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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Hathras was once the cotton farming capital of western UP.

Noida News: कभी पश्चिमी यूपी में कपास की खेती की राजधानी थी हाथरस

Tue, 07 Oct 2025 01:50 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Oct 2025 01:50 AM IST
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Hathras was once the cotton farming capital of western UP.
शहर के मेंडू रोड ​स्थित बिजली काॅटन मिल के एक हिस्से पर लगा पुराना बोर्ड। संवाद - फोटो : samvad
कभी हाथरस के खेतों में कपास की फसल लहलहाती थी, दिन रात यहां की कॉटन मिलों में चक्का घूमता रहता था। एक तरह से हाथरस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कपास की खेती की राजधानी हुआ करता था। बाद में किसानों का रुझान आलू की ओर बढ़ा और कपास का रकबा कम होता गया। बाहर से भी कपास की आपूर्ति बंद हुई तो मिलें भी बंद होती गईं। 35 हजार से घटकर कपास का रकबा आज मात्र 2500 हेक्टेयर रह गया है।
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मंगलवार को विश्व कपास दिवस मनाया जा रहा है। एक समय था रुई, सूत और कपड़ा कारोबार में हाथरस की पहचान देशभर में थी। हाथरस की रुई और सूत मंडी कानपुर से कंधा मिलाकर चलती थी। हाथरस के मिलों में बने धागे और कपड़ों की आपूर्ति देशभर में की जाती थी।
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चार बड़ी कपड़ा मिलें थी जिनमें एक नेशनल टैक्सटाइल कार्पोरेशन की बिजली कॉटन मिल में ही करीब 2500 कर्मचारी काम करते थे। इसके अलावा 120 सूत की मिलें थीं। कपास से बिनौला निकालने की 55 इकाइयां थीं। कपास का रकबा सिमटता गया तो मिलें भी बंद होती चली गई। इन मिलों में करीब 25 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा था। तीन से चार दशक पहले तक यह हाथरस का बड़ा उद्योग हुआ करता था।
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शहर का नया मिल कंपाउंड, पुराना मिल कंपाउंड, ताराचन्द्र की जीन (प्रकाश टैक्सटाइल), बिजली कॉटन मिल इलाके आज भी उस दौर की पहचान बने हैं, यह बात अलग है कि आज इनके स्थान पर पॉश कॉलोनियां बन गई है।

बिजली कॉटन मिल के पूर्व कर्मी गिर्जेश कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि हाथरस के अलावा जब हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात व पंजाब आदि राज्यों में मिलें लगीं तो वहां कपास की मांग बढ़ी। इन राज्यों से कपास की आपूर्ति प्रभावित हुई, हाथरस और आसपास के जिलों में भी कपास की खेती की जगह आलू ने ले ली। कपास के दाम काफी ऊंचे पहुंच गए। इससे कारोबार में बदलाव शुरू हुआ। सरकारों ने इन मिलों को आधुनिक बनाने और माल उपलब्ध कराने पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके चलते मिलें बंद होती गईं, कारोबारी अन्य प्रदेशों में पलायन कर गए।



-हाथरस के कॉटन मिल बंद होने के कई कारण एक साथ हो गए। एक तो कच्चे माल की उपलब्धता कम होती गई। दूसरा बिक्री की स्थिति खराब हुई, पानीपत आदि कई जगह मिलें लग गईं। कपास की उपलब्धता न होने से सिर्फ कॉटन मिल ही बंद नहीं हुए, कई बड़े जिनिंग (बिनौला) प्लांट भी बंद हो गए। अब कुछ ही जिनिंग प्लांट ही काम कर रहे हैं। वेंकटेश अग्रवाल, टैक्सटाइल कारोबारी


-अब जनपद में कपास की खेती अधिक नहीं है। सादाबाद व मुरसान के बीच अब करीब 2500 हेक्टेयर में कपास की खेती होती है। धान, बाजरा व आलू आदि के अच्छे दाम मिलने के कारण किसानों का कपास के प्रति रुझान अधिक है। कपास की फसल हल्की सी बारिश से ही खराब हो जाती है, यह भी रुझान कम होने की एक वजह रही है।निखिल देव तिवारी, जिला कृषि अधिकारी
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