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Noida News: ईयूडीआर के पालन से लड़की हस्तशिल्प कारीगर हो सकते हैं बेरोजगार
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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिला ईपीसीएच के निर्यातकों का प्रतिनिधिमंडल, ईयूडीआर पर हस्तक्षेप करने की मांग की
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ईपीसीएच के नेतृत्व में हस्तशिल्प निर्यातकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यात की सुरक्षा के लिए यूरोपीय संघ के वन विनाश नियमों (ईयूडीआर) पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। कहा कि अगर नियमों का पालन किया तो फिर उत्पादन प्रभावित होगा। कारीगर और उनके आश्रित बेरोजगार हो जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में जोधपुर, सहारनपुर के उद्यमी भी मौजूद रहें।
ईपीसीएच के अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने बताया कि केंद्रीय मंत्री को ईयूडीआर के पालन पर लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यातकों के सामने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों के बारे में बताया गया। ईपीसीएच अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि यूरोपीय संघ ने वनों की कटाई को रोकने के लिए सराहनीय फैसला लिया है लेकिन ईयूडीआर अनुपालन की आवश्यकता लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यातकों को काफी प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प में मुख्य रूप से आम, बबूल और शीशम की लकड़ियों का प्रयोग होता है जो ज्यादातर कृषि वानिकी से प्राप्त होते हैं। ये पेड़ प्राकृतिक जंगलों के बाहर उगाए जाते हैं। वनों की कटाई के तहत नहीं आते हैं। देश की स्थिति को ध्यान में नहीं रखकर इस नियम को लागू किया गया तो फिर काफी समस्या आएगी। काफी कारीगर और एमएसएमई निर्यातक यूरोपीय संघ के बाजारों में अपनी जगह गंवा सकते हैं। उत्पादन में गिरावट, ऑर्डर रद्द होने के साथ ही कारीगरों और उनके आश्रित बेरोजगार हो सकते हैं। उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत के लाखों कारीगरों की आर्थिक रीढ़ है। अगर सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी तो ईयूडीआर का पालन निर्यातकों के लिए काफी मुश्किल होगा।
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पिछले साल 8,524 करोड़ का रहा था निर्यात
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आरके वर्मा ने बताया कि लाखों कारीगर होम डेकोर, लाइफस्टाइल, टेक्सटाइल, फर्नीचर और एक्सेसीरीज जैसे वैश्विक ब्रांड तैयार कर रहे है। वर्ष 2024-25 के दौरान हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,123 करोड़ रुपये का रहा था। इसमें लड़की हस्तशिल्पों का निर्यात 8,524.74 करोड़ का था। इसमें करीब छह प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। यूरोपीय संघ को 2591.29 करोड़ का माल निर्यात किया गया था।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ईपीसीएच के नेतृत्व में हस्तशिल्प निर्यातकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यात की सुरक्षा के लिए यूरोपीय संघ के वन विनाश नियमों (ईयूडीआर) पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। कहा कि अगर नियमों का पालन किया तो फिर उत्पादन प्रभावित होगा। कारीगर और उनके आश्रित बेरोजगार हो जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में जोधपुर, सहारनपुर के उद्यमी भी मौजूद रहें।
ईपीसीएच के अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने बताया कि केंद्रीय मंत्री को ईयूडीआर के पालन पर लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यातकों के सामने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों के बारे में बताया गया। ईपीसीएच अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि यूरोपीय संघ ने वनों की कटाई को रोकने के लिए सराहनीय फैसला लिया है लेकिन ईयूडीआर अनुपालन की आवश्यकता लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यातकों को काफी प्रभावित कर सकती है।
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उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प में मुख्य रूप से आम, बबूल और शीशम की लकड़ियों का प्रयोग होता है जो ज्यादातर कृषि वानिकी से प्राप्त होते हैं। ये पेड़ प्राकृतिक जंगलों के बाहर उगाए जाते हैं। वनों की कटाई के तहत नहीं आते हैं। देश की स्थिति को ध्यान में नहीं रखकर इस नियम को लागू किया गया तो फिर काफी समस्या आएगी। काफी कारीगर और एमएसएमई निर्यातक यूरोपीय संघ के बाजारों में अपनी जगह गंवा सकते हैं। उत्पादन में गिरावट, ऑर्डर रद्द होने के साथ ही कारीगरों और उनके आश्रित बेरोजगार हो सकते हैं। उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत के लाखों कारीगरों की आर्थिक रीढ़ है। अगर सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी तो ईयूडीआर का पालन निर्यातकों के लिए काफी मुश्किल होगा।
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पिछले साल 8,524 करोड़ का रहा था निर्यात
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आरके वर्मा ने बताया कि लाखों कारीगर होम डेकोर, लाइफस्टाइल, टेक्सटाइल, फर्नीचर और एक्सेसीरीज जैसे वैश्विक ब्रांड तैयार कर रहे है। वर्ष 2024-25 के दौरान हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,123 करोड़ रुपये का रहा था। इसमें लड़की हस्तशिल्पों का निर्यात 8,524.74 करोड़ का था। इसमें करीब छह प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। यूरोपीय संघ को 2591.29 करोड़ का माल निर्यात किया गया था।