज से कथित अश्लील हरकत और यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे स्वास्थ्यकर्मी अमर चौधरी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। मौजूदा परिस्थितियों में जमानत देना उचित नहीं होगा।
मामला थाना फेस-2 नोएडा का है। तहरीर में पीड़िता ने बताया था कि 27 अगस्त 2025 को दोपहर टीबी की दवा लेने पहुंची। आरोपी ने उसे आखिर तक बैठाए रखा। बाद में चेकअप के बहाने उसके साथ अश्लील हरकत की। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि घटना एक सार्वजनिक स्थान पर हुई। जहां कमरे के दरवाजे शीशे के बने हैं। आसपास कई मरीज मौजूद थे। किसी स्वतंत्र गवाह का अभाव और विलंब से दर्ज की गई एफआईआर इस मामले को संदेहास्पद बनाते हैं।
पीड़िता ने राजनीतिक दबाव बनाते हुए आरोपी को धमकाया था और साक्ष्यों के बयान तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किए गए हैं। वहीं अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान और एफआईआर को आधार बनाते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि पीड़िता के बयान प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुरूप हैं। घटना की प्रकृति को देखते हुए इसे गंभीर अपराध माना जाता है। विवेचना जारी है, ऐसे में जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
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-अदालत ने कहा, आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, मौजूद परिस्थितियों में जमानत देना उचित नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सीएचसी भंगेल में एक महिला मरीज से कथित अश्लील हरकत और यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे स्वास्थ्यकर्मी अमर चौधरी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। मौजूदा परिस्थितियों में जमानत देना उचित नहीं होगा।
मामला थाना फेस-2 नोएडा का है। तहरीर में पीड़िता ने बताया था कि 27 अगस्त 2025 को दोपहर टीबी की दवा लेने पहुंची। आरोपी ने उसे आखिर तक बैठाए रखा। बाद में चेकअप के बहाने उसके साथ अश्लील हरकत की। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि घटना एक सार्वजनिक स्थान पर हुई। जहां कमरे के दरवाजे शीशे के बने हैं। आसपास कई मरीज मौजूद थे। किसी स्वतंत्र गवाह का अभाव और विलंब से दर्ज की गई एफआईआर इस मामले को संदेहास्पद बनाते हैं।
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पीड़िता ने राजनीतिक दबाव बनाते हुए आरोपी को धमकाया था और साक्ष्यों के बयान तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किए गए हैं। वहीं अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान और एफआईआर को आधार बनाते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि पीड़िता के बयान प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुरूप हैं। घटना की प्रकृति को देखते हुए इसे गंभीर अपराध माना जाता है। विवेचना जारी है, ऐसे में जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
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