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Noida News: सेक्टर-2 में फर्जी कॉल सेंटर पर छापा, साइबर फ्रॉड गैंग का पर्दाफाश
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- कॉल सेंटर की आड़ में चल रहा था साइबर फ्रॉड, दो ठग गिरफ्तार
- छापा मारकर पुलिस ने दो आरोपियों को मौके से दबोचा
- तीन मोबाइल, सोने और चांदी के सिक्के भी बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फेज-वन पुलिस ने मंगलवार को क्रेडिट कार्ड, केवाईसी और रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने के नाम पर लोगों से साइबर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस ने सेक्टर-2 स्थित निजी भवन में संचालित किए जा रहे कॉल सेंटर में छापा मारकर दो साइबर ठग विकास और सूरज को गिरफ्तार किया है। इनके पास से ठगी में इस्तेमाल तीन मोबाइल, दो पीली धातु के सिक्के और दो सफेद धातु के सिक्के बरामद किए गए हैं।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल नंबरों पर कई राज्यों के लोगों ने एनसीआरबी पोर्टल के जरिए 20 से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कॉल सेंटर में ही बैठकर लोगों को कॉल करके खुद को निजी बैंक के कर्मचारी बताकर उन्हें झांसे में लेते थे। एनसीआरबी में दर्ज इन मामलों के बाद जब फेज-1 थाने की एलआईयू और सर्विलांस के जरिए जांच की गई तो सामने आया कि सेक्टर 2 स्थित एक निजी भवन की चौथी मंजिल में एक फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है, जहां पर लोग आमतौर पर कॉल सेंटर की तरह के काम कर रहे थे। लेकिन उसी बीच ही दो ठगों को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि एयू बैंक, एक्सिस बैंक समेत अन्य बैंकों के क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा चोरी करते थे। इसके बाद वे ग्राहकों को कॉल कर खुद को बैंक कर्मचारी बताते और केवाईसी अपडेट करने या कार्ड के रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने की बात कहते थे। आरोपी लोगों को एक एपीके फाइल डाउनलोड कराते थे। जैसे ही ग्राहक उस ऐप को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता, आरोपी उससे क्रेडिट कार्ड नंबर, सीवीवी और अन्य जरूरी जानकारी भरवा लेते थे। इस एपीके फाइल के जरिए ग्राहकों के मोबाइल पर आने वाला ओटीपी भी आरोपियों तक पहुंच जाता था। ओटीपी हासिल करने के बाद आरोपी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट, जेप्टो और अन्य ऐप के माध्यम से गोल्ड और सिल्वर क्वाइन खरीद लेते थे। डिलीवरी के लिए वे किसी भी अज्ञात पते का उपयोग करते थे ताकि पुलिस तक उनकी पहचान न पहुंच सके।
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न लगे भनक, इसलिए नेटवर्क सिस्टम कर देते थे तबाह : पुलिस ने बताया कि आरोपी कुछ समय तक एक ही सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे और ठगी की कई वारदातों को अंजाम देने के बाद सिम कार्ड तोड़कर फेंक देते थे, जिससे पुलिस ट्रैकिंग से बचा जा सके।
कौन हैं यह दोनों आरोपी : पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार मूल रूप से हापुड़ जिले के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के पलवाड़ा गांव का रहने वाला है। वर्तमान में वह गाजियाबाद के गोविंदपुरम इलाके में रह रहा है। दूसरा आरोपी सूरज हाथरस जिले के सादाबाद थाना क्षेत्र के रसमई गांव का निवासी है और फिलहाल दिल्ली के न्यू अशोक नगर में रह रहा है। विकास कुमार का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है।
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- छापा मारकर पुलिस ने दो आरोपियों को मौके से दबोचा
- तीन मोबाइल, सोने और चांदी के सिक्के भी बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फेज-वन पुलिस ने मंगलवार को क्रेडिट कार्ड, केवाईसी और रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने के नाम पर लोगों से साइबर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस ने सेक्टर-2 स्थित निजी भवन में संचालित किए जा रहे कॉल सेंटर में छापा मारकर दो साइबर ठग विकास और सूरज को गिरफ्तार किया है। इनके पास से ठगी में इस्तेमाल तीन मोबाइल, दो पीली धातु के सिक्के और दो सफेद धातु के सिक्के बरामद किए गए हैं।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल नंबरों पर कई राज्यों के लोगों ने एनसीआरबी पोर्टल के जरिए 20 से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कॉल सेंटर में ही बैठकर लोगों को कॉल करके खुद को निजी बैंक के कर्मचारी बताकर उन्हें झांसे में लेते थे। एनसीआरबी में दर्ज इन मामलों के बाद जब फेज-1 थाने की एलआईयू और सर्विलांस के जरिए जांच की गई तो सामने आया कि सेक्टर 2 स्थित एक निजी भवन की चौथी मंजिल में एक फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है, जहां पर लोग आमतौर पर कॉल सेंटर की तरह के काम कर रहे थे। लेकिन उसी बीच ही दो ठगों को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि एयू बैंक, एक्सिस बैंक समेत अन्य बैंकों के क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा चोरी करते थे। इसके बाद वे ग्राहकों को कॉल कर खुद को बैंक कर्मचारी बताते और केवाईसी अपडेट करने या कार्ड के रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने की बात कहते थे। आरोपी लोगों को एक एपीके फाइल डाउनलोड कराते थे। जैसे ही ग्राहक उस ऐप को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता, आरोपी उससे क्रेडिट कार्ड नंबर, सीवीवी और अन्य जरूरी जानकारी भरवा लेते थे। इस एपीके फाइल के जरिए ग्राहकों के मोबाइल पर आने वाला ओटीपी भी आरोपियों तक पहुंच जाता था। ओटीपी हासिल करने के बाद आरोपी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट, जेप्टो और अन्य ऐप के माध्यम से गोल्ड और सिल्वर क्वाइन खरीद लेते थे। डिलीवरी के लिए वे किसी भी अज्ञात पते का उपयोग करते थे ताकि पुलिस तक उनकी पहचान न पहुंच सके।
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न लगे भनक, इसलिए नेटवर्क सिस्टम कर देते थे तबाह : पुलिस ने बताया कि आरोपी कुछ समय तक एक ही सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे और ठगी की कई वारदातों को अंजाम देने के बाद सिम कार्ड तोड़कर फेंक देते थे, जिससे पुलिस ट्रैकिंग से बचा जा सके।
कौन हैं यह दोनों आरोपी : पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार मूल रूप से हापुड़ जिले के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के पलवाड़ा गांव का रहने वाला है। वर्तमान में वह गाजियाबाद के गोविंदपुरम इलाके में रह रहा है। दूसरा आरोपी सूरज हाथरस जिले के सादाबाद थाना क्षेत्र के रसमई गांव का निवासी है और फिलहाल दिल्ली के न्यू अशोक नगर में रह रहा है। विकास कुमार का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है।