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Noida News: सबूतों के अभाव में पॉक्सो और अपहरण के आरोप में तीन बरी
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(अदालत से)
-पीड़िता के बयानों और गवाहों के सबूत आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने नाबालिग के अपहरण और यौन शोषण के मामले में महिला समेत तीन लोगों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोप साबित करने के लिए पेश सबूत पर्याप्त और विश्वसनीय नहीं हैं और इसलिए संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। आरोप है 1 मई 2015 को दनकौर स्थित एक स्कूल से अर्जुन और कृष्ण ने 13 वर्षीय पीड़ित किशोरी का अपहरण किया था। उसे शादी के लिए दबाव डाला और यौन उत्पीड़न किया। आरोपी माया पर आरोप लगा कि उसने पीड़िता की अर्जुन से मुलाकात करवाई और अपहरण में भूमिका निभाई। अदालत ने दोनों पक्षों के गवाहों और सबूतों के विश्लेषण के बाद पाया कि आरोप साबित करने के लिए जरूरी तथ्य प्रमाणित नहीं हो सके।
पीड़िता ने धारा-164 सीआरपीसी के तहत दिए गए अपने बयान में अपहरण या यौन उत्पीड़न का कोई जिक्र नहीं किया था। पीड़िता ने स्वीकार किया कि अर्जुन ने उसे अपने घर तक छोड़ा था। अदालत ने कहा कि यदि अर्जुन का इरादा वास्तव में अपहरण का होता, तो वह पीड़िता को उसके घर नहीं छोड़ता। पीड़िता ने कहा कि घटना के समय उसकी दो सहपाठियां मौजूद थीं, लेकिन अभियोजन पक्ष इन महत्वपूर्ण गवाहों को पेश नहीं कर सका। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इसलिए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।
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-पीड़िता के बयानों और गवाहों के सबूत आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने नाबालिग के अपहरण और यौन शोषण के मामले में महिला समेत तीन लोगों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोप साबित करने के लिए पेश सबूत पर्याप्त और विश्वसनीय नहीं हैं और इसलिए संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। आरोप है 1 मई 2015 को दनकौर स्थित एक स्कूल से अर्जुन और कृष्ण ने 13 वर्षीय पीड़ित किशोरी का अपहरण किया था। उसे शादी के लिए दबाव डाला और यौन उत्पीड़न किया। आरोपी माया पर आरोप लगा कि उसने पीड़िता की अर्जुन से मुलाकात करवाई और अपहरण में भूमिका निभाई। अदालत ने दोनों पक्षों के गवाहों और सबूतों के विश्लेषण के बाद पाया कि आरोप साबित करने के लिए जरूरी तथ्य प्रमाणित नहीं हो सके।
पीड़िता ने धारा-164 सीआरपीसी के तहत दिए गए अपने बयान में अपहरण या यौन उत्पीड़न का कोई जिक्र नहीं किया था। पीड़िता ने स्वीकार किया कि अर्जुन ने उसे अपने घर तक छोड़ा था। अदालत ने कहा कि यदि अर्जुन का इरादा वास्तव में अपहरण का होता, तो वह पीड़िता को उसके घर नहीं छोड़ता। पीड़िता ने कहा कि घटना के समय उसकी दो सहपाठियां मौजूद थीं, लेकिन अभियोजन पक्ष इन महत्वपूर्ण गवाहों को पेश नहीं कर सका। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इसलिए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।
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