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आस्था का प्रतीक है गंगा आरती : साध्वी भगवती
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परमार्थ निकेतन में आरती प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन करतीं साध्वी भगवती सरस्वती। स्रोत परमार्
स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन में गंगा जागरूकता और आरती प्रशिक्षण कार्यक्रम का तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के सात जिलों के 15 घाटों से 30 पुरोहितों ने प्रतिभाग किया।
ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस की अंतरराष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि गंगा की आरती केवल दीप और मंत्रों का अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन का अमूल्य प्रतीक है।
जब गंगा तट पर दीप जलते हैं और वेद मंत्रों की ध्वनि वातावरण में गूंजती है तो यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहता, बल्कि जन जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाता है। इस प्रशिक्षण को केवल आरती की विधि या तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि यह संस्कार, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का संगम है।
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इसमें पुरोहितों और प्रतिभागियों को यह समझाया जाता है कि कैसे आरती के मंच को गंगा संरक्षण, जल की पवित्रता और जलीय जीवन के महत्व के संदेश को जनता तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनाया जा सकता है। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अनुभव साझा किया कि यह प्रशिक्षण उनके लिए आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत लाभकारी है।
प्रथम दिवसीय कार्यशाला के समापन पर सभी पुरोहितों और टीम के सदस्यों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने अपने घाटों पर गंगा की आरती के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे, गंगा की पवित्रता और संरक्षण के संदेश को आम जनता तक पहुंचाएंगे। इस मौके पर गंगा नंदिनी, वंदना शर्मा, दिलीप क्षेत्री, राकेश रोशन, दुर्गाप्रसाद नौटियाल, नवीन, आशीष, रेशमी आदि मौजूद रहे।
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ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस की अंतरराष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि गंगा की आरती केवल दीप और मंत्रों का अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन का अमूल्य प्रतीक है।
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जब गंगा तट पर दीप जलते हैं और वेद मंत्रों की ध्वनि वातावरण में गूंजती है तो यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहता, बल्कि जन जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाता है। इस प्रशिक्षण को केवल आरती की विधि या तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि यह संस्कार, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का संगम है।
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इसमें पुरोहितों और प्रतिभागियों को यह समझाया जाता है कि कैसे आरती के मंच को गंगा संरक्षण, जल की पवित्रता और जलीय जीवन के महत्व के संदेश को जनता तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनाया जा सकता है। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अनुभव साझा किया कि यह प्रशिक्षण उनके लिए आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत लाभकारी है।
प्रथम दिवसीय कार्यशाला के समापन पर सभी पुरोहितों और टीम के सदस्यों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने अपने घाटों पर गंगा की आरती के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे, गंगा की पवित्रता और संरक्षण के संदेश को आम जनता तक पहुंचाएंगे। इस मौके पर गंगा नंदिनी, वंदना शर्मा, दिलीप क्षेत्री, राकेश रोशन, दुर्गाप्रसाद नौटियाल, नवीन, आशीष, रेशमी आदि मौजूद रहे।