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गर्भवती महिलाएं
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तावडू। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को भारी भीड़ उमड़ी। उचित व्यवस्था नहीं होने पर कोरोना प्रोटोकॉल के सभी नियम टूटते नजर आए। जिससे मरीजों में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा।
बता दें कि कि शुक्रवार को चार माह से सात माह के बीच की गर्भवती महिलाओं की जरूरी जांच के साथ निशुल्क अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। इस दौरान जिन सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी वे भी अपनी सीटों से नदारद रहे। जिसकी वजह से सामाजिक दूरी की व्यवस्था की धज्जियां उड़ीं।
गर्भवती महिला मंजू, नजमा, लक्ष्मी, बसमीना, रेनू व मिस्कीना आदि ने बताया कि जांच में भी भेदभाव किया जा रहा है। जो अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था सरकार द्वारा पूरी तरह निशुल्क है फिर भी अन्य जगह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजा जाता है।
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महिला चिकित्सक डॉ. परमीना, डॉ. अमन कौर, डॉ. निर्मल कौर व डॉ. कोमल द्वारा 65 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। जिसमें 25 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए तावडू स्थित माडर्न लैब भेजा गया वहीं चार महिलाओं में खून की कमी के चलते नूंह के नल्हड़ मेडिकल कालेज रेफर किया गया।
डॉ.निर्मल ने बताया कि दो गज की दूरी बनाए रखने के लिए महिलाओं को बार-बार समझाए जाने के बावजूद लापरवाही बरत रहीं थी। उन्हें कई बार चेतावनी भी दी गई। केबिन में बैठकर बाहर की व्यवस्था नहीं संभाल सकते। उनका प्रयास रहता है कि महिलाओं को उचित उपचार मिले।
फोटोऱ् कतार में खड़ी अस्पताल में जांच कराने पहुंची गर्भवती महिलाएं।
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बता दें कि कि शुक्रवार को चार माह से सात माह के बीच की गर्भवती महिलाओं की जरूरी जांच के साथ निशुल्क अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। इस दौरान जिन सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी वे भी अपनी सीटों से नदारद रहे। जिसकी वजह से सामाजिक दूरी की व्यवस्था की धज्जियां उड़ीं।
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गर्भवती महिला मंजू, नजमा, लक्ष्मी, बसमीना, रेनू व मिस्कीना आदि ने बताया कि जांच में भी भेदभाव किया जा रहा है। जो अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था सरकार द्वारा पूरी तरह निशुल्क है फिर भी अन्य जगह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजा जाता है।
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महिला चिकित्सक डॉ. परमीना, डॉ. अमन कौर, डॉ. निर्मल कौर व डॉ. कोमल द्वारा 65 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। जिसमें 25 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए तावडू स्थित माडर्न लैब भेजा गया वहीं चार महिलाओं में खून की कमी के चलते नूंह के नल्हड़ मेडिकल कालेज रेफर किया गया।
डॉ.निर्मल ने बताया कि दो गज की दूरी बनाए रखने के लिए महिलाओं को बार-बार समझाए जाने के बावजूद लापरवाही बरत रहीं थी। उन्हें कई बार चेतावनी भी दी गई। केबिन में बैठकर बाहर की व्यवस्था नहीं संभाल सकते। उनका प्रयास रहता है कि महिलाओं को उचित उपचार मिले।
फोटोऱ् कतार में खड़ी अस्पताल में जांच कराने पहुंची गर्भवती महिलाएं।