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जीबीयू के विद्यार्थी बना रहे डिलवरी करने वाले ड्रोन
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ग्रेटर नोएडा (संदीप वर्मा)। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के विद्यार्थी ऐेसा ड्रोन बनाने में जुटे हैं जो अस्पताल से ब्लड या अन्य सैंपल लेकर पैथोलेजी लैब ले जाएगा। फिलहाल इसे मेडिकल सेवाओं की उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। हालांकि बाद में इससे पिज्जा, बर्गर समेत अन्य प्रोडक्ट की डिलीवरी कराई जा सकेगी। जीबीयू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी में इसका प्रोटोटाइप तैयार कर लिया गया है। जीबीयू की फैकल्टी और विद्यार्थी सेंटर में प्रशिक्षण देने वाली कंपनी के विशेषज्ञ मिलकर इसमें अन्य तकनीकी सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं।
रिसर्च कर रहे टीम के सदस्य डॉ. विमलेश कुमार के मुताकि ड्रोन को स्वास्थ्य संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। हालांकि आगे चलकर इसका इस्तेमाल पिज्जा, बर्गर जैसी डिलिवरी के लिए भी किया जा सकेगा। सेंटर में कार्य रही टीम हल्का और अधिक मात्रा में सामान लेकर दूर तक ले जाने वाले ड्रोन बनाना चाहती है। फिलहाल जो प्रोटोटाइप बनाया गया है वह 2 किलो भार उठाकर करीब 60 से 70 मिनट तक उड़ान भर सकता है। इस दौरान यह 4 से 5 किमी की दूरी तय कर सकता है। फिलहाल इसकी दूरी और बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रोन की बैटरी और ऐप को डेवलप करने भी रिसर्च किया जा रहा है। शोध में जुटे विशेषज्ञों ने बनाया कि पूरी तरह से विकसित होने के बाद ड्रोन को तैयार करने की लागत 20 से 40 हजार रुपये आ सकती है।
43 विद्यार्थियों-फैकल्टी की टीम कर रही कार्य
जीबीयू के इंफॉरमेशन कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के अंतर्गत शुरू हुए सेंटर ऑफ एक्सलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी में 43 लोगों की टीम अलग-अलग तरीके के ड्रोन और ऐप बनाने रिसर्च कर रही है। इनमें डॉ. राजेश मिश्रा (नेटवर्क स्पेशलिस्ट), डॉ. नावेद रिजवी, डॉ. विमलेश कुमार के अलावा विद्यार्थी सौरभ सैनी, दानिश, शौर्य वर्मा, मणिकरण, ध्रुव उपाध्याय, सुविज्ञा पांडे और ड्रोन सेंटर प्रशिक्षण देने वाली कंपनी ओमनीप्रेजेंट के सीईओ आकाश सिन्हा की टीम शामिल है।
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कई अन्य तरह के ड्रोन किए जा रहे हैं तैयार
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी में कई तरह के ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से एक ड्रोन हवाई जहाज की तरह दिखता है। यह हवा की प्रेशर से उड़ता है और लंबी उड़ान भरने में सक्षम है। इसमें कैमरे लगे हैं। इसका इस्तेमाल कृषि भूमि की मैपिंग समेत अन्य डाटा इकट्ठा करने के लिए किया जाता है।
दिल्ली-एनसीआर में सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी पर रिसर्च का जीबीयू पहला केंद्र है। पीएम मोदी ने भी ड्रोन तकनीक से रोजगार बढ़ाने की बात कही है। केंद्र से रिसर्च का कार्य शुरू हो गया है। इससे आगे चलकर देशभर के युवाओं के लिए रोजगार की राहें भी खुलेंगी और तकनीक में देश को आगे बढ़ाने में जीबीयू अग्रणी भूमिका निभाएगा। - प्रो. आरके सिन्हा, कुलपति जीबीयू
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रिसर्च कर रहे टीम के सदस्य डॉ. विमलेश कुमार के मुताकि ड्रोन को स्वास्थ्य संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। हालांकि आगे चलकर इसका इस्तेमाल पिज्जा, बर्गर जैसी डिलिवरी के लिए भी किया जा सकेगा। सेंटर में कार्य रही टीम हल्का और अधिक मात्रा में सामान लेकर दूर तक ले जाने वाले ड्रोन बनाना चाहती है। फिलहाल जो प्रोटोटाइप बनाया गया है वह 2 किलो भार उठाकर करीब 60 से 70 मिनट तक उड़ान भर सकता है। इस दौरान यह 4 से 5 किमी की दूरी तय कर सकता है। फिलहाल इसकी दूरी और बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रोन की बैटरी और ऐप को डेवलप करने भी रिसर्च किया जा रहा है। शोध में जुटे विशेषज्ञों ने बनाया कि पूरी तरह से विकसित होने के बाद ड्रोन को तैयार करने की लागत 20 से 40 हजार रुपये आ सकती है।
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43 विद्यार्थियों-फैकल्टी की टीम कर रही कार्य
जीबीयू के इंफॉरमेशन कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के अंतर्गत शुरू हुए सेंटर ऑफ एक्सलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी में 43 लोगों की टीम अलग-अलग तरीके के ड्रोन और ऐप बनाने रिसर्च कर रही है। इनमें डॉ. राजेश मिश्रा (नेटवर्क स्पेशलिस्ट), डॉ. नावेद रिजवी, डॉ. विमलेश कुमार के अलावा विद्यार्थी सौरभ सैनी, दानिश, शौर्य वर्मा, मणिकरण, ध्रुव उपाध्याय, सुविज्ञा पांडे और ड्रोन सेंटर प्रशिक्षण देने वाली कंपनी ओमनीप्रेजेंट के सीईओ आकाश सिन्हा की टीम शामिल है।
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कई अन्य तरह के ड्रोन किए जा रहे हैं तैयार
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी में कई तरह के ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से एक ड्रोन हवाई जहाज की तरह दिखता है। यह हवा की प्रेशर से उड़ता है और लंबी उड़ान भरने में सक्षम है। इसमें कैमरे लगे हैं। इसका इस्तेमाल कृषि भूमि की मैपिंग समेत अन्य डाटा इकट्ठा करने के लिए किया जाता है।
दिल्ली-एनसीआर में सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी पर रिसर्च का जीबीयू पहला केंद्र है। पीएम मोदी ने भी ड्रोन तकनीक से रोजगार बढ़ाने की बात कही है। केंद्र से रिसर्च का कार्य शुरू हो गया है। इससे आगे चलकर देशभर के युवाओं के लिए रोजगार की राहें भी खुलेंगी और तकनीक में देश को आगे बढ़ाने में जीबीयू अग्रणी भूमिका निभाएगा। - प्रो. आरके सिन्हा, कुलपति जीबीयू