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Noida News: तला-भुना खाना डाल रहा बॉक्सरों के प्रदर्शन पर असर, छह दिन बीतने के बाद भी इंतजाम नहीं

Wed, 28 Aug 2024 08:08 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 28 Aug 2024 08:08 PM IST
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Fried food is affecting the performance of boxers, no arrangements even after six days
आयोजकों की ओर से नहीं की गई खाने की व्यवस्था, ढाबे व ठेलों पर खाने को मजबूर खिलाड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। आरईसी ओपन टैलेंट हंट-1 प्रतियोगिता में देशभर के बॉक्सर हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन खिलाड़ियों को उनकी डाइट के अनुसार खाना नहीं मिलने से उनके प्रदर्शन पर भी असर पड़ने लगा है। आयोजकों के स्तर पर खाने के इंतजाम नहीं होने के कारण खिलाड़ी इधर उधर के ढाबे व ठेलों पर तला भुना खाने को मजबूर है। इससे उन्हें खेलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। साथ ही खिलाड़ियों को पेट खराब होने का डर भी सता रहा है। वहीं, छह दिन बीत जाने के बाद भी आयोजकों का कहना है कि खिलाड़ियों के खाने की व्यवस्था के लिए कैटरर्स से बात की जा रही है।
शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आयोजित टैलेंट हंट बॉक्सिंग प्रतियोगिता में देशभर से एलीट व यूथ वर्ग में करीब तीन हजार खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। आयोजक की तरफ से खाने की व्यवस्था न होने पर खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भोजन खाना होता है, लेकिन मजबूरी में खस्ता कचौरी, चाउमीन, बर्गर, पिज्जा आदि खाना पड़ रहा है। इससे उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके प्रदर्शन पर भी असर पड़ रहा है। साथ ही इसके लिए दो से तीन किमी दूर मार्केटों में जाना पड़ता है। जिससे उनके समय और पैसों की हानि हो रही है। इसके अलावा कुछ खिलाड़ी वापस आने में देरी होने के कारण मुकाबलों से वंचित भी रह गए।
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छठे दिन हुए पांचवें दिन के बचे मुकाबले
बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम और भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित आरईसी ओपन टैंलेंट हंट-1 प्रतियोगिता के छठे दिन भी पांचवें दिन के बचे हुए करीब 100 मुकाबले खेले गए। समय पर मुकाबले कराने के लिए आयोजकों को काफी मेहनत करनी पड़ रही है। प्रतियोगिता शेड्यूल के हिसाब से संपन्न कराने के आयोजकों के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं।
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आयोजकों के स्तर पर खाने की व्यवस्था नहीं होने से खिलाड़ियों को मजबूरी में ढाबे और ठेलो पर तला भुना खाना पड़ रहा है। इससे प्रदर्शन पर भी असर दिखाई दे रहा है। साथ ही पेट खराब होने का डर भी है। -नितिन, बॉक्सर।

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हैदराबाद से आया हूं, 48 किग्रा भारवर्ग में प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहा हूंं। ऑटो चालकों की किराये के लिए मनमानी से बचने के लिए मजबूरी में पैदल ही दो से तीन किमी दूर मार्केट में जाना पड़ रहा है। वहां से वापस आने में मुकाबला छूटने का डर लगा रहता है। -- अब्दुल, बॉक्सर।
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