{"_id":"6919dbe34a480e9a480473a8","slug":"fsdg-grnoida-news-c-23-1-lko1064-80655-2025-11-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: मस्जिद भूखंड आवंटन में धोखाधड़ी के आरोपी को मिली जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: मस्जिद भूखंड आवंटन में धोखाधड़ी के आरोपी को मिली जमानत
विज्ञापन
(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी द्वारा मस्जिद निर्माण के लिए गए भूखंड की लीज के 12.38 लाख रुपये की बैंक ड्राफ्ट राशि हड़पने के मामले में आरोपी शमशीर खान को कोर्ट से राहत मिली है। मामला वर्ष 2011 से जुड़ा है। जब सोसाइटी को नॉलेज पार्क-1 स्थित 1500 वर्ग मीटर का भूखंड मस्जिद निर्माण के लिए आवंटित हुआ था। आरोप के अनुसार लीज डीड रजिस्ट्री के दौरान समिति की ओर से 12.38 लाख रुपये का बैंक ड्राफ्ट ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में जमा कराया गया, लेकिन बाद में पता चला कि राशि बैंक खाते में पहुंची ही नहीं।
ग्रेटर नोएडा ने 18 नवंबर 2022 के पत्र में बैंक से इसकी पुष्टि की कि ऐसा कोई ड्राफ्ट उनके पास जमा नहीं हुआ। वादी पक्ष का आरोप था कि लंबे समय से समिति में पदाधिकारी रहे कुछ लोगों ने ड्राफ्ट संबंधी अनियमितता कर आर्थिक गड़बड़ी की। जिसमें शमशीर खान को भी आरोपी बनाया गया। बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि घटना 2011 की है। जबकि शमशीर खान 1 अक्तूबर-2012 को कोषाध्यक्ष बने और 6 सितंबर 2015 को इस्तीफा दे दिया। इसलिए ड्राफ्ट घटनाक्रम में उनकी कोई भूमिका नहीं हो सकती। वादी पक्ष ने 2011–2014 के पदाधिकारियों पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद खालिद, सचिव फरहत रफीक और कोषाध्यक्ष हबीब खान का ही नाम तहरीर में दर्शाया है। अदालत ने माना कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जमानत का आधार पर्याप्त है।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी द्वारा मस्जिद निर्माण के लिए गए भूखंड की लीज के 12.38 लाख रुपये की बैंक ड्राफ्ट राशि हड़पने के मामले में आरोपी शमशीर खान को कोर्ट से राहत मिली है। मामला वर्ष 2011 से जुड़ा है। जब सोसाइटी को नॉलेज पार्क-1 स्थित 1500 वर्ग मीटर का भूखंड मस्जिद निर्माण के लिए आवंटित हुआ था। आरोप के अनुसार लीज डीड रजिस्ट्री के दौरान समिति की ओर से 12.38 लाख रुपये का बैंक ड्राफ्ट ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में जमा कराया गया, लेकिन बाद में पता चला कि राशि बैंक खाते में पहुंची ही नहीं।
ग्रेटर नोएडा ने 18 नवंबर 2022 के पत्र में बैंक से इसकी पुष्टि की कि ऐसा कोई ड्राफ्ट उनके पास जमा नहीं हुआ। वादी पक्ष का आरोप था कि लंबे समय से समिति में पदाधिकारी रहे कुछ लोगों ने ड्राफ्ट संबंधी अनियमितता कर आर्थिक गड़बड़ी की। जिसमें शमशीर खान को भी आरोपी बनाया गया। बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि घटना 2011 की है। जबकि शमशीर खान 1 अक्तूबर-2012 को कोषाध्यक्ष बने और 6 सितंबर 2015 को इस्तीफा दे दिया। इसलिए ड्राफ्ट घटनाक्रम में उनकी कोई भूमिका नहीं हो सकती। वादी पक्ष ने 2011–2014 के पदाधिकारियों पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद खालिद, सचिव फरहत रफीक और कोषाध्यक्ष हबीब खान का ही नाम तहरीर में दर्शाया है। अदालत ने माना कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जमानत का आधार पर्याप्त है।
विज्ञापन