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बंदरों के लिए छलके आंसू: वन विभाग लेने पहुंचा तो परिवार का रो-रोकर हुआ बुरा हाल, नहीं देने की जिद पर अड़ गया था बच्चा

Tue, 07 Sep 2021 02:18 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 07 Sep 2021 02:18 PM IST
सार

घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बंदर के बच्चे को परिवार का सदस्य बताकर वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने बंदर के बच्चे को एक मदारी से तीन हजार रुपये में खरीदा था।

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Greater noida forest department came to rescue two pet monkeys family urge not to take them away weep badly video goes viral
monkey rescue - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्रेटर नोएडा में एक गोरक्षक और पशु प्रेमी संस्था की सूचना पर रविवार देर शाम वन विभाग की टीम ने एक परिवार से बंदर के छोटे बच्चे को मुक्त करा दिया। वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने पर परिवार का बच्चा बंदर को नहीं देने की जिद पर अड़ गया। वन विभाग की टीम ने नियमों का हवाला देते हुए बच्चे को समझाकर बंदर को मुक्त कराया। मामले में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत केस दर्ज किया है। 

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वहीं घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बंदर के बच्चे को परिवार का सदस्य बताकर वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने बंदर के बच्चे को एक मदारी से तीन हजार रुपये में खरीदा था। वन दरोगा रामअवतार चौधरी ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि अल्फा-2 सेक्टर में झोंपड़ी में रहने वाले एक परिवार ने बंदर के दो छोटे बच्चों को बंधक बनाया हुआ है। यह वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। 
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रविवार देर शाम मौके पर पहुंचकर बंदर के बच्चे को मुक्त करा दिया। लेकिन दूसरा बंदर मौके पर नहीं मिला। परिवार का कहना था कि एक मदारी बंदर के बच्चे से मारपीट कर रहा था। इसके चलते उन्होंने तीन हजार रुपये देकर बच्चे को खरीद लिया था। इसके बाद से वह बंदर को पाल रहे हैं। सोमवार को परिवार की महिला देवेंद्री, उसकी बेटी अभिलाषा और बेटे का रोते हुए का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।  
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भवानी रखा था बंदर के बच्चे का नाम 
देवेंद्री ने बताया कि वह वह रेहड़ी पर सब्जी बेचती है। मदारी से खरीदने के बाद उसने बंदर के बच्चे का नाम भवानी रखा था। बेटी अभिलाषा और बेटा बंदर के बच्चे के साथ खेलते थे। वन विभाग के बंदर के बच्चे को ले जाने के बाद से वह और उसके बच्चे लगातार रो रहे हैं और उन्होंने खाना भी नहीं खाया। उन्होंने बंदर के बच्चे को वापस दिलाने की मांग की। 


बंधक बनाकर रखना और वीडियो बनाना गैरकानूनी, 7 वर्ष की हो सकती है सजा 
वन क्षेत्राधिकारी किताब सिंह ने बताया कि बंदर श्रेणी-2 का वन्य जीव है। बंदर या उसके बच्चे को बंधक बना या बंधक बनाकर सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाना गैरकानूनी है। इसके लिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत 7 साल तक सजा और 25 हजार तक जुर्माने लगाया जा सकता है। वन दरोगा का कहना है कि मौके पर बंदर बंधक मिला है, हालांकि उसे बोतल से दूध पिलाया जा रहा था लेकिन मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है। मौके पर बंदर का दूसरा बच्चा नहीं मिला। बंदर के बच्चे को फिलहाल निजी सेंचुरी में रखा गया है। बड़े होने के बाद उसे जंगल में छोड़ा जाएगा। 

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