सरकारी स्कूल से मुंह मोड़ रही बेटियां: 9वीं के बाद छोड़ रहीं स्कूल, घर से पढ़ाई करने का आंकड़ा बढ़ा
जिले में 152 यूपी बोर्ड के स्कूल हैं। स्कूल की पढ़ाई छोडऩे वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियां हैं। वर्ष 2022-23 में 9वीं कक्षा में 11322 लड़कियां और 12वीं में 8496 लड़कियां पंजीकृत थी।
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मैं पढऩे में बहुत अच्छी नहीं हूं। ऊपर से 9वीं क्लास में मुझे पीरियड्स हो गए। स्कूल में शौचालय साफ नहीं रहता है। इस वजह से आए दिन संक्रमण हो जाता था। मम्मी ने बोला 12वीं के बाद पापा तेरी शादी का विचार कर रहे हैं। वैसे भी तो तू पढ़ने में भी सामान्य है। इससे अच्छा है ओपन से पढ़ाई कर लो। इंफेक्शन की दिक्कत से भी निजात मिल जाएगी। लगातार यह बात सुनकर मैंने ओपन स्कूल में ही दाखिला ले लिया। जबकि मेरा भाई पढऩे में मुझसे भी कमजोर है। वो आज भी स्कूल जाता है। यह एक छात्रा की कहानी नहीं है बल्कि सैकड़ों ऐसी छात्राएं हैं, जो पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर है। यही वजह है हर साल 9वीं से 12वीं पहुंचने तक सैकड़ों लड़कियां पढ़ाई छोड़ दे रही हैं। 9वीं से 12वीं तक आते-आते दो से ढ़ाई हजार लड़कियों की सीटें कम हो जा रही है। इसके कई कारण हैं।
जिले में 152 यूपी बोर्ड के स्कूल हैं। स्कूल की पढ़ाई छोडऩे वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियां हैं। वर्ष 2022-23 में 9वीं कक्षा में 11322 लड़कियां और 12वीं में 8496 लड़कियां पंजीकृत थी। यानी 9वीं से 12 तक 2826 सीटें कम हो जा रही हैं। इसके अलावा 2022 में 10 में 15 लड़कियों ने यूपी बोर्ड से घर बैठकर पढ़ाई की, जबकि 12वीं आते-आते यह आंकड़ा 210 तक पहुंच गया।
एक शिक्षक ने बताया कि स्कूलों में शौचालय की बड़ी समस्या है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। शहरी क्षेत्रों में तो सरकारी स्कूल में निजी कंपनियां सीएसआर ( कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत स्कूलों में शौचालय और पानी की व्यवस्था बेहतर करने पर काम कर रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इन पर बहुत कम काम हो रहा है।
9वीं - 11322
10वीं - 10533
11वीं - 8918
12वीं- 8496
2022 2020 2019
10वीं 9235 9306 9326
12वीं 7557 8032 7193
अब छात्राएं करियर को लेकर जागरूक हो गई हैं। इसलिए वो हाईस्कूल से ही वोकेशन कोर्स करने को प्राथमिकता देती हैं, ताकि नौकरी मिलने में आसानी हो सके। इसलिए यह बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि स्कूल प्रबंधकों की ओर से बच्चों की काउंसलिंग भी की जाती है, ताकि वो बीच में पढ़ाई न छोड़े। -डॉ धर्मवीर सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षण