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Noida News: कागजों में फिट, तकनीकी जांच में निकली अनफिट... 39 बसें सीज
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‘फिट’ बसों का सच आया सामने, दो दिन में 39 सीज
- सर्टिफिकेट में दिया फिट का ठप्पा, जांच में निकलीं 39 बसें निकली खटारा
-, विभाग का दावा-तकनीकी खामी मिलने पर निलंबित होगा फिटनेस
-यमुना एक्सप्रेसवे हादसे के बाद ऑपरेशन कवच में खुली फिटनेस जांच की पोल, दो दिन में 39 बसें सीज
-234 बसें पहले से अनफिट, अब मानकों पर खरी नहीं उतरने पर फिटनेस प्रमाणपत्र होगा निलंबित
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। बस के पास फिटनेस प्रमाणपत्र है तो क्या वह वाकई सड़क पर दौड़ने के लिए फिट है? यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस अग्निकांड के बाद परिवहन विभाग के सघन जांच अभियान ने इसी सवाल को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ऑपरेशन कवच 2.0 में दो दिन के भीतर 39 बसें सीज हुई हैं, जिनकी तकनीकी जांच में कई खामियां सामने आने की आशंका है। परिवहन विभाग ने अब ऐसी बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण पर कार्रवाई की तैयारी की है।
दरअसल, हाल ही में यमुना एक्सप्रेसवे पर जलकर खाक हुई बस की जांच के दौरान उसके फिटनेस समेत जरूरी प्रमाणपत्र मिले थे। इसके बावजूद बस हादसे का शिकार हुई। घटना के बाद अब विभाग बसों के दस्तावेजों के साथ उनकी वास्तविक तकनीकी स्थिति की भी जांच कर रहा है। परिवहन विभाग की ओर से 28 से 30 सितंबर तक ऑपरेशन कवच 2.0 चलाया जा रहा है। जिले में पांच प्रवर्तन दल लगाए गए हैं। सोमवार को अभियान के पहले दिन 21 और दूसरे दिन यानी मंगलवार को 18 बसें सीज की गईं। दो दिन में कुल 39 बसों को बंद किया गया है।
विभाग के अनुसार इन बसों को केवल चालान या जुर्माना लेकर नहीं छोड़ा जाएगा। एआईएस-119 मानकों के अनुसार तकनीकी निरीक्षण में बसों की सुरक्षा जांच होगी। मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली बसों का फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण निलंबित किया जाएगा। हादसे के बाद शुरू हुई जांच में अब यह भी सामने आ रहा है कि केवल फिटनेस प्रमाणपत्र होना बस के सड़क पर सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है।
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234 अनफिट बसों से अभी भी खतरा : जिले में चार हजार से अधिक बसें पंजीकृत हैं। इनमें 234 बसें अनफिट बताई गई हैं। बावजूद इसके इनके संचालन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई बसों में सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन खिड़की, अग्निशमन यंत्र, रिफ्लेक्टर और स्पीड गवर्नर जैसे सुरक्षा मानकों की स्थिति भी जांच का विषय है। दिल्ली-नोएडा से दूसरे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए रोजाना बड़ी संख्या में बसों का संचालन होता है। राह चलते जिन बसों के पास फिटनेस प्रमाण पत्र होगा, लेकिन प्राथमिक तौर पर यदि उनमें खामी पायी जाती है तो उनपर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनकी तकनीकी जांच भी जिले में मौजूद एटीएस सेंटरों में कराई जाएगी, यदि वह वाहन तकनीकी जांच में फेल हुए तो उनके फिटनेस प्रमाण पत्र को निलंबित कर दिया जाएगा।
आज भी चलेगा सघन चेकिंग अभियान : परिवहन विभाग के अनुसार, प्रवर्तन दल की पांच टीमें शहरभर के अलग-अलग हिस्सों पर नाकाबंदी करके डग्गामार, अनफिट बसों की जांच करेंगे। जहां कमी पाये जाने पर भारी भरकम जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी, ज्यादा समस्या पाये जाने पर सीज की कार्रवाई होगी, यदि उन बसों की फिटनेस तकनीकी जांच में विफल पायी जाती है, तो उनका फिटनेस निलंबित किया जाएगा।
बसों के पास यदि फिटनेस प्रमाण पत्र है, लेकिन उनमें फिर भी तकनीकी खामी पायी जाती है तो उनके फिटनेस प्रमाण पत्र को निलंबित किया जाएगा।
-डॉ उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ प्रवर्तन, परिवहन विभाग, गौतमबुद्ध नगर
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- सर्टिफिकेट में दिया फिट का ठप्पा, जांच में निकलीं 39 बसें निकली खटारा
-, विभाग का दावा-तकनीकी खामी मिलने पर निलंबित होगा फिटनेस
-यमुना एक्सप्रेसवे हादसे के बाद ऑपरेशन कवच में खुली फिटनेस जांच की पोल, दो दिन में 39 बसें सीज
-234 बसें पहले से अनफिट, अब मानकों पर खरी नहीं उतरने पर फिटनेस प्रमाणपत्र होगा निलंबित
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। बस के पास फिटनेस प्रमाणपत्र है तो क्या वह वाकई सड़क पर दौड़ने के लिए फिट है? यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस अग्निकांड के बाद परिवहन विभाग के सघन जांच अभियान ने इसी सवाल को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ऑपरेशन कवच 2.0 में दो दिन के भीतर 39 बसें सीज हुई हैं, जिनकी तकनीकी जांच में कई खामियां सामने आने की आशंका है। परिवहन विभाग ने अब ऐसी बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण पर कार्रवाई की तैयारी की है।
दरअसल, हाल ही में यमुना एक्सप्रेसवे पर जलकर खाक हुई बस की जांच के दौरान उसके फिटनेस समेत जरूरी प्रमाणपत्र मिले थे। इसके बावजूद बस हादसे का शिकार हुई। घटना के बाद अब विभाग बसों के दस्तावेजों के साथ उनकी वास्तविक तकनीकी स्थिति की भी जांच कर रहा है। परिवहन विभाग की ओर से 28 से 30 सितंबर तक ऑपरेशन कवच 2.0 चलाया जा रहा है। जिले में पांच प्रवर्तन दल लगाए गए हैं। सोमवार को अभियान के पहले दिन 21 और दूसरे दिन यानी मंगलवार को 18 बसें सीज की गईं। दो दिन में कुल 39 बसों को बंद किया गया है।
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विभाग के अनुसार इन बसों को केवल चालान या जुर्माना लेकर नहीं छोड़ा जाएगा। एआईएस-119 मानकों के अनुसार तकनीकी निरीक्षण में बसों की सुरक्षा जांच होगी। मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली बसों का फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण निलंबित किया जाएगा। हादसे के बाद शुरू हुई जांच में अब यह भी सामने आ रहा है कि केवल फिटनेस प्रमाणपत्र होना बस के सड़क पर सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है।
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234 अनफिट बसों से अभी भी खतरा : जिले में चार हजार से अधिक बसें पंजीकृत हैं। इनमें 234 बसें अनफिट बताई गई हैं। बावजूद इसके इनके संचालन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई बसों में सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन खिड़की, अग्निशमन यंत्र, रिफ्लेक्टर और स्पीड गवर्नर जैसे सुरक्षा मानकों की स्थिति भी जांच का विषय है। दिल्ली-नोएडा से दूसरे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए रोजाना बड़ी संख्या में बसों का संचालन होता है। राह चलते जिन बसों के पास फिटनेस प्रमाण पत्र होगा, लेकिन प्राथमिक तौर पर यदि उनमें खामी पायी जाती है तो उनपर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनकी तकनीकी जांच भी जिले में मौजूद एटीएस सेंटरों में कराई जाएगी, यदि वह वाहन तकनीकी जांच में फेल हुए तो उनके फिटनेस प्रमाण पत्र को निलंबित कर दिया जाएगा।
आज भी चलेगा सघन चेकिंग अभियान : परिवहन विभाग के अनुसार, प्रवर्तन दल की पांच टीमें शहरभर के अलग-अलग हिस्सों पर नाकाबंदी करके डग्गामार, अनफिट बसों की जांच करेंगे। जहां कमी पाये जाने पर भारी भरकम जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी, ज्यादा समस्या पाये जाने पर सीज की कार्रवाई होगी, यदि उन बसों की फिटनेस तकनीकी जांच में विफल पायी जाती है, तो उनका फिटनेस निलंबित किया जाएगा।
बसों के पास यदि फिटनेस प्रमाण पत्र है, लेकिन उनमें फिर भी तकनीकी खामी पायी जाती है तो उनके फिटनेस प्रमाण पत्र को निलंबित किया जाएगा।
-डॉ उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ प्रवर्तन, परिवहन विभाग, गौतमबुद्ध नगर