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Noida News: निर्धारित समय सीमा में नहीं की दायर वाद, आयोग ने किया खारिज
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जिला उपभोक्ता आयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। हादसे के बाद वाहन को लोगों के द्वारा जलाने के बाद बीमा कंपनी के क्लेम नहीं देने के वाद को जिला उपभोक्ता आयोग ने खारिज कर दिया। वाहन मालिक ने क्लेम निरस्त होने के दो साल की अवधि के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर नहीं किया था। नोएडा के सेक्टर 27 निवासी रामा शंकर तिवारी ने अपनी जाइलो कार का बीमा यूनिवर्सल शेम्पू जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 11 फरवरी 2012 को कराया था। जो 10 फरवरी 2013 तक वैध था। वाहन का मूल्यांकन 680778 रुपये में किया गया। उसके लिए उनको 30687 रुपये प्रीमियम दिया। व्यवसायिक वाहन को 8 सितंबर 2012 को ग्राम पचपहैरा महोबा में हादसे के चलते स्थानीय लोगों ने आग के सुपुर्द कर दिया। वाहन के लिए उन्होंने तत्काल क्लेम के लिए बीमा कंपनी में दावा किया। उनके द्वारा जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए। बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया।
क्लेम नही मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया गया। आयोग में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिवाद को मार्च 16 में निर्धारित दो साल के बाद दाखिल किया गया। वाहन का बीमा 11 फरवरी 2011 से 10 फरवरी 2012 तक बीमित होना स्वीकार किया है। वाहन का वैध परमिट, फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं था। हादसे की दिनांक को उक्त दस्तावेजों के बिना वाहन को चला रहा था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि परिवाद समय सीमा अवधि से वधित होने के कारण निरस्त कर दिया गया। आयोग ने बीमा कंपनी के फैसले को सही करार देते हुए क्लेम देने के लिए दायर वाद को खारिज कर दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। हादसे के बाद वाहन को लोगों के द्वारा जलाने के बाद बीमा कंपनी के क्लेम नहीं देने के वाद को जिला उपभोक्ता आयोग ने खारिज कर दिया। वाहन मालिक ने क्लेम निरस्त होने के दो साल की अवधि के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर नहीं किया था। नोएडा के सेक्टर 27 निवासी रामा शंकर तिवारी ने अपनी जाइलो कार का बीमा यूनिवर्सल शेम्पू जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 11 फरवरी 2012 को कराया था। जो 10 फरवरी 2013 तक वैध था। वाहन का मूल्यांकन 680778 रुपये में किया गया। उसके लिए उनको 30687 रुपये प्रीमियम दिया। व्यवसायिक वाहन को 8 सितंबर 2012 को ग्राम पचपहैरा महोबा में हादसे के चलते स्थानीय लोगों ने आग के सुपुर्द कर दिया। वाहन के लिए उन्होंने तत्काल क्लेम के लिए बीमा कंपनी में दावा किया। उनके द्वारा जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए। बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया।
क्लेम नही मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया गया। आयोग में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिवाद को मार्च 16 में निर्धारित दो साल के बाद दाखिल किया गया। वाहन का बीमा 11 फरवरी 2011 से 10 फरवरी 2012 तक बीमित होना स्वीकार किया है। वाहन का वैध परमिट, फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं था। हादसे की दिनांक को उक्त दस्तावेजों के बिना वाहन को चला रहा था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि परिवाद समय सीमा अवधि से वधित होने के कारण निरस्त कर दिया गया। आयोग ने बीमा कंपनी के फैसले को सही करार देते हुए क्लेम देने के लिए दायर वाद को खारिज कर दिया है।
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