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Noida News: नगर आयुक्त और महापौर के बढ़ेंगे वित्तीय अधिकार

Mon, 22 Sep 2025 02:13 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 22 Sep 2025 02:13 AM IST
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Financial powers of Municipal Commissioner and Mayor will increase

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लखनऊ। नगर आयुक्त अभी केवल 10 लाख रुपये तक के विकास कार्यों को मंजूरी दे पाते हैं। इससे अधिक की फाइल कार्यकारिणी और सदन में जाती है, जहां महापौर और पार्षदों की सहमति न होने पर मंजूरी अटक जाती है। अब शासन उस प्रस्ताव पर सहमत हो गया है, जिसमें नगर आयुक्त का वित्तीय अधिकार एक करोड़ और महापौर का पांच करोड़ रुपये करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही कार्यकारिणी और सदन के अधिकार भी बढ़ाए जाएंगे।

कम अधिकार होने के कारण कई बार विकास कार्यों को टुकड़ों में बांटकर टेंडर जारी किए जाते हैं, ताकि एक टेंडर 10 लाख रुपये से अधिक का न हो और वह ई-टेंडरिंग से बाहर रहे। इसी वजह से हर साल करीब 250 करोड़ रुपये के कार्य मैनुअल टेंडर से कराए जाते हैं। जानकार बताते हैं कि मैनुअल टेंडर अक्सर आगणन दर पर ही आते हैं, जबकि ई-टेंडरिंग से वही कार्य 15-20% तक कम दर पर होते हैं। पिछले दो वर्षों में ई-टेंडरिंग से लगभग 50 करोड़ रुपये की बचत हुई, जिससे अतिरिक्त कार्य कराए जा सके।
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करीब 20 दिन पहले नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में मैनुअल टेंडर के पक्ष में प्रस्ताव भी पास किया गया। इसकी वजह यह रही कि महापौर और पार्षद कोटा छोड़कर अन्य सभी कार्य ई-टेंडरिंग से हो रहे थे, जिससे सेटिंग के जरिये ठेका दिलाने वालों का काम ठप हो गया था। प्रस्ताव पास होने के बाद मैनुअल टेंडर फिर से शुरू हो गए।
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अधिकार बढ़ने से मैनुअल टेंडर पर भी अपने आप रोक लग जाएगी, क्योंकि अभी 10 लाख तक का वित्तीय अधिकार होने से और शासनादेश में भी नगर निगम निधि से कराए जाने वाले कार्यों के ई टेंडर की बाध्यता न होने का लाभ लिया जा रहा है।

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अभी यह है व्यवस्था

नगर आयुक्त : 10 लाख रुपये तक

महापौर : 15 लाख रुपये तक

कार्यकारिणी : 20 लाख रुपये तक

सदन : 30 लाख रुपये तक, उससे अधिक पर शासन से मंजूरी लेनी होती है।

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बदलाव की वजह

- महापौर और नगर आयुक्त के बीच टकराव से फाइलें अटकना।

- कार्यकारिणी और सदन की बैठक देर से होने पर 30 लाख तक के कार्य अटकना।

- शासन आदेश के बावजूद ई-टेंडरिंग सिस्टम का लागू न हो पाना।

- विकास कार्यों की लागत बढ़ने के कारण भी फाइलों की मंजूरी नगर आयुक्तों के स्तर पर नहीं हो पा रही है।

- महापौर की मनमर्जी पर रोक लगेगी।
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