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बेतिया एस्टेट: महराजगंज में भी साढ़े सात एकड़ जमीन, दावा-चकबंदी में हेराफेरी

Thu, 18 Sep 2025 12:52 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 18 Sep 2025 12:52 AM IST
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Gorakhpur News: Bettiah Estate: Seven and a half acres of land in Maharajganj too, fraud in claim-consolidation
बेतिया एस्टेट के अधिकारी ने डीएम और तहसीलदार को पत्र लिखकर जांच की मांग की
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महराजगंज के पिपरिया गांव में 20 से ज्यादा लोग हैं लंबे समय से जमीन पर काबिज



गोरखपुर के बेतियाहाता में पांच एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्जे का शक



गोरखपुर। गोरखपुर मंडल में बेतिया एस्टेट की जमीन की खोजबीन जारी है। महराजगंज जिले के पिपरिया गांव में साढ़े सात एकड़ जमीन मिली है। बिहार सरकार से नियुक्त प्रशासक ने दावा किया है कि बेतिया एस्टेट के रिकॉर्ड में यह जमीन मौजूद है। चकबंदी में हेराफेरी कर इस जमीन को करीब 20 से ज्यादा लोगों के नाम कर दिया गया। अब खतौनी में उनके नाम भी चढ़ गए हैं। डीएम और तहसीलदार को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग की गई है।



वहीं, प्रशासक ने गोरखपुर के बेतियाहाता मोहल्ले में करीब पांच एकड़ जमीन पर कब्जे का शक जताते हुए पैमाइश के लिए टीम गठित कराने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा है।
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बिहार सरकार ने यूपी में बेतिया एस्टेट की जमीनों को चिह्नित कर उसे कब्जे में लेने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में गोरखपुर और आसपास के जिलों में भी बेतिया एस्टेट की जमीनों का पता लगाया जा रहा है। इसके लिए बेतिया एस्टेट कार्यालय की तरफ से पुराने दस्तावेज अधिकारियों को मुहैया कराए गए हैं। वहीं, वर्ष 2018 में हुए सर्वे को भी आधार बनाया गया है। इसके मुताबिक, गोरखपुर के बेतियाहाता में करीब 19.91 हेक्टेयर जमीन है।
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बिहार सरकार से आए राजस्व अधिकारियों ने दो गाटा नंबर की पैमाइश कराई तो करीब पांच एकड़ जमीन पर कब्जा मिला। इसके बाद काबिज 38 लोगों को 15 दिनों में कब्जा खाली करने के लिए नोटिस दिया गया। कब्जा नहीं हटा तो बिहार सरकार के सहायक बंदोबस्त अधिकारी ने एसडीएम कोर्ट में केस दर्ज कराया है, जिसकी सुनवाई चल रही है। इसके बाद अन्य जमीनों की पैमाइश के लिए प्रशासन को पत्र लिखा है लेकिन अब तक टीम गठित नहीं हो सकी है।

वर्जन



बेतिया एस्टेट की जमीनों की पैमाइश के लिए मुझे आवेदन नहीं मिला है। आवेदन मिलता है तो जांच कराने के बाद राजस्व रिकॉर्ड से मिलान कराया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।



- दीपक मीणा, डीएम



चकबंदी में अलाट की गई जमीन तो क्यों नहीं दी गई सूचना



बिहार सरकार के सहायक बंदोबस्त अधिकारी बद्री प्रसाद गुप्ता ने बताया कि गोरखपुर के बेतियाहाता में 19.91 हेक्टेयर और महराजगंज के पिपरिया गांव में 7.34 एकड़ जमीन बेतिया एस्टेट की मिली है। इसके दस्तावेज बेतिया एस्टेट के पास मौजूद हैं। बेतियाहाता में सिर्फ दो गाटा नंबर की पैमाइश हो सकी है। करीब पांच एकड़ जमीन पर कब्जा मिला। 38 लोगों को इस संबंध में नोटिस दिया गया। इसके बाद भी कब्जा नहीं हटा तो एसडीएम कोर्ट में केस दर्ज कराया गया है। उन्होंने बताया कि महराजगंज में जांच में पता चला कि पूर्व में हुई चकबंदी में जमीनों की हेराफेरी की गई है। बेतिया एस्टेट की जमीन 20 से ज्यादा लोगों के नाम कर दी गई। खतौनी में उनके नाम भी चढ़ गए। यह जमीन सड़क के किनारे की है। अब सवाल यह है कि चकबंदी में जमीन अलाट करने के पहले बेतिया एस्टेट को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई? बदले में बेतिया एस्टेट की जमीन कहां है? इस संबंध में एडीएम से मुलाकात की है और जमीन का खसरा और पूर्व की खतौनी उपलब्ध कराने के लिए डीएम व तहसीलदार को पत्र लिखा गया है।



ग्रामीणों का दावा- पूर्वजों के समय से हैं काबिज, खतौनी में नाम भी



महराजगंज/परतावल। क्षेत्र के पिपरिया गांव की करीब 7.34 एकड़ जमीन को बेतिया एस्टेट की संपत्ति बताकर राजस्व विभाग की टीम सत्यापन करने पहुंची थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध और पुराने अभिलेख सामने आने के बाद टीम लौट गई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जिस जमीन पर वे काबिज हैं, खेती कर रहे हैं और जहां पक्के मकान भी बने हैं, उसे अचानक एस्टेट की संपत्ति क्यों बताया जा रहा है, जबकि खतौनी में उनके नाम भी दर्ज हैं।



गांव के शाह आलम ने बताया कि गाटा संख्या 119 रकबा 2.75 एकड़ पर उनके परिवार समेत तबरेज, सनफरेज, सैदुल्लाह, हकीकुल्लाह, आलमगीर व अन्य के नाम पीढ़ियों से दर्ज हैं। वे लोग खेती करते आ रहे हैं और इस पर उनका वास्तविक कब्जा भी है। इसी तरह मिठाई लाल, संजय, हरिलाल, गंगा प्रसाद और संध्या देवी ने कहा कि गाटा संख्या 230 पर उनके पूर्वजों के नाम 100 वर्ष पुराने अभिलेख में दर्ज हैं। ऐसे में जमीन को बेतिया एस्टेट का बताना गलत है।



गाटा संख्या 210 पर कई परिवारों के मकान बने हुए हैं। छोटू, रोगी, सूर्यराज, सिब्बन, गोमती, शिवनरायन, खूबलाल व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यह जमीन उनकी पुश्तैनी है और पूर्वजों के नाम से ही चली आ रही है। इसी तरह गाटा संख्या 213 रकबा 3.3 एकड़ पर नेसार अहमद, इस्तेयाक, सरफराज, मतीन, रामप्रसाद, नईमुद्दीन, फूला देवी, जाहिद, निशा और अन्य परिवारों के नाम पीढ़ियों से दर्ज हैं। उनका दावा है कि 115 वर्ष पुराने अभिलेख में भी मौजूद हैं।




वर्जन



बेतिया एस्टेट के बंदोबस्त अधिकारी की तरफ से पत्र मिला है। जमीनों के बारे में जांच की जा रही है। अब तक की जांच प्रक्रिया में काश्तकारों की ओर से जमीनों के मालिकाना हक के कई साक्ष्य मिले हैं। नियम के अनुसार ही सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।



- पंकज शाही, तहसीलदार सदर, महराजगंज
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