फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   health card fraud

Noida News: ईसीएचएस कार्ड से फर्जी इलाज कराने वाले गैंग का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

Tue, 17 Mar 2026 08:01 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 08:01 PM IST
विज्ञापन
health card fraud
फोटो
विज्ञापन

-मृत महिला का इलाज दूसरे के नाम पर किया था 6.50 लाख रुपये का गड़बड़झाला
-सेवानिवृत्त फौजी के ईसीएचएस कार्ड पर भर्ती हुई थी दूसरी महिला
-इलाज के दौरान मौत के बाद बन गया था सेवानिवृत्त फौजी की बेटी का मृत्यु प्रमाण पत्र
-सेना से सेवानिवृत पिता ने कोतवाली बिसरख में दर्ज कराई थी प्राथमिकी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बिसरख पुलिस ने फर्जी तरीके से पूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) कार्ड का इस्तेमाल कर अस्पतालों में इलाज कराने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है।मंगलवार को पुलिस ने इस संगठित गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया। इनमें गाजियाबाद की शिखा सिंह (25), उसका भाई यश सिंह (20), फिरोजाबाद का जितेंद्र यादव (31) और बुलंदशहर का दानिश खान (22) शामिल हैं। इनके पास से एक मोबाइल फोन, व्हाट्सएप के जरिए तैयार किए गए फर्जी ईसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड के दस्तावेज बरामद हुए हैं।

जांच में सामने आया कि यह गिरोह पिछले दो साल से सक्रिय था और अब तक 40 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना चुका है। ठगी की रकम 10 लाख रुपये से भी अधिक बताई जा रही है। इस गिरोह का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। ये ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे। उन्हें झांसा देकर दूसरे लोगों के नाम और फर्जी ईसीएचएस कार्ड के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता था। इलाज तो मुफ्त में हो जाता था, लेकिन इसके बदले गिरोह पीड़ितों से मोटी रकम वसूलता था। यानि, एक तरफ मरीज अपनी मजबूरी में राहत की उम्मीद करता था, तो दूसरी तरफ यह गिरोह उसी मजबूरी से अपना फायदा उठा रहा था।
विज्ञापन

बेटी का बना दिया मृत्यु प्रमाण पत्र : अलीगढ़ निवासी सुंदर भारतीय सेना से 31 जुलाई 2013 को सेवानिवृत्त हुए थे। पीड़ित अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनके कार्ड के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ है। जबकि वह 18 नवंबर 2021 से ईसीएचएस कार्ड की सुविधा ले रहे हैं। 29 जुलाई 2025 को उनकी बेटी शालिनी के ईसीएचएस कार्ड का अवैध तरीके से इस्तेमाल करते हुए एक अन्य महिला को यथार्थ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उस महिला की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद उनकी बेटी के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो गया इस घटना के कारण उनकी बेटी का ईसीएचएस कार्ड भी बंद हो गया था। पीड़ित की शिकायत पर बिसरख कोतवाली पुलिस ने सोमवार को प्राथमिकी दर्ज की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने अलीगढ़ निवासी व्यक्ति की बेटी के ईसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड का फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया था। इस कार्ड के जरिए गाजियाबाद की रहने वाली तनु नाम की महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तनु को 29 जुलाई 2025 को शालिनी के नाम से भर्ती कराया गया और उसका इलाज शुरू हुआ था। इलाज के दौरान करीब 6 लाख 50 हजार रुपये का खर्च आया, जिसे आरोपियों ने बचा लिया। हालांकि, 5 अगस्त 2025 को इलाज के दौरान तनु की मौत हो गई थी। मौत के बाद भी आरोपियों ने अस्पताल में असली पहचान छिपाए रखी और शालिनी के नाम पर ही डेथ सर्टिफिकेट लगवाकर शव प्राप्त कर लिया।
पूछताछ में आरोपी शिखा सिंह ने बताया कि उसकी बहन तनु लंबे समय से बीमार थी और आर्थिक तंगी के कारण इलाज संभव नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उसकी एक परिचित ने उसे दानिश खान से मिलवाया था। दानिश खान ने भरोसा दिलाया कि वह कम पैसों में अच्छे अस्पताल में इलाज करवा देगा लेकिन इसके लिए मरीज का नाम बदलकर किसी और के दस्तावेज पर भर्ती कराना होगा। इसके बाद दानिश ने व्हाट्सएप पर शालिनी का ईसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड भेजा, जिसका इस्तेमाल कर तनु को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस काम के बदले उसने दानिश को करीब 65 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए और कुछ रकम नकद दी थी।

गिरोह का नेटवर्क और काम करने का तरीका : गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य पहले ऐसे लोगों की तलाश करते थे जो इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। इसके बाद उन्हें लालच देकर फर्जी नाम और दस्तावेजों के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता था। गिरोह का मास्टरमाइंड दानिश खान और उसका साथी प्रदीप है, जो फर्जी ईसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड का इंतजाम करते थे। अस्पतालों में अपनी सेटिंग के चलते यह बिना मूल दस्तावेजों की जांच के मरीजों को भर्ती कराते थे। दानिश और उसका साथी प्रदीप पिछले दो वर्षों से इस तरह की ठगी कर रहे हैं। दोनों पहले भी इसी तरह के मामले में नोएडा फेज-2 थाना क्षेत्र से जेल जा चुके हैं। गिरोह का एक अन्य सदस्य प्रदीप अभी फरार है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि किन-किन अस्पतालों में इस तरह से फर्जी नामों पर मरीजों को भर्ती कराया गया।


डी फार्मा पास है गिरोह का सरगनाः गिरोह का सरगना दानिश खान डी फार्मा पास है। वहीं उसका मित्र जितेंद्र यादव एमसीए पास है। वहीं शिखा सिंह बीबीए पास है। जबकि उसका भाई यश सिंह 12वीं पास है। आरोपी दानिश कई अस्पताल में काम कर चुका है। इस कारण उसे मेडिकल फील्ड की अच्छी जानकारी थी। आरोपी ही आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को ढूंढने का काम करता था। साथ ही एम्बुलेंस के बजाए अपने निजी वाहनों से अस्पताल में इलाज के लिए लाता था। आरोपी की एम्बुलेंस वालों से भी जान पहचान थी। जो बुलंदशहर, हापुड़ आदि के इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज के नाम पर लालच देते थे। वहीं जितेंद्र भी निजी अस्पताल में काम कर चुका है। उसका काम डॉक्यूमेंट वेरिफाई करना होता था। वही व्हाट्सऐप पर डॉक्यूमेंट मंगाता था। ऊपर बैठे कर्मचारियों को फिजीकल दस्तावेज लेने संबंधी बात का झांसा देता था।










विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article