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Noida News: गांव में पसरा मातम, घरों में नहीं जले चूल्हे...लोगों में गम और गुस्सा

Thu, 18 Sep 2025 01:48 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 18 Sep 2025 01:48 AM IST
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Gorakhpur News: Mourning spread in the village, stoves were not lit in the houses... grief and anger among the people
पिपराइच थाना क्षेत्र के महुआ चापी गांव में मृत्क दीपक गुप्ता के घर पर रोती बिलखती दादी, मां, छो
मोबाइल पर फोटो दिखाकर कह रहे थे बच्चे, यही था भैया दीपक अब नहीं आएगा
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सबकी जुबां पर एक ही बात, पुलिस समय से चेती होती तो बच जाती दीपक की जान

दीपक के घर के बाहर लगा रहा ग्रामीणों का जमावड़ा, नहीं जले कई घरों के चूल्हे
गोरखपुर। पिपराइच क्षेत्र के जंगल धूसड़ गांव में बुधवार का दिन सन्नाटे और आक्रोश से भरा रहा। गांव में मातम पसरा रहा और लोगों में गम और गुस्सा है। गांव में लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले। चौराहे से लेकर गांव तक हर कोई पुलिस पर सवाल उठा रहा है। हर जुबां पर यही सवाल था कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो शायद दीपक की जान बच जाती।
दीपक की मां सरिता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह सदमे से उबर नहीं पा रही हैं। वहीं, पिता दुर्गेश गुप्ता, जो पेशे से कंपाउंडर हैं, एक कोने में गुमसुम बैठे रहे। बार-बार उनकी आंखों से आंसू छलक जाते और फिर गांव वाले उन्हें संभालते। गांव में बच्चे भी दीपक को खोने से आहत दिखे। कई छोटे बच्चे मोबाइल पर फोटो दिखाकर कह रहे थे...यही था भैया दीपक, अब नहीं आएगा।
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बच्चों की मासूमियत भरे सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था। दीपक के घर के बाहर बैठीं कृष्णावती, गंगोत्री, शोभा, शकुंतला देवी व सुशीला का कहना था कि ''''जइसन सबका लइकवा (लड़का) रहलें.. बाबू वइसे इहो लइकवा रहे। इका जाए के खबर सुनकर हमऊं आई गईनीं।'''' वहां मौजूद बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं सबके दिल में पुलिस के खिलाफ गुस्सा था।
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इधर, दीपक के घर के बाहर से गुजरने वालों की आंखें नम हो जा रही थीं। लोगों के घरों में चूल्हे भी नहीं जले। बुधवार सुबह से ही दीपक के घर के बाहर ग्रामीणों का जमावड़ा बना रहा। महिलाएं अपने बच्चों को लेकर पहुंच रही थीं तो बुजुर्ग खामोश आंखों से आने जाने वाले लोगों की तरफ देख रहे थे। मोहल्ले और आसपास के गांवों के किशोरों से लेकर गांव की बुजुर्ग महिलाएं तक पुलिस को कोसते नजर आए। उनके चेहरे पर नाराजगी साफ दिख रही थी। कह रहे थे कि पुलिस ने पहले से ही पशु तस्करों की गतिविधियों पर ध्यान दिया होता तो यह नौबत ही नहीं आती।
गांव के ही रहने वाले अजय चौहान, शनि, संकेत, अभिषेक गौतम, राहुल, शिवराज, राजन बोले- आसपास के गांव के लोगों ने कई बार थाने और चौकी में शिकायत की कि तस्कर रात में गाड़ियां लेकर निकलते हैं, लेकिन पुलिस ने सुना ही नहीं। उसका नतीजा यह हुआ कि हमारे गांव का होनहार बच्चा चला गया।



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अखबार में छपी खबरें पढ़कर आपस में चर्चा करते दिखे
जंगल धूसड़ चौराहे पर खड़े युवा अखबार में छपी खबरें पढ़कर आपस में चर्चा करते दिखे। कई लोग मोबाइल पर लाइव अपडेट देखकर दूसरों को सुना रहे थे कि पुलिस ने कितने आरोपियों को पकड़ा है और कितनों की तलाश जारी है। चौराहे पर मौजूद राम बहौर कह रहे थे कि दीपक नीट की तैयारी कर रहा था, डॉक्टर बनना चाहता था। लेकिन तस्करों ने और पुलिस की लापरवाही ने उसका सबकुछ छीन लिया। तभी पड़ोस में बैठे राकेश चौहान ओर धनश्याम सिंह कहने लगे कि पुलिस की सुस्ती ने ही इस जघन्य वारदात को जन्म दिया। यही कारण है कि अब गांव का हर शख्स सवाल पूछ रहा है क्या दीपक की मौत से भी पुलिस सबक लेगी। ये बातें सुनकर वहां मोबाइल पर खबर देख रहे संजय गुप्ता ओर अमित पांडेय तपाक से बोल पड़े कि इस पूरे प्रकरण की सही से जांच कराई जाए तो पुलिस के साथ कई और लोग भी फंसेंगे। तस्करों के साथ यहां के स्थानीय लोग भी शामिल होंगे।
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