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Noida News: अखलाक मॉब लिचिंग केस के स्थानांतरण याचिका पर फैसला कल

Mon, 12 Jan 2026 08:32 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 08:32 PM IST
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-जिला न्यायाधीश तय करेंगे एफटीसी में चलेगा मुकदमा या बदलेगी अदालत
-आरोपियों की ओर से दायर की गई स्थानांतरण याचिका पर होगा फैसला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में स्थानांतरण याचिका (टीए) पर गौतमबुद्ध नगर के जिला न्यायाधीश बुधवार यानी कल सुनवाई करेंगे। सुनवाई के बाद यह तय किया जाएगा कि मामला अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) में चलेगा या किसी अन्य अदालत में।आरोपियों के वकील ने 8 जनवरी को एफटीसी से किसी अन्य अदालत में मामले के स्थानांतरण के लिए याचिका दायर की थी। यह याचिका तब दायर की गई थी जब अखलाक की पत्नी इकरामन फास्ट ट्रैक कोर्ट में 23 दिसंबर के फैसले के बाद सुनवाई को दैनिक आधार पर आगे बढ़ाने के बाद अपना बयान दर्ज कराने आई थीं। अभी तक केवल अखलाक की बेटी शाइस्ता के बयान ही अदालत में दर्ज किए गए हैं। जबकि अखलाक की पत्नी और बेटे दानिश के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं।
स्थानांतरण याचिका छह आरोपियों विनय, शिवम, सौरभ, संदीप, गौरव और हरिओम की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। उन्हें झूठे तरीके से फंसाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मामला वापस लेने का निर्देश दिया। मगर एफटीसी अदालत ने सुनवाई के बाद धारा-321 सीआरपीसी के तहत मामला वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया। आरोपी के वकील को सुने बिना एफटीसी ने केवल एक पक्ष (पीड़ित) की बात सुनकर आवेदन खारिज कर दिया था। इससे आरोपियों को न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो गई है। इसलिए मामले को एडीजे एफटीसी-1 से किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करना आवश्यक है।
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वहीं अखलाक के परिवार के अधिवक्ता यूसुफ सैफी ने बताया कि स्थानांतरण याचिका में लगाए गए आरोप निराधार हैं। एफटीसी ने आदेश पारित करने से पहले आरोपियों के वकील की बात सुनी थी। 8 जनवरी को जब अदालत को उच्च न्यायिक प्राधिकरण के समक्ष दायर स्थानांतरण आवेदन के बारे में पता चला तो 23 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी थी। गौरतलब है कि 23 दिसंबर के आदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने लिंचिंग को समाज के खिलाफ एक गंभीर अपराध करार दिया था और कहा था कि अभियोजन वापस लेने का कोई आधार नहीं है। साथ ही मामले की सुनवाई प्रतिदिन करने का आदेश दिया था।
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