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Noida News: गोविंद सहाय के राष्ट्रपिता और शास्त्री जी से थे करीबी रिश्ते

Thu, 02 Oct 2025 12:27 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा Updated Thu, 02 Oct 2025 12:27 AM IST
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Govind Sahai had close relations with the Father of the Nation and Shastriji.
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री व हेमवती नंदन बहुगुणा से विचार विमर्श करते गोविन्द सहाय।
गजरौला शिव। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। जिले वासियों के लिए गर्व की बात है कि गजरौला शिव में जन्में बाबू गोविंद सहाय के दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध रहे। नेहरू सरकार में बाबू जी लाल बहादुर शास्त्री के साथ मंत्री थे। उन्होंने कस्बा मंडावर में महात्मा गांधी इंटर कॉलेज व अपने गांव गजरौला शिव में महात्मा गांधी आश्रम की स्थापना कराई थी। महात्मा गांधी ने धामपुर में भी एक जनसभा को संबोधित किया था।
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महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए भारत को स्वतंत्रता दिलाई तो दूसरी ओर लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी की मिसाल के तौर पर देखा जाता है। शास्त्री जी ने देश में खाद्यान्न संकट के वक्त सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील कर लोगों को एक नई राह दिखाई थी। उन्होंने ही जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। आजादी के दीवाने रहे बाबू गोविंद सहाय के राष्ट्रपिता के अलावा पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, हेमवती नंदन बहुगुणा, कमलापति त्रिपाठी से घनिष्ठ संबंध रहे। इनके से अधिकांश उनसे मिलने बिजनौर आते रहते थे। बाबूजी के बीमार पड़ने पर पंडित जवाहरलाल नेहरू उनसे मिलने बिजनौर आए थे। उन्होंने मंडावर में महात्मा गांधी इंटर कॉलेज की स्थापना कराई। बिजनौर से चंदक मार्ग बनवाया।
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नेहरू सरकार में पहली बार कारागार मंत्री रहे गोविंद सहाय

बाबू गोविंद सहाय के पौत्र निर्माण कुमार बताते हैं कि आजादी के बाद नेहरू सरकार में लाल बहादुर शास्त्री के साथ पहली बार गोविंद सहाय कारागार मंत्री रहे। बिजनौर में बना डीएम आवास मार्ग भी उन्हीं के नाम से जाना जाता है। बिजनौर से अपने गांव गजरौला शिव जाने के लिए जंदरपुर से गजरौला तक सड़क बनवाई। गांव में जूनियर हाई स्कूल की स्थापना कराई। इतना ही नहीं गांव में स्वतंत्रता सेनानियों के लिए गांधी आश्रम भवन की स्थापना की। यहां दूसरे प्रदेशों से आए क्रांतिकारी ठहरते थे। गजरौला शिव निवासी पीयूष त्रिपाठी बताते हैं कि उनके पिताजी कहते थे कि जब 1936 में गोविंद सहाय बीमार हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू उनसे मिलने बिजनौर में सोती ब्रह्म स्वरूप की कोठी पर आए थे। जहां उनका इलाज कर चल रहा था। बाबू जी ने आंखों देखा रूस और साम्यवाद का विपुल समेत पांच पुस्तकें लिखीं।
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