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जीएनएम कॉलेज में चार वर्ष से नहीं लग रहीं कक्षाएं

Wed, 16 Dec 2020 11:07 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 16 Dec 2020 11:07 PM IST
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gnm college did not take classes for four years
मांडीखेड़ा में जीएनएम कॉलेल के लिए बनाया गया भवन - फोटो : Mewat
जीएनएम कॉलेज में चार वर्ष से नहीं लगी कक्षाएं
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राजुद्दीन जंग
नगीना। सबसे पिछड़े जिले नूंह में नीति आयोग की पहल के बावजूद हरियाणा सरकार की नियत में खोट दिखाई दे रहा है। नूंह के जिला अस्पताल अल आफिया मांडीखेड़ा के परिसर में पलवल और जींद के साथ बने जीएनएम कॉलेज में चार वर्ष से कक्षाएं नहीं लग रही हैं। जबकि, पलवल और जींद में 3 बैच पूरे हो चुके हैं। हालांकि, 2 वर्ष पहले जीएनएम कॉलेज के लिए 60 सीटें मंजूर की गई थी, लेकिन इस साल इनकी संख्या भी घटाकर 40 कर दी गई। ऐसे में जीएनएम कॉलेज पर ही संकट के बादल छाए हुए हैं। अब तक स्थिति साफ नहीं है कि इस वर्ष भी कक्षाएं लगेंगी या नहीं।
नूंह की सैकड़ों नर्सिंग छात्राएं जीएनएम कॉलेज में दाखिला लेने के इंतजार में रहती हैं। लेकिन, प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर अलवर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अन्य जिलों में कोर्स करने को मजबूर हैं। घागस गांव की जकिया, सानियान और रजिया सुल्तान ने बताया कि जीएनएम कॉलेज से काफी उम्मीदें हैं। लेकिन, अब यहां दाखिला न मिलने पर दूसरे कोर्स करने पड़ रहे हैं। सलमा और नसीम बानो ने बताया कि अलवर से जीएनएम का कोर्स कर रही हैं। एक तरफ सरकार कह रही है कि बेटियों को पढ़ाओ, लेकिन जीएनएम कॉलेज में कक्षाएं नहीं लग रही हैं। सरकार का बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ का नारा साकार नहीं हो रहा है। 26 अगस्त 2014 में जिला अस्पताल मांडीखेड़ा के परिसर में जीएनएम कॉलेज की आधारशिला रोहतक के तत्कालीन सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने रखी थी। वर्ष 2016 में कॉलेज बनकर तैयार हो गया। था। इसकी लागत करीब सवा 7 करोड़ रुपये आई थी।
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चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग को जीएनएम कॉलेज में कक्षाएं आरंभ कराने के लिए कई बार पत्र लिख चुका हूं। पहले 60 सीटें स्वीकृत की थी, अब उनकी संख्या घटाकर 40 कर दी है। उम्मीद है कि इस साल से कक्षाएं लगाई जा सकती हैं।
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डॉ. सुरेंद्र यादव सिविल सर्जन नूंह।
फोटो : जिला अस्पताल मांडीखेड़ा में जीएनएम कॉलेज के लिए बना भवन
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