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ग्रेटर नोएडा: बसानी थी मॉडल टाउनशिप, उसी जेवर बांगर में मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे किसान

Fri, 23 Jul 2021 03:46 PM IST
पूजा त्रिपाठी मनोज कुमार शर्मा, अमर उजाला, जेवर
मनोज कुमार शर्मा, अमर उजाला, जेवर Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 23 Jul 2021 03:46 PM IST
सार

अधिकारियों ने किसानों को गांव से विस्थापित कर यहां बसा दिया। लेकिन जेवर बांगर में बसाई जा रही टाउनशिप में अभी तक मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जिसकी वजह से गांव छोड़कर आए ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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Greater noida in jewar bangar model township was to be made but still farmers are lacking basic facilities
jewar bangar township - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नोएडा एयरपोर्ट से प्रभावित 6 गांवों के लगभग 3000 किसान परिवारों के लिए यमुना विकास प्राधिकरण (यीडा) को जेवर बांगर की 48 हेक्टेयर जमीन पर मॉडर्न टाउनशिप विकसित करके देनी थी। जिसके बाद किसान परिवारों को इस टाउनशिप में विस्थापित किया जाना था।

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अधिकारियों ने किसानों को गांव से विस्थापित कर यहां बसा दिया। लेकिन जेवर बांगर में बसाई जा रही टाउनशिप में अभी तक मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जिसकी वजह से गांव छोड़कर आए ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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एयरपोर्ट से प्रभावित रोही, नगला फूलखां, नगला गणेशी, नगला छीतर, नगला शरीफ खां और दयानतपुर खेड़ा गांव के किसानों की जमीन व मकान एयरपोर्ट के लिए अधिगृहीत किए गए थे। इन गांवों के करीब तीन हजार किसान परिवारों को जेवर बांगर में बसाने के लिए प्राधिकरण ने 48 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की थी। इस 48 हेक्टेयर जमीन पर प्राधिकरण को मॉडर्न टाउनशिप विकसित करते हुए किसानों का विस्थापन कराना था। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने इन छह गांव के 3000 परिवारों में से मात्र दो परिवारों को छोड़कर सभी को विस्थापित कर दिया।
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जेवर बांगर में विस्थापित हुए किसान परिवारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी बिजली को लेकर आ रही है। टाउनशिप में अभी तक बिजली आपूर्ति केवल स्ट्रीट लाइटों के लिए है। ग्रामीण अपने घरों के लिए बिजली चाहते हैं तो उन्हें बिजली नहीं मिल पा रही है। वही शुद्ध पेयजल के लिए बनाई जा रही ओवरहेड टैंकों का अभी तक मात्र 30 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। 

पार्क और सामुदायिक केंद्र की भी नहीं हुई व्यवस्था 
ग्रामीणों को विस्थापित करते समय अधिकारियों ने उन्हें गांव जैसा माहौल देने के लिए हर पॉकेट में बड़े-बड़े पार्कों की व्यवस्था होने की बात कही थी। साथ ही सड़कों के किनारे हरियाली के लिए पौधरोपण करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन जेवर बांगर की टाउनशिप में अभी तक ना तो पार्क बनकर तैयार हुए हैं और ना ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का काम शुरू हो पाया है। सड़कों के किनारे हरियाली के लिए पौधरोपण भी नहीं हुआ। 

ड्रेनेज और सड़कों का काम भी नहीं हुआ पूरा 
घरों से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जाना था। जिसकी शुरुआत भी नहीं हुई है।  वहीं प्रत्येक पॉकेट में 9 मीटर, 12 मीटर और 16 मीटर चौड़ी सड़कें बनाई जानी थी। जिनमें से कुछ अभी भी अधूरी पड़ी हुई हैं। जिसकी वजह से लोगों को सामान के लाने ले जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


नई भूमि अधिग्रहण कानून के तहत देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर विस्थापन कार्य किया गया है। जेवर बांगर मॉडर्न टाउनशिप के रूप में विकसित होगी। टाउनशिप की मूलभूत सुविधाओं को देने में कुछ विलंब हुआ है, लेकिन जल्द ही सभी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी।- शैलेंद्र भाटिया ओएसडी यमुना विकास प्राधिकरण

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