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गोल्फ कोर्स में भूजल दोहन की होगी जांच
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गोल्फ कोर्स में भूजल दोहन की होगी जांच
नोएडा। सेक्टर-38ए स्थित गोल्फ कोर्स में बड़े पैमाने पर भूजल दोहन किया जा रहा है। पर्यावरणविद विक्रांत तोगड़ ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) में याचिका दायर कर कहा है कि गोल्फ कोर्स में रोजाना 4 लाख लीटर भूजल का इस्तेमाल किया जा रहा है। मामले की जांच के लिए एनजीटी ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (यूपीपीसीबी), सेंट्रल गवर्नमेंट वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यूए) और जिलाधिकारी को शामिल किया गया है। कमेटी को 13 मार्च से पहले एनजीटी में रिपोर्ट पेश करनी होगी।
पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड़ ने बताया कि 13 मार्च को एनजीटी इस मामले में सुनवाई करेगा। आरोप सही पाए गए तो मामले में सख्त कार्रवाई भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि सेक्टर-38ए में 18 होल का गोल्फ कोर्स है। गोल्फ कोर्स में क्लब, स्वीमिंग पूल व अन्य सुविधाएं भी हैं। बीते कई वर्षों से गोल्फ कोर्स प्रबंधन यहां की सिंचाई के लिए भूजल का प्रयोग कर रहा है। तोगड़ के मुताबिक गोल्फ कोर्स में प्रतिदिन करीब 4 लाख लीटर पानी बर्बाद किया जा रहा है। इसमें स्वीमिंग पूल, गेस्ट हाउस व क्लब में होने वाले इस्तेमाल शामिल हैं। यहां भूजल के लिए पांच बोरवेल किए गए हैं।
यह है नियम
नियम के अनुसार गोल्फ कोर्स में सिंचाईं के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के शोधित पानी का प्रयोग किया जाना चाहिए। प्राधिकरण पार्कों व ग्रीन बेल्ट में इसी पानी का प्रयोग करता है। निमार्ण कार्यों में भी इसी पानी का प्रयोग किया जाता है।
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भूजल स्तर में आ रही है गिरावट
विक्रांत का दावा है गोल्फ कोर्स में भूजल के दोहन से आसपास क्षेत्रों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। यहां प्रतिवर्ष 2 मीटर की दर से भू-जल में गिरावट हो रही है।
अनुमति नहीं होने का लगाया आरोप
आरोप है कि गोल्फ कोर्स प्रबंधन के पास भूजल निकासी के लिए सीजीडब्ल्यूए की अनुमति नहीं है। बिना एनओसी के ही यह कार्य किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने प्राधिकरण अधिकारियों से भी कई बार गुहार लगाई, लेकिन गोल्फ कोर्स प्रबंधन पर एक्शन नहीं लिया गया।
एक नजर गोल्फ कोर्स पर
- 18 होल का गोल्फ कोर्स
- क्लब और गेस्ट हाउस के अलावा स्वीमिंग पूल
- 5 बोरवेल कराए गए
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नोएडा। सेक्टर-38ए स्थित गोल्फ कोर्स में बड़े पैमाने पर भूजल दोहन किया जा रहा है। पर्यावरणविद विक्रांत तोगड़ ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) में याचिका दायर कर कहा है कि गोल्फ कोर्स में रोजाना 4 लाख लीटर भूजल का इस्तेमाल किया जा रहा है। मामले की जांच के लिए एनजीटी ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (यूपीपीसीबी), सेंट्रल गवर्नमेंट वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यूए) और जिलाधिकारी को शामिल किया गया है। कमेटी को 13 मार्च से पहले एनजीटी में रिपोर्ट पेश करनी होगी।
पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड़ ने बताया कि 13 मार्च को एनजीटी इस मामले में सुनवाई करेगा। आरोप सही पाए गए तो मामले में सख्त कार्रवाई भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि सेक्टर-38ए में 18 होल का गोल्फ कोर्स है। गोल्फ कोर्स में क्लब, स्वीमिंग पूल व अन्य सुविधाएं भी हैं। बीते कई वर्षों से गोल्फ कोर्स प्रबंधन यहां की सिंचाई के लिए भूजल का प्रयोग कर रहा है। तोगड़ के मुताबिक गोल्फ कोर्स में प्रतिदिन करीब 4 लाख लीटर पानी बर्बाद किया जा रहा है। इसमें स्वीमिंग पूल, गेस्ट हाउस व क्लब में होने वाले इस्तेमाल शामिल हैं। यहां भूजल के लिए पांच बोरवेल किए गए हैं।
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यह है नियम
नियम के अनुसार गोल्फ कोर्स में सिंचाईं के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के शोधित पानी का प्रयोग किया जाना चाहिए। प्राधिकरण पार्कों व ग्रीन बेल्ट में इसी पानी का प्रयोग करता है। निमार्ण कार्यों में भी इसी पानी का प्रयोग किया जाता है।
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भूजल स्तर में आ रही है गिरावट
विक्रांत का दावा है गोल्फ कोर्स में भूजल के दोहन से आसपास क्षेत्रों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। यहां प्रतिवर्ष 2 मीटर की दर से भू-जल में गिरावट हो रही है।
अनुमति नहीं होने का लगाया आरोप
आरोप है कि गोल्फ कोर्स प्रबंधन के पास भूजल निकासी के लिए सीजीडब्ल्यूए की अनुमति नहीं है। बिना एनओसी के ही यह कार्य किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने प्राधिकरण अधिकारियों से भी कई बार गुहार लगाई, लेकिन गोल्फ कोर्स प्रबंधन पर एक्शन नहीं लिया गया।
एक नजर गोल्फ कोर्स पर
- 18 होल का गोल्फ कोर्स
- क्लब और गेस्ट हाउस के अलावा स्वीमिंग पूल
- 5 बोरवेल कराए गए