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Noida News: एमसीडी भुगतान घोटाले में आरोपी अकाउंटेंट को नहीं मिली जमानत
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(अदालत से)
-मेट्रो अस्पताल के नाम पर फर्जी खाते में ट्रांसफर हुए करोड़ों रुपये
-अदालत ने कहा कि अपराध प्रथम दृष्टया गंभीर, सह-आरोपियों की जमानत पहले ही हो चुकी है खारिज
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के भुगतान में करोड़ों रुपये की साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में आरोपी नितिन चावला को अदालत से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला थाना साइबर क्राइम में दर्ज है। मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के रिकवरी हेड ने शिकायत दी थी। शिकायत के अनुसार, 7 मार्च 2025 को 74.90 लाख रुपये का भुगतान एक फर्जी यस बैंक खाते में भेजा गया। यह खाता अस्पताल या कंपनी का नहीं था। जांच में पता चला कि अस्पताल के पूर्व कर्मचारी वैभव कुमार के ईमेल से एमसीडी को फर्जी चेक भेजा गया था। चेक पर मेट्रो मेडिकल सर्विसेज का नाम था, पर खाता संख्या गलत थी। आरोप है कि नाम बदलकर या जालसाजी कर रकम धोखाधड़ी वाले खाते में डलवाई गई।
अभियोजन ने बताया कि नितिन चावला एमसीडी में डीए (आरटीजीएस) पद पर था और उस पर भुगतान अभिलेखों के निर्माण का जिम्मा था। असली खातों की जगह संदिग्ध यस बैंक खातों में करीब 9 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए। दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच तीन किस्तों में 1.88 करोड़ रुपये भेजे गए थे। कोर्ट ने कहा कि यह मामला गंभीर धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़ा है। सह-आरोपियों की जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है, इसलिए जमानत का
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-मेट्रो अस्पताल के नाम पर फर्जी खाते में ट्रांसफर हुए करोड़ों रुपये
-अदालत ने कहा कि अपराध प्रथम दृष्टया गंभीर, सह-आरोपियों की जमानत पहले ही हो चुकी है खारिज
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के भुगतान में करोड़ों रुपये की साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में आरोपी नितिन चावला को अदालत से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला थाना साइबर क्राइम में दर्ज है। मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के रिकवरी हेड ने शिकायत दी थी। शिकायत के अनुसार, 7 मार्च 2025 को 74.90 लाख रुपये का भुगतान एक फर्जी यस बैंक खाते में भेजा गया। यह खाता अस्पताल या कंपनी का नहीं था। जांच में पता चला कि अस्पताल के पूर्व कर्मचारी वैभव कुमार के ईमेल से एमसीडी को फर्जी चेक भेजा गया था। चेक पर मेट्रो मेडिकल सर्विसेज का नाम था, पर खाता संख्या गलत थी। आरोप है कि नाम बदलकर या जालसाजी कर रकम धोखाधड़ी वाले खाते में डलवाई गई।
अभियोजन ने बताया कि नितिन चावला एमसीडी में डीए (आरटीजीएस) पद पर था और उस पर भुगतान अभिलेखों के निर्माण का जिम्मा था। असली खातों की जगह संदिग्ध यस बैंक खातों में करीब 9 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए। दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच तीन किस्तों में 1.88 करोड़ रुपये भेजे गए थे। कोर्ट ने कहा कि यह मामला गंभीर धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़ा है। सह-आरोपियों की जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है, इसलिए जमानत का
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