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अम्मा ये दवाइयां नहीं, भैया मैं ठहरी गरीब, मेरे पास दवा लैने कू ना है पैसा
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पलवल। अम्मा ये दवाइयां नहीं है। बाहर मेडिकल स्टोर है, उससे जाकर ले लो। भैया मैं ठहरी गरीब, मेरे पास तो पैसा भी ना है, भला मैं कहां से दवा लूंगी। तुम ही दवा दो। अम्मा डॉक्टर ने जो दवा लिखी है, वह अस्पताल में नहीं है। फिर कहां से दवा दें। तौ डॉक्टर सै बोलो ऐसी दवा ही क्यों लिख रौ है, जो अस्पताल में है ही ना...। यह कहना था उस बुजुर्ग महिला का जो डॉक्टर द्वारा बुखार व सांस की दवा लिखने के बाद अस्पताल के दवा काउंटर पर दवा न मिलने पर बेहद परेशान थीं। अकेली यह बुजुर्ग महिला ही नहीं, उन की तरह के ऐसे काफी लोग थे, जो दवाइयां न मिलने के कारण परेशान थे। वहीं अस्पताल में मरीजों के परिजनों को अपने घरों से पंखे लाकर मरीजों को हवा करानी पड़ रही है।
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समय: सुबह 10 बजे
स्थान: सामान्य वार्ड, जिला नागरिक अस्पताल
सुबह के 10 बजे थे। जिला नागरिक अस्पताल के सामान्य वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजन घर से पंखा लाकर मरीजों के बिस्तर के सामने लगा रहे थे। कारण अस्पताल के सामान्य वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए पंखे की व्यवस्था न होना था। ऐसे में मरीजों को गर्मी से राहत दिलाने व मच्छरों से बचाने के लिए उनके परिजनों को घरों से पंखा लाकर खुद ही हवा करनी पड़ी।
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समय: सुबह 10.30 बजे
स्थान: दवा काउंटर, जिला नागरिक अस्पताल
जिला नागरिक अस्पताल के दवा काउंटर पर मरीजों व उनके परिजनों की भीड़ थी। जैसे ही पर्ची मरीज अंदर बैठे फार्मेसिस्ट को देता तो अंदर से आवाज आती दवाइयां नहीं है। ऐसा एक-दो नहीं अधिकांश मरीजों के साथ हो रहा था। कारण पूछने पर बताया गया कि अस्पताल में दवाइयां नहीं है। डॉक्टर भी वही दवाइयां लिख रहे हैं, जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। बाहर मेडिकल स्टोर पर मरीजों को भेजा जा रहा था।
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समय: सुबह 10.40
स्थान: ओपीडी काउंटर
ओपीडी काउंटर पर मरीजों व उनके परिजनों की पर्ची बनवाने के लिए सुबह से ही भीड़ खड़ी थी। अस्पताल में बुखार-खंसी व जुकाम के अलावा सांस के भी काफी मरीज आ रहे थे। पर्ची बनवाने में लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह से ही लोग लाइनों में लगे हुए थे। व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ी हुई थी।
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मैं गरीब हूं। मेरे पास दवा खरीदने को पैसे नहीं है। यदि पैसे होते तो मैं सरकारी अस्पताल क्यों आता। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयां उपलब्ध नहीं है। -ओम प्रकाश, सल्लागढ़
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मैं आज डॉक्टर को दिखाने आई। यहां दवा ही ना है। मैं गरीब कहां से दवा लूंगी। ऐसे तो मैं मर जाऊंगी। दवा तो अस्पताल में ही मिलनी चहिए। -वीना, बुजुर्ग महिला
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अस्पताल में दवाइयों की कमी जल्द दूर कराई जाएगी। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा कि कौन सी दवाइयां नहीं है। डॉक्टरों से भी बात करूंगा कि जो दवाइयां नहीं है, उन्हें मरीजों के लिए न लिखे तथा वे दवाइयां लिखे जो अस्पताल में है। बाहर मेडिकल स्टोर का नाम बताकर दवाइयों के लिए मरीजों को भेजने वालों की भी पहचान करा कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, जिला सिविल सर्जन
फोटो 15पीएएलपी-11,12,13,14 में हैं।
कैप्शन: 11- जिला नागरिक अस्पताल में दवा काउंटर के बाहर लगी मरीजों की भीड़
कैप्शन:12- जिला नागरिक अस्पताल में एक बच्चे की जांच करते हुए डॉक्टर
कैप्शन: 13- ओम प्रकाश
कैप्शन: 14- वीना
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समय: सुबह 10 बजे
स्थान: सामान्य वार्ड, जिला नागरिक अस्पताल
सुबह के 10 बजे थे। जिला नागरिक अस्पताल के सामान्य वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजन घर से पंखा लाकर मरीजों के बिस्तर के सामने लगा रहे थे। कारण अस्पताल के सामान्य वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए पंखे की व्यवस्था न होना था। ऐसे में मरीजों को गर्मी से राहत दिलाने व मच्छरों से बचाने के लिए उनके परिजनों को घरों से पंखा लाकर खुद ही हवा करनी पड़ी।
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समय: सुबह 10.30 बजे
स्थान: दवा काउंटर, जिला नागरिक अस्पताल
जिला नागरिक अस्पताल के दवा काउंटर पर मरीजों व उनके परिजनों की भीड़ थी। जैसे ही पर्ची मरीज अंदर बैठे फार्मेसिस्ट को देता तो अंदर से आवाज आती दवाइयां नहीं है। ऐसा एक-दो नहीं अधिकांश मरीजों के साथ हो रहा था। कारण पूछने पर बताया गया कि अस्पताल में दवाइयां नहीं है। डॉक्टर भी वही दवाइयां लिख रहे हैं, जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। बाहर मेडिकल स्टोर पर मरीजों को भेजा जा रहा था।
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समय: सुबह 10.40
स्थान: ओपीडी काउंटर
ओपीडी काउंटर पर मरीजों व उनके परिजनों की पर्ची बनवाने के लिए सुबह से ही भीड़ खड़ी थी। अस्पताल में बुखार-खंसी व जुकाम के अलावा सांस के भी काफी मरीज आ रहे थे। पर्ची बनवाने में लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह से ही लोग लाइनों में लगे हुए थे। व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ी हुई थी।
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मैं गरीब हूं। मेरे पास दवा खरीदने को पैसे नहीं है। यदि पैसे होते तो मैं सरकारी अस्पताल क्यों आता। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयां उपलब्ध नहीं है। -ओम प्रकाश, सल्लागढ़
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मैं आज डॉक्टर को दिखाने आई। यहां दवा ही ना है। मैं गरीब कहां से दवा लूंगी। ऐसे तो मैं मर जाऊंगी। दवा तो अस्पताल में ही मिलनी चहिए। -वीना, बुजुर्ग महिला
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अस्पताल में दवाइयों की कमी जल्द दूर कराई जाएगी। मैं इस बारे में जानकारी लूंगा कि कौन सी दवाइयां नहीं है। डॉक्टरों से भी बात करूंगा कि जो दवाइयां नहीं है, उन्हें मरीजों के लिए न लिखे तथा वे दवाइयां लिखे जो अस्पताल में है। बाहर मेडिकल स्टोर का नाम बताकर दवाइयों के लिए मरीजों को भेजने वालों की भी पहचान करा कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, जिला सिविल सर्जन
फोटो 15पीएएलपी-11,12,13,14 में हैं।
कैप्शन: 11- जिला नागरिक अस्पताल में दवा काउंटर के बाहर लगी मरीजों की भीड़
कैप्शन:12- जिला नागरिक अस्पताल में एक बच्चे की जांच करते हुए डॉक्टर
कैप्शन: 13- ओम प्रकाश
कैप्शन: 14- वीना
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