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Noida News: फर्जी जमानत पत्र मामले में आरोपी को नहीं मिली अग्रिम राहत
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने फर्जी जमानत पत्र प्रकरण में आरोपी मनोज कुमार की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। मामला थाना सूरजपुर में दर्ज से संबंधित है। जिसमें आरोपी पर संगठित गिरोह बनाकर न्यायालय में फर्जी जमानत प्रपत्र दाखिल करने का आरोप है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सत्र लिपिक सुबोध शर्मा ने 8 सितंबर 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कि आरोपी साजिद उर्फ चिमटा के संबंध में प्रस्तुत जमानत पत्र फर्जी पाए गए थे। जांच में यह तथ्य सामने आया कि जमानतदार मनोज कुमार और त्रिलोक चंद निवासी बुलंदशहर द्वारा न्यायालय में गलत बंधपत्र दाखिल किए गए थे। जिन पर फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज संलग्न थे।
आरोपी की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी में कहा गया था कि उसे इस प्रकरण में झूठा फंसाया गया है। उसने किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार नहीं किए और न ही न्यायालय में कोई फर्जी जमानत पत्र प्रस्तुत किया। वहीं अभियोजन की ओर से कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का है और आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया पाई गई है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी के अवलोकन के बाद कहा कि प्रस्तुत प्रकरण में आरोपी पर न्यायालय में फर्जी जमानत पत्र दाखिल करने का गंभीर आरोप है। यह अपराध न्याय व्यवस्था की पवित्रता के विपरीत हैं। वहीं अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने फर्जी जमानत पत्र प्रकरण में आरोपी मनोज कुमार की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। मामला थाना सूरजपुर में दर्ज से संबंधित है। जिसमें आरोपी पर संगठित गिरोह बनाकर न्यायालय में फर्जी जमानत प्रपत्र दाखिल करने का आरोप है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सत्र लिपिक सुबोध शर्मा ने 8 सितंबर 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कि आरोपी साजिद उर्फ चिमटा के संबंध में प्रस्तुत जमानत पत्र फर्जी पाए गए थे। जांच में यह तथ्य सामने आया कि जमानतदार मनोज कुमार और त्रिलोक चंद निवासी बुलंदशहर द्वारा न्यायालय में गलत बंधपत्र दाखिल किए गए थे। जिन पर फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज संलग्न थे।
आरोपी की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी में कहा गया था कि उसे इस प्रकरण में झूठा फंसाया गया है। उसने किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार नहीं किए और न ही न्यायालय में कोई फर्जी जमानत पत्र प्रस्तुत किया। वहीं अभियोजन की ओर से कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का है और आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया पाई गई है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी के अवलोकन के बाद कहा कि प्रस्तुत प्रकरण में आरोपी पर न्यायालय में फर्जी जमानत पत्र दाखिल करने का गंभीर आरोप है। यह अपराध न्याय व्यवस्था की पवित्रता के विपरीत हैं। वहीं अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया।
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